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ਜੋ ਗੁਰਸਿਖ ਗੁਰੁ ਸੇਵਦੇ ਸੇ ਪੁੰਨ ਪਰਾਣੀ ॥ जो गुरसिख गुरु सेवदे से पुंन पराणी ॥ जो गुरु के शिष्य अपने गुरु की सेवा करते हैं, वे उत्तम प्राणी हैं। The Guru’s disciples who follow his teachings are the truly blessed people. ਜਨੁ ਨਾਨਕੁ ਤਿਨ ਕਉ ਵਾਰਿਆ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕੁਰਬਾਣੀ ॥੧੦॥ जनु नानकु तिन कउ

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ਆਪੇ ਜਾਣੈ ਕਰੇ ਆਪਿ ਜਿਨਿ ਵਾੜੀ ਹੈ ਲਾਈ ॥੧॥आपे जाणै करे आपि जिनि वाड़ी है लाई ॥१॥जिस प्रभु रूपी बागबां ने यह जगत् रूपी वाटिका लगाई है, वह स्वयं ही इस बारे जानता है और स्वयं ही इसकी देखरेख करता है॥ १॥ ਰਾਇਸਾ ਪਿਆਰੇ ਕਾ ਰਾਇਸਾ ਜਿਤੁ ਸਦਾ ਸੁਖੁ ਹੋਈ ॥ ਰਹਾਉ ॥राइसा पिआरे का

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ਹੈ ਤੂਹੈ ਤੂ ਹੋਵਨਹਾਰ ॥है तूहै तू होवनहार ॥तू वर्तमान काल में भी है और भविष्य काल में भी तू ही होने वाला है। ਅਗਮ ਅਗਾਧਿ ਊਚ ਆਪਾਰ ॥अगम अगाधि ऊच आपार ॥तू अगम्य, असीम, सर्वोच्च एवं अपार है। ਜੋ ਤੁਧੁ ਸੇਵਹਿ ਤਿਨ ਭਉ ਦੁਖੁ ਨਾਹਿ ॥जो तुधु सेवहि तिन भउ दुखु नाहि ॥जो व्यक्ति

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ਖੂਨ ਕੇ ਸੋਹਿਲੇ ਗਾਵੀਅਹਿ ਨਾਨਕ ਰਤੁ ਕਾ ਕੁੰਗੂ ਪਾਇ ਵੇ ਲਾਲੋ ॥੧॥ खून के सोहिले गावीअहि नानक रतु का कुंगू पाइ वे लालो ॥१॥ नानक का कथन है कि हे लालो ! इस खूनी विवाह में सैदपुर नगर के अन्दर खून के मंगल गीत गाए जा रहे है अर्थात् हर तरफ विलाप हो रहा है

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ਰਾਗੁ ਤਿਲੰਗ ਮਹਲਾ ੧ ਘਰੁ ੧रागु तिलंग महला १ घरु १रागु तिलंग महला १ घरु १ ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥ईश्वर एक है, उसका नाम सत्य है, वह आदिपुरुष संसार का रचनहार है, सर्वशक्तिमान है,

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ਹਰਿ ਆਪੇ ਪੰਚ ਤਤੁ ਬਿਸਥਾਰਾ ਵਿਚਿ ਧਾਤੂ ਪੰਚ ਆਪਿ ਪਾਵੈ ॥हरि आपे पंच ततु बिसथारा विचि धातू पंच आपि पावै ॥उस परमात्मा ने स्वयं आकाश, वायु अग्नि, जल एवं पृथ्वी इन पाँच तत्वों का जगत प्रसार किया है और वह स्वयं ही इसमें काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार रूपी पाँच विकार डालता है। ਜਨ

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ਖੂਨ ਕੇ ਸੋਹਿਲੇ ਗਾਵੀਅਹਿ ਨਾਨਕ ਰਤੁ ਕਾ ਕੁੰਗੂ ਪਾਇ ਵੇ ਲਾਲੋ ॥੧॥खून के सोहिले गावीअहि नानक रतु का कुंगू पाइ वे लालो ॥१॥नानक का कथन है कि हे लालो ! इस खूनी विवाह में सैदपुर नगर के अन्दर खून के मंगल गीत गाए जा रहे है अर्थात् हर तरफ विलाप हो रहा है और रक्त

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ਟੋਡੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥टोडी महला ५ ॥टोडी महला ५ ॥ ਹਰਿ ਹਰਿ ਚਰਨ ਰਿਦੈ ਉਰ ਧਾਰੇ ॥हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥मैंने भगवान के सुन्दर चरण अपने हृदय में बसा लिए हैं और ਸਿਮਰਿ ਸੁਆਮੀ ਸਤਿਗੁਰੁ ਅਪੁਨਾ ਕਾਰਜ ਸਫਲ ਹਮਾਰੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥सिमरि सुआमी सतिगुरु अपुना कारज सफल हमारे ॥१॥ रहाउ ॥अपने स्वामी सतगुरु

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ਸਾਂਤਿ ਸਹਜ ਸੂਖ ਮਨਿ ਉਪਜਿਓ ਕੋਟਿ ਸੂਰ ਨਾਨਕ ਪਰਗਾਸ ॥੨॥੫॥੨੪॥सांति सहज सूख मनि उपजिओ कोटि सूर नानक परगास ॥२॥५॥२४॥हे नानक ! मेरे मन में करोड़ों सूर्य जितना प्रभु ज्योति का प्रकाश हो गया है और मन में सहज सुख एवं शांति उत्पन्न हो गई है॥ २॥ ५ ॥ २४॥ ਟੋਡੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥टोडी महला ५

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ਸੂਹੀ ਮਹਲਾ ੧ ॥सूही महला १ ॥सूही महला १ ॥ ਭਾਂਡਾ ਹਛਾ ਸੋਇ ਜੋ ਤਿਸੁ ਭਾਵਸੀ ॥भांडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥हृदय रूपी बर्तन वही अच्छा है, जो प्रभु को अच्छा लगता है। ਭਾਂਡਾ ਅਤਿ ਮਲੀਣੁ ਧੋਤਾ ਹਛਾ ਨ ਹੋਇਸੀ ॥भांडा अति मलीणु धोता हछा न होइसी ॥जो हृदय रूपी बर्तन बहुत ही मैला

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