Hindi Page 226
ਪਰ ਘਰਿ ਚੀਤੁ ਮਨਮੁਖਿ ਡੋਲਾਇ ॥पर घरि चीतु मनमुखि डोलाइ ॥स्वेच्छाचारी इन्सान का मन पराई नारी की लालसा करता है। ਗਲਿ ਜੇਵਰੀ ਧੰਧੈ ਲਪਟਾਇ ॥गलि जेवरी धंधै लपटाइ ॥उसकी गर्दन पर मृत्यु का फँदा होता है और वह सांसारिक विवादों में फंसा रहता है। ਗੁਰਮੁਖਿ ਛੂਟਸਿ ਹਰਿ ਗੁਣ ਗਾਇ ॥੫॥गुरमुखि छूटसि हरि गुण गाइ ॥५॥गुरमुख
