Hindi Page 1367
ਕਬੀਰ ਥੋਰੈ ਜਲਿ ਮਾਛੁਲੀ ਝੀਵਰਿ ਮੇਲਿਓ ਜਾਲੁ ॥कबीर थोरै जलि माछुली झीवरि मेलिओ जालु ॥कबीर जी उद्बोधन करते हैं- (जीव रूपी) मछली थोड़े से जल में रहती है, काल रूपी मछुआरा जाल बिछाकर पकड़ लेता है। ਇਹ ਟੋਘਨੈ ਨ ਛੂਟਸਹਿ ਫਿਰਿ ਕਰਿ ਸਮੁੰਦੁ ਸਮ੍ਹ੍ਹਾਲਿ ॥੪੯॥इह टोघनै न छूटसहि फिरि करि समुंदु सम्हालि ॥४९॥जीव देवी-देवताओं की
