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ਸਭਿ ਜੀਅ ਤੇਰੇ ਤੂ ਸਭਸ ਦਾ ਤੂ ਸਭ ਛਡਾਹੀ ॥੪॥सभि जीअ तेरे तू सभस दा तू सभ छडाही ॥४॥समस्त जीव-जन्तु तेरे हैं और तू सबका मालिक है। तू समस्त जीव-जन्तुओं को मुक्ति प्रदान करता है॥ ४॥ ਸਲੋਕ ਮਃ ੪ ॥सलोक मः ४ ॥श्लोक महला ४॥ ਸੁਣਿ ਸਾਜਨ ਪ੍ਰੇਮ ਸੰਦੇਸਰਾ ਅਖੀ ਤਾਰ ਲਗੰਨਿ ॥सुणि साजन प्रेम

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ਸਭਿ ਕਾਰਜ ਤਿਨ ਕੇ ਸਿਧਿ ਹਹਿ ਜਿਨ ਗੁਰਮੁਖਿ ਕਿਰਪਾ ਧਾਰਿ ॥सभि कारज तिन के सिधि हहि जिन गुरमुखि किरपा धारि ॥जिन गुरमुखों पर वह कृपा करता है, उनके तमाम कार्य सफल हो जाते हैं। ਨਾਨਕ ਜੋ ਧੁਰਿ ਮਿਲੇ ਸੇ ਮਿਲਿ ਰਹੇ ਹਰਿ ਮੇਲੇ ਸਿਰਜਣਹਾਰਿ ॥੨॥नानक जो धुरि मिले से मिलि रहे हरि मेले सिरजणहारि ॥२॥हे

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ਮਨੁ ਤਨੁ ਸੀਤਲੁ ਸਾਂਤਿ ਸਹਜ ਲਾਗਾ ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਸੇਵ ॥मनु तनु सीतलु सांति सहज लागा प्रभ की सेव ॥“(गुरु की कृपा से) वह ईश्वर की भक्ति में लग गया है, जिससे उसका मन तन शीतल हो गया, उसके भीतर शांति एवं सहज सुख उत्पन्न हो गया। ਟੂਟੇ ਬੰਧਨ ਬਹੁ ਬਿਕਾਰ ਸਫਲ ਪੂਰਨ ਤਾ ਕੇ ਕਾਮ

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ਹਸਤ ਚਰਨ ਸੰਤ ਟਹਲ ਕਮਾਈਐ ॥हसत चरन संत टहल कमाईऐ ॥अपने हाथों एवं चरणों से साधुओं की सेवा करो। ਨਾਨਕ ਇਹੁ ਸੰਜਮੁ ਪ੍ਰਭ ਕਿਰਪਾ ਪਾਈਐ ॥੧੦॥नानक इहु संजमु प्रभ किरपा पाईऐ ॥१०॥हे नानक ! यह जीवन-आचरण ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त होता है ॥१०॥ ਸਲੋਕੁ ॥सलोकु ॥श्लोक ॥ ਏਕੋ ਏਕੁ ਬਖਾਨੀਐ ਬਿਰਲਾ ਜਾਣੈ ਸ੍ਵਾਦੁ

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ਊਤਮੁ ਊਚੌ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ਗੁਣ ਅੰਤੁ ਨ ਜਾਣਹਿ ਸੇਖ ॥ऊतमु ऊचौ पारब्रहमु गुण अंतु न जाणहि सेख ॥भगवान बड़ा महान एवं सर्वोपरि है, जिसकी महिमा का अन्त अनेकों शेषनाग भी नहीं जान सकते। ਨਾਰਦ ਮੁਨਿ ਜਨ ਸੁਕ ਬਿਆਸ ਜਸੁ ਗਾਵਤ ਗੋਬਿੰਦ ॥नारद मुनि जन सुक बिआस जसु गावत गोबिंद ॥नारद मुनि, मुनिजन, शुकदेव एवं व्यास भी

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ਲਾਭੁ ਮਿਲੈ ਤੋਟਾ ਹਿਰੈ ਹਰਿ ਦਰਗਹ ਪਤਿਵੰਤ ॥लाभु मिलै तोटा हिरै हरि दरगह पतिवंत ॥तुझे लाभ प्राप्त होगा और कोई नुक्सान नहीं होगा एवं ईश्वर के दरबार में मान-सम्मान मिलेगा। ਰਾਮ ਨਾਮ ਧਨੁ ਸੰਚਵੈ ਸਾਚ ਸਾਹ ਭਗਵੰਤ ॥राम नाम धनु संचवै साच साह भगवंत ॥जो व्यक्ति राम नाम रूपी धन एकत्र करता है वही व्यक्ति

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ਜਿਸੁ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਸਭੁ ਜਗਤੁ ਤਰਾਇਆ ॥जिसु प्रसादि सभु जगतु तराइआ ॥जिसकी कृपा से सारे जगत् का उद्धार हो जाता है। ਜਨ ਆਵਨ ਕਾ ਇਹੈ ਸੁਆਉ ॥जन आवन का इहै सुआउ ॥महापुरुष के आगमन का यही मनोरथ है कि ਜਨ ਕੈ ਸੰਗਿ ਚਿਤਿ ਆਵੈ ਨਾਉ ॥जन कै संगि चिति आवै नाउ ॥उसकी संगति में रहकर दूसरे

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ਬਨਿ ਤਿਨਿ ਪਰਬਤਿ ਹੈ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ॥बनि तिनि परबति है पारब्रहमु ॥पारब्रह्म-प्रभु वनों, तृणों एवं पर्वतों में व्यापक है। ਜੈਸੀ ਆਗਿਆ ਤੈਸਾ ਕਰਮੁ ॥जैसी आगिआ तैसा करमु ॥जैसी उसकी आज्ञा होती है, वैसे ही जीव के कर्म हैं। ਪਉਣ ਪਾਣੀ ਬੈਸੰਤਰ ਮਾਹਿ ॥पउण पाणी बैसंतर माहि ॥भगवान पवन, जल एवं अग्नि में विद्यमान है। ਚਾਰਿ ਕੁੰਟ

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ਨਾਨਕ ਹਰਿ ਪ੍ਰਭਿ ਆਪਹਿ ਮੇਲੇ ॥੪॥नानक हरि प्रभि आपहि मेले ॥४॥हे नानक ! हरि-प्रभु उसे अपने साथ मिला लेता है॥ ४॥ ਸਾਧਸੰਗਿ ਮਿਲਿ ਕਰਹੁ ਅਨੰਦ ॥साधसंगि मिलि करहु अनंद ॥साध संगत में मिलकर आनंद करो ਗੁਨ ਗਾਵਹੁ ਪ੍ਰਭ ਪਰਮਾਨੰਦ ॥गुन गावहु प्रभ परमानंद ॥और परमानन्द प्रभु की गुणस्तुति करते रहो। ਰਾਮ ਨਾਮ ਤਤੁ ਕਰਹੁ ਬੀਚਾਰੁ

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ਕੋਊ ਨਰਕ ਕੋਊ ਸੁਰਗ ਬੰਛਾਵਤ ॥कोऊ नरक कोऊ सुरग बंछावत ॥कोई नरक में जाने लगा और कोई स्वर्ग की अभिलाषा करने लगा। ਆਲ ਜਾਲ ਮਾਇਆ ਜੰਜਾਲ ॥आल जाल माइआ जंजाल ॥ईश्वर ने सांसारिक विवाद, धन-दौलत के जंजाल, ਹਉਮੈ ਮੋਹ ਭਰਮ ਭੈ ਭਾਰ ॥हउमै मोह भरम भै भार ॥अहंकार, मोह, दुविधा एवं भय के भार बना

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