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ਹਉ ਤੁਧੁ ਆਖਾ ਮੇਰੀ ਕਾਇਆ ਤੂੰ ਸੁਣਿ ਸਿਖ ਹਮਾਰੀ ॥हउ तुधु आखा मेरी काइआ तूं सुणि सिख हमारी ॥हे मेरी काया ! मैं तुझे फिर कहता हूँ, मेरी सीख को ध्यानपूर्वक सुन। ਨਿੰਦਾ ਚਿੰਦਾ ਕਰਹਿ ਪਰਾਈ ਝੂਠੀ ਲਾਇਤਬਾਰੀ ॥निंदा चिंदा करहि पराई झूठी लाइतबारी ॥तुम दूसरों की निन्दा और प्रशंसा करती हो और झूठी चुगली

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ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੧ ॥गउड़ी महला १ ॥गउड़ी महला १ ॥ ਕਿਰਤੁ ਪਇਆ ਨਹ ਮੇਟੈ ਕੋਇ ॥किरतु पइआ नह मेटै कोइ ॥पूर्व जन्म के कर्मों के कारण जो मेरी किस्मत में लिखा हुआ है, उसे कोई भी मिटा नहीं सकता। ਕਿਆ ਜਾਣਾ ਕਿਆ ਆਗੈ ਹੋਇ ॥किआ जाणा किआ आगै होइ ॥मैं नहीं जानता कि मेरे साथ

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ਨਾਮ ਸੰਜੋਗੀ ਗੋਇਲਿ ਥਾਟੁ ॥नाम संजोगी गोइलि थाटु ॥जो नाम संजोगी हैं, वह संसार को चरागाह में एक अस्थिर स्थान समझते हैं। ਕਾਮ ਕ੍ਰੋਧ ਫੂਟੈ ਬਿਖੁ ਮਾਟੁ ॥काम क्रोध फूटै बिखु माटु ॥भोग-विलास एवं अहंकार की विषैली गागर अन्त में फूट जाती है। ਬਿਨੁ ਵਖਰ ਸੂਨੋ ਘਰੁ ਹਾਟੁ ॥बिनु वखर सूनो घरु हाटु ॥नाम के

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ਸਰਮ ਸੁਰਤਿ ਦੁਇ ਸਸੁਰ ਭਏ ॥सरम सुरति दुइ ससुर भए ॥लज्जा एवं सुरति दोनों मेरे सास-ससुर बन गए हैं। ਕਰਣੀ ਕਾਮਣਿ ਕਰਿ ਮਨ ਲਏ ॥੨॥करणी कामणि करि मन लए ॥२॥सदाचरण को मैंने अपनी पत्नी बना लिया है॥ २॥ ਸਾਹਾ ਸੰਜੋਗੁ ਵੀਆਹੁ ਵਿਜੋਗੁ ॥साहा संजोगु वीआहु विजोगु ॥सत्संग मेरे विवाह का समय है और संसार से

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ਰਾਗੁ ਗਉੜੀ ਗੁਆਰੇਰੀ ਮਹਲਾ ੧ ਚਉਪਦੇ ਦੁਪਦੇरागु गउड़ी गुआरेरी महला १ चउपदे दुपदेरागु गउड़ी गुआरेरी महला १ चउपदे दुपदे ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥परमात्मा एक है, उसका नाम सत्य है। वह सृष्टि का रचयिता सर्वशक्तिमान

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ਦਯਿ ਵਿਗੋਏ ਫਿਰਹਿ ਵਿਗੁਤੇ ਫਿਟਾ ਵਤੈ ਗਲਾ ॥दयि विगोए फिरहि विगुते फिटा वतै गला ॥प्रभु द्वारा कुमार्गगामी किए हुए वह अपमानित हुए फिरते हैं और उनका समूह समुदाय भ्रष्ट हो जाता है। ਜੀਆ ਮਾਰਿ ਜੀਵਾਲੇ ਸੋਈ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਈ ਰਖੈ ॥जीआ मारि जीवाले सोई अवरु न कोई रखै ॥वह यह भी नहीं समझते कि प्राणियों

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ਸਚਾ ਸਬਦੁ ਬੀਚਾਰਿ ਕਾਲੁ ਵਿਧਉਸਿਆ ॥सचा सबदु बीचारि कालु विधउसिआ ॥सत्यस्वरूप ब्रह्म का चिन्तन करने से उसने काल (मृत्यु) को नष्ट कर दिया है। ਢਾਢੀ ਕਥੇ ਅਕਥੁ ਸਬਦਿ ਸਵਾਰਿਆ ॥ढाढी कथे अकथु सबदि सवारिआ ॥यशोगान करने वाला चारण अकथनीय प्रभु की महिमा बखान करता है और प्रभु नाम से श्रृंगारा गया है अर्थात् उसका जन्म

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ਕਬ ਚੰਦਨਿ ਕਬ ਅਕਿ ਡਾਲਿ ਕਬ ਉਚੀ ਪਰੀਤਿ ॥कब चंदनि कब अकि डालि कब उची परीति ॥यह कभी स्वर्ग रूपी चंदन के वृक्ष और कभी नरक रूपी आक की डाली पर बैठता है। यह कभी भगवान से भी प्रेम कर लेता है। ਨਾਨਕ ਹੁਕਮਿ ਚਲਾਈਐ ਸਾਹਿਬ ਲਗੀ ਰੀਤਿ ॥੨॥नानक हुकमि चलाईऐ साहिब लगी रीति ॥२॥हे

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ਸਚੈ ਸਬਦਿ ਨੀਸਾਣਿ ਠਾਕ ਨ ਪਾਈਐ ॥सचै सबदि नीसाणि ठाक न पाईऐ ॥जो व्यक्ति सत्य-नाम का परवाना लेकर जाता है, उसे आत्मस्वरूप में जाने से कोई भी रोक नहीं सकता। ਸਚੁ ਸੁਣਿ ਬੁਝਿ ਵਖਾਣਿ ਮਹਲਿ ਬੁਲਾਈਐ ॥੧੮॥सचु सुणि बुझि वखाणि महलि बुलाईऐ ॥१८॥जो व्यक्ति भगवान के सत्यनाम को सुनता, समझता एवं उसे जपता है, वह

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ਤੀਜੈ ਮੁਹੀ ਗਿਰਾਹ ਭੁਖ ਤਿਖਾ ਦੁਇ ਭਉਕੀਆ ॥तीजै मुही गिराह भुख तिखा दुइ भउकीआ ॥तीसरे प्रहर में जब भूख और प्यास रूपी दोनों कुत्ते भौंकने लग जाते हैं तो मनुष्य को उनके मुँह में भोजन एवं पानी डालना पड़ता है, ਖਾਧਾ ਹੋਇ ਸੁਆਹ ਭੀ ਖਾਣੇ ਸਿਉ ਦੋਸਤੀ ॥खाधा होइ सुआह भी खाणे सिउ दोसती ॥जब

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