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ਜਾ ਤੁਧੁ ਭਾਵਹਿ ਤਾ ਕਰਹਿ ਬਿਭੂਤਾ ਸਿੰਙੀ ਨਾਦੁ ਵਜਾਵਹਿ ॥जा तुधु भावहि ता करहि बिभूता सिंङी नादु वजावहि ॥जब तुझे अच्छा लगता है तो प्राणी अपने शरीर पर विभूति मलता है और सिंगी नाद बजाता है। ਜਾ ਤੁਧੁ ਭਾਵੈ ਤਾ ਪੜਹਿ ਕਤੇਬਾ ਮੁਲਾ ਸੇਖ ਕਹਾਵਹਿ ॥जा तुधु भावै ता पड़हि कतेबा मुला सेख कहावहि ॥जब

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ਏਕ ਤੁਈ ਏਕ ਤੁਈ ॥੨॥एक तुई एक तुई ॥२॥हे ईश्वर ! एक तेरे सिवाय दूसरा कोई भी सदैव स्थिर नहीं है। तीनों कालों में एक तू ही सदैव सत्य है॥ २॥ ਮਃ ੧ ॥मः १ ॥महला १ ॥ ਨ ਦਾਦੇ ਦਿਹੰਦ ਆਦਮੀ ॥न दादे दिहंद आदमी ॥जगत् में न धरती के उपरोक्त आकाश के सप्त

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ਖੁੰਢਾ ਅੰਦਰਿ ਰਖਿ ਕੈ ਦੇਨਿ ਸੁ ਮਲ ਸਜਾਇ ॥खुंढा अंदरि रखि कै देनि सु मल सजाइ ॥बेलनों के बीच रखकर मलकर अथवा पहलवानों के समान जो पुरुष हैं वह इसको दबाते और दण्ड देते हैं। ਰਸੁ ਕਸੁ ਟਟਰਿ ਪਾਈਐ ਤਪੈ ਤੈ ਵਿਲਲਾਇ ॥रसु कसु टटरि पाईऐ तपै तै विललाइ ॥उसका रस खींचकर कड़ाहे में डाला

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ਪਰਬਤੁ ਸੁਇਨਾ ਰੁਪਾ ਹੋਵੈ ਹੀਰੇ ਲਾਲ ਜੜਾਉ ॥परबतु सुइना रुपा होवै हीरे लाल जड़ाउ ॥यदि हीरे एवं जवाहरों से जड़ित सोने एवं चांदी का पर्वत भी मुझे मिल जाए, ਭੀ ਤੂੰਹੈ ਸਾਲਾਹਣਾ ਆਖਣ ਲਹੈ ਨ ਚਾਉ ॥੧॥भी तूंहै सालाहणा आखण लहै न चाउ ॥१॥मैं फिर भी तेरा ही यशोगान करूँगा और तेरी महिमा करने की

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ਮਃ ੧ ॥मः १ ॥महला १॥ ਹਕੁ ਪਰਾਇਆ ਨਾਨਕਾ ਉਸੁ ਸੂਅਰ ਉਸੁ ਗਾਇ ॥हकु पराइआ नानका उसु सूअर उसु गाइ ॥हे नानक ! पराया हक खाना मुसलमान के लिए सूअर खाने के समान है और हिन्दू के लिए गाय खाने के समान है। ਗੁਰੁ ਪੀਰੁ ਹਾਮਾ ਤਾ ਭਰੇ ਜਾ ਮੁਰਦਾਰੁ ਨ ਖਾਇ ॥गुरु पीरु हामा

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ਅਵਰੀ ਨੋ ਸਮਝਾਵਣਿ ਜਾਇ ॥अवरी नो समझावणि जाइ ॥फिर भी वह दूसरों को उपदेश करने जाता है कि झूठ मत बोलो। ਮੁਠਾ ਆਪਿ ਮੁਹਾਏ ਸਾਥੈ ॥मुठा आपि मुहाए साथै ॥जो स्वयं लुटा जा रहा है और अपने साथियों को भी लुटा रहा है, ਨਾਨਕ ਐਸਾ ਆਗੂ ਜਾਪੈ ॥੧॥नानक ऐसा आगू जापै ॥१॥हे नानक ! वह

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ਸੋਭਾ ਸੁਰਤਿ ਸੁਹਾਵਣੀ ਜਿਨਿ ਹਰਿ ਸੇਤੀ ਚਿਤੁ ਲਾਇਆ ॥੨॥सोभा सुरति सुहावणी जिनि हरि सेती चितु लाइआ ॥२॥जिन्होंने प्रभु से अपना चित लगाया है, उनकी जगत् में बड़ी शोभा होती है एवं उनकी सुरति सुन्दर हो जाती है॥ २ ॥ ਸਲੋਕੁ ਮਃ ੨ ॥सलोकु मः २ ॥श्लोक महला २॥ ਅਖੀ ਬਾਝਹੁ ਵੇਖਣਾ ਵਿਣੁ ਕੰਨਾ ਸੁਨਣਾ ॥अखी

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ਆਇਆ ਗਇਆ ਮੁਇਆ ਨਾਉ ॥आइआ गइआ मुइआ नाउ ॥वह इस संसार में आया था और चला गया है और उसका नाम भी मर मिट गया है। ਪਿਛੈ ਪਤਲਿ ਸਦਿਹੁ ਕਾਵ ॥पिछै पतलि सदिहु काव ॥उसके उपरांत पत्तलों पर भोजन दिया जाता है और कौए बुलाए जाते हैं अर्थात् श्राद्ध किए जाते हैं। ਨਾਨਕ ਮਨਮੁਖਿ ਅੰਧੁ

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ਸਸੁਰੈ ਪੇਈਐ ਤਿਸੁ ਕੰਤ ਕੀ ਵਡਾ ਜਿਸੁ ਪਰਵਾਰੁ ॥ससुरै पेईऐ तिसु कंत की वडा जिसु परवारु ॥लोक-परलोक में जीव-स्त्री उस प्रभु की है, जिसका बड़ा परिवार है। ਊਚਾ ਅਗਮ ਅਗਾਧਿ ਬੋਧ ਕਿਛੁ ਅੰਤੁ ਨ ਪਾਰਾਵਾਰੁ ॥ऊचा अगम अगाधि बोध किछु अंतु न पारावारु ॥प्रभु सर्वोच्च एवं अगम्य है। उसका ज्ञान अथाह है और उसके आर-पार

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ਕਾਮਿ ਕਰੋਧਿ ਨ ਮੋਹੀਐ ਬਿਨਸੈ ਲੋਭੁ ਸੁਆਨੁ ॥कामि करोधि न मोहीऐ बिनसै लोभु सुआनु ॥इस तरह काम-क्रोध मोहित नहीं करते और लालच का कूकर (कुत्ता) नाश हो जाता है। ਸਚੈ ਮਾਰਗਿ ਚਲਦਿਆ ਉਸਤਤਿ ਕਰੇ ਜਹਾਨੁ ॥सचै मारगि चलदिआ उसतति करे जहानु ॥संसार उनकी महिमा करता है जो सद्मार्ग पर चलते हैं। ਅਠਸਠਿ ਤੀਰਥ ਸਗਲ ਪੁੰਨ

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