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ਕਾਲਿ ਦੈਤਿ ਸੰਘਾਰੇ ਜਮ ਪੁਰਿ ਗਏ ॥੨॥कालि दैति संघारे जम पुरि गए ॥२॥जब काल रूपी दैत्य संहार करता है तो वे यमपुरी पहुँच जाते हैं।॥२॥ ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਲਿਵ ਲਾਗੇ ॥गुरमुखि हरि हरि हरि लिव लागे ॥गुरुमुख की परमात्मा में ही लगन लगी रहती है और ਜਨਮ ਮਰਣ ਦੋਊ ਦੁਖ ਭਾਗੇ ॥੩॥जनम मरण दोऊ

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ਇਨ ਬਿਧਿ ਇਹੁ ਮਨੁ ਹਰਿਆ ਹੋਇ ॥इन बिधि इहु मनु हरिआ होइ ॥इस तरीके से यह मन हरा-भरा हो जाता है ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਜਪੈ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਉਮੈ ਕਢੈ ਧੋਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥हरि हरि नामु जपै दिनु राती गुरमुखि हउमै कढै धोइ ॥१॥ रहाउ ॥यदि दिन-रात परमात्मा का जाप किया जाए, गुरु अहम् की

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ਗੁਰ ਪੂਰੇ ਤੇ ਪਾਇਆ ਜਾਈ ॥गुर पूरे ते पाइआ जाई ॥जिसे पूरे गुरु से ही पाया जा सकता है। ਨਾਮਿ ਰਤੇ ਸਦਾ ਸੁਖੁ ਪਾਈ ॥नामि रते सदा सुखु पाई ॥प्रभु-नाम में लीन रहने से सदा सुख प्राप्त होता है, ਬਿਨੁ ਨਾਮੈ ਹਉਮੈ ਜਲਿ ਜਾਈ ॥੩॥बिनु नामै हउमै जलि जाई ॥३॥परन्तु नाम विहीन व्यक्ति अहम् में

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ਦਰਿ ਸਾਚੈ ਸਚੁ ਸੋਭਾ ਹੋਇ ॥दरि साचै सचु सोभा होइ ॥उस सच्चे प्रभु के दरबार में ही शोभा प्राप्त होती है और ਨਿਜ ਘਰਿ ਵਾਸਾ ਪਾਵੈ ਸੋਇ ॥੩॥निज घरि वासा पावै सोइ ॥३॥उसे ही अपने सच्चे घर में निवास प्राप्त होता है॥३॥ ਆਪਿ ਅਭੁਲੁ ਸਚਾ ਸਚੁ ਸੋਇ ॥आपि अभुलु सचा सचु सोइ ॥परमात्मा कोई भूल

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ਪਰਪੰਚ ਵੇਖਿ ਰਹਿਆ ਵਿਸਮਾਦੁ ॥परपंच वेखि रहिआ विसमादु ॥वह जगत प्रपंच को देखकर विस्मित हो जाता है। ਗੁਰਮੁਖਿ ਪਾਈਐ ਨਾਮ ਪ੍ਰਸਾਦੁ ॥੩॥गुरमुखि पाईऐ नाम प्रसादु ॥३॥नाम की बख्शिश गुरु से ही प्राप्त होती है।॥३॥ ਆਪੇ ਕਰਤਾ ਸਭਿ ਰਸ ਭੋਗ ॥आपे करता सभि रस भोग ॥संसार को बनाने वाला परमेश्वर स्वयं ही सभी रस भोगता है।

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ਨਦਰਿ ਕਰੇ ਚੂਕੈ ਅਭਿਮਾਨੁ ॥नदरि करे चूकै अभिमानु ॥यदि परमात्मा कृपादृष्टि कर दे तो अभिमान दूर हो जाता है और ਸਾਚੀ ਦਰਗਹ ਪਾਵੈ ਮਾਨੁ ॥साची दरगह पावै मानु ॥सच्चे दरबार में यश प्राप्त होता है। ਹਰਿ ਜੀਉ ਵੇਖੈ ਸਦ ਹਜੂਰਿ ॥हरि जीउ वेखै सद हजूरि ॥भक्तजन ईश्वर को सदैव पास ही देखते हैं और ਗੁਰ

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ਜਿਨ ਕਉ ਤਖਤਿ ਮਿਲੈ ਵਡਿਆਈ ਗੁਰਮੁਖਿ ਸੇ ਪਰਧਾਨ ਕੀਏ ॥जिन कउ तखति मिलै वडिआई गुरमुखि से परधान कीए ॥जिनको राजसिंहासन पर विराजमान होने की बड़ाई मिलती है, उन्हें वही प्रमुख बनाता है। ਪਾਰਸੁ ਭੇਟਿ ਭਏ ਸੇ ਪਾਰਸ ਨਾਨਕ ਹਰਿ ਗੁਰ ਸੰਗਿ ਥੀਏ ॥੪॥੪॥੧੨॥पारसु भेटि भए से पारस नानक हरि गुर संगि थीए ॥४॥४॥१२॥गुरु नानक का

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ਕਾਹੇ ਕਲਰਾ ਸਿੰਚਹੁ ਜਨਮੁ ਗਵਾਵਹੁ ॥काहे कलरा सिंचहु जनमु गवावहु ॥अरे भाई ! तुम्हारा जन्म बेकार ही जा रहा है, क्यों बंजर भूमि सींच रहा है। ਕਾਚੀ ਢਹਗਿ ਦਿਵਾਲ ਕਾਹੇ ਗਚੁ ਲਾਵਹੁ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥काची ढहगि दिवाल काहे गचु लावहु ॥१॥ रहाउ ॥शरीर रूपी कच्ची दीवार नष्ट हो जाएगी, क्यों इस पर धार्मिक दिखावे का

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ਗੁਰਿ ਸੰਗਿ ਦਿਖਾਇਓ ਰਾਮ ਰਾਇ ॥੧॥गुरि संगि दिखाइओ राम राइ ॥१॥(उत्तर) यदि गुरु का साथ प्राप्त हो जाए तो वह प्रभु के दर्शन करवा देता है॥१॥ ਮਿਲੁ ਸਖੀ ਸਹੇਲੀ ਹਰਿ ਗੁਨ ਬਨੇ ॥मिलु सखी सहेली हरि गुन बने ॥हे सखी सहेलियो ! मिलकर ईश्वर का यशगान करना ही अच्छा है। ਹਰਿ ਪ੍ਰਭ ਸੰਗਿ ਖੇਲਹਿ ਵਰ

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ਜਾਮਿ ਨ ਭੀਜੈ ਸਾਚ ਨਾਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥जामि न भीजै साच नाइ ॥१॥ रहाउ ॥जब तक सच्चे प्रभु नाम में रत नहीं होते॥१॥ रहाउ॥ ਦਸ ਅਠ ਲੀਖੇ ਹੋਵਹਿ ਪਾਸਿ ॥दस अठ लीखे होवहि पासि ॥अगर अठारह पुराण लिखकर पास रख लिए जाएँ, ਚਾਰੇ ਬੇਦ ਮੁਖਾਗਰ ਪਾਠਿ ॥चारे बेद मुखागर पाठि ॥चार वेदों का पाठ मौखिक

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