Hindi Page 1174

ਪਰਪੰਚ ਵੇਖਿ ਰਹਿਆ ਵਿਸਮਾਦੁ ॥
परपंच वेखि रहिआ विसमादु ॥
वह जगत प्रपंच को देखकर विस्मित हो जाता है।

ਗੁਰਮੁਖਿ ਪਾਈਐ ਨਾਮ ਪ੍ਰਸਾਦੁ ॥੩॥
गुरमुखि पाईऐ नाम प्रसादु ॥३॥
नाम की बख्शिश गुरु से ही प्राप्त होती है।॥३॥

ਆਪੇ ਕਰਤਾ ਸਭਿ ਰਸ ਭੋਗ ॥
आपे करता सभि रस भोग ॥
संसार को बनाने वाला परमेश्वर स्वयं ही सभी रस भोगता है।

ਜੋ ਕਿਛੁ ਕਰੇ ਸੋਈ ਪਰੁ ਹੋਗ ॥
जो किछु करे सोई परु होग ॥
जो कुछ वह करता है, वह निश्चय होता है।

ਵਡਾ ਦਾਤਾ ਤਿਲੁ ਨ ਤਮਾਇ ॥
वडा दाता तिलु न तमाइ ॥
वह बहुत बड़ा दाता है (सदैव संसार को देता रहता है) उसे तिल भर कोई लोभ नहीं।

ਨਾਨਕ ਮਿਲੀਐ ਸਬਦੁ ਕਮਾਇ ॥੪॥੬॥
नानक मिलीऐ सबदु कमाइ ॥४॥६॥
हे नानक ! शब्द-गुरु अनुसार आचरण करने से ही उसे मिला जा सकता है॥४॥ ६॥

ਬਸੰਤੁ ਮਹਲਾ ੩ ॥
बसंतु महला ३ ॥
बसंतु महला ३॥

ਪੂਰੈ ਭਾਗਿ ਸਚੁ ਕਾਰ ਕਮਾਵੈ ॥
पूरै भागि सचु कार कमावै ॥
पूर्ण खुशकिस्मत जीव भक्ति एवं धर्म का कार्य करता है,

ਏਕੋ ਚੇਤੈ ਫਿਰਿ ਜੋਨਿ ਨ ਆਵੈ ॥
एको चेतै फिरि जोनि न आवै ॥
परब्रह्म का स्मरण करता है और पुनः योनि में नहीं आता।

ਸਫਲ ਜਨਮੁ ਇਸੁ ਜਗ ਮਹਿ ਆਇਆ ॥
सफल जनमु इसु जग महि आइआ ॥
इस संसार में उसका जन्म सफल हो जाता है और

ਸਾਚਿ ਨਾਮਿ ਸਹਜਿ ਸਮਾਇਆ ॥੧॥
साचि नामि सहजि समाइआ ॥१॥
वह सहज स्वभाव ही ईश्वर के नाम में लीन रहता है॥१॥

ਗੁਰਮੁਖਿ ਕਾਰ ਕਰਹੁ ਲਿਵ ਲਾਇ ॥
गुरमुखि कार करहु लिव लाइ ॥
गुरु के निर्देशानुसार कार्य करो, परमेश्वर में लवलीन रहो।

ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਸੇਵਹੁ ਵਿਚਹੁ ਆਪੁ ਗਵਾਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
हरि नामु सेवहु विचहु आपु गवाइ ॥१॥ रहाउ ॥
मन का अभिमान निकाल कर परमेश्वर की बंदगी करो॥ १॥ रहाउ॥

ਤਿਸੁ ਜਨ ਕੀ ਹੈ ਸਾਚੀ ਬਾਣੀ ॥
तिसु जन की है साची बाणी ॥
जिस भक्त की वाणी शाश्वत होती है,

ਗੁਰ ਕੈ ਸਬਦਿ ਜਗ ਮਾਹਿ ਸਮਾਣੀ ॥
गुर कै सबदि जग माहि समाणी ॥
गुरु के उपदेश से पूरे संसार में फैल जाती है।

ਚਹੁ ਜੁਗ ਪਸਰੀ ਸਾਚੀ ਸੋਇ ॥
चहु जुग पसरी साची सोइ ॥
चारों युगों में उसकी कीर्ति फैल जाती है,

ਨਾਮਿ ਰਤਾ ਜਨੁ ਪਰਗਟੁ ਹੋਇ ॥੨॥
नामि रता जनु परगटु होइ ॥२॥
ईश्वर की भक्ति में तल्लीन ऐसा भक्त सब ओर प्रख्यात हो जाता है।॥२॥

ਇਕਿ ਸਾਚੈ ਸਬਦਿ ਰਹੇ ਲਿਵ ਲਾਇ ॥
इकि साचै सबदि रहे लिव लाइ ॥
कई सच्चे शब्द में लवलीन रहते हैं,

ਸੇ ਜਨ ਸਾਚੇ ਸਾਚੈ ਭਾਇ ॥
से जन साचे साचै भाइ ॥
ऐसे सत्यशील व्यक्ति परम सत्य प्रभु को अच्छे लगते हैं।

ਸਾਚੁ ਧਿਆਇਨਿ ਦੇਖਿ ਹਜੂਰਿ ॥
साचु धिआइनि देखि हजूरि ॥
वे ईश्वर को आसपास मानते हुए उसके ध्यान में ही निमग्न रहते हैं और

ਸੰਤ ਜਨਾ ਕੀ ਪਗ ਪੰਕਜ ਧੂਰਿ ॥੩॥
संत जना की पग पंकज धूरि ॥३॥
संतजनों की चरणरज ही चाहते हैं।३॥

ਏਕੋ ਕਰਤਾ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਇ ॥
एको करता अवरु न कोइ ॥
सम्पूर्ण सृष्टि को बनाने वाला केवल एक परमेश्वर ही है, दूसरा कोई नहीं और

ਗੁਰ ਸਬਦੀ ਮੇਲਾਵਾ ਹੋਇ ॥
गुर सबदी मेलावा होइ ॥
गुरु के उपदेश से ही उससे मिलाप होता है।

ਜਿਨਿ ਸਚੁ ਸੇਵਿਆ ਤਿਨਿ ਰਸੁ ਪਾਇਆ ॥
जिनि सचु सेविआ तिनि रसु पाइआ ॥
जिसने भी ईश्वर का स्तुतिगान किया है, उसने ही आनंद पाया है।

ਨਾਨਕ ਸਹਜੇ ਨਾਮਿ ਸਮਾਇਆ ॥੪॥੭॥
नानक सहजे नामि समाइआ ॥४॥७॥
नानक का मत है कि सहज स्वभाव वह नाम में ही समाहित हुआ रहता है॥४॥ ७॥

ਬਸੰਤੁ ਮਹਲਾ ੩ ॥
बसंतु महला ३ ॥
बसंतु महला ३॥

ਭਗਤਿ ਕਰਹਿ ਜਨ ਦੇਖਿ ਹਜੂਰਿ ॥
भगति करहि जन देखि हजूरि ॥
भक्तगण ईश्वर को साक्षात् मानकर उसकी भक्ति करते हैं और

ਸੰਤ ਜਨਾ ਕੀ ਪਗ ਪੰਕਜ ਧੂਰਿ ॥
संत जना की पग पंकज धूरि ॥
संतजनों की चरण-धूल ही लगाते हैं।

ਹਰਿ ਸੇਤੀ ਸਦ ਰਹਹਿ ਲਿਵ ਲਾਇ ॥
हरि सेती सद रहहि लिव लाइ ॥
वे सदा ईश्वर की लगन में लीन रहते हैं,

ਪੂਰੈ ਸਤਿਗੁਰਿ ਦੀਆ ਬੁਝਾਇ ॥੧॥
पूरै सतिगुरि दीआ बुझाइ ॥१॥
पूर्ण सद्गुरु ने यह भेद बता दिया है॥१॥

ਦਾਸਾ ਕਾ ਦਾਸੁ ਵਿਰਲਾ ਕੋਈ ਹੋਇ ॥
दासा का दासु विरला कोई होइ ॥
कोई विरला ही दासों का दास होता है और

ਊਤਮ ਪਦਵੀ ਪਾਵੈ ਸੋਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
ऊतम पदवी पावै सोइ ॥१॥ रहाउ ॥
वही उत्तम पदवी प्राप्त करता है॥१॥रहाउ॥।

ਏਕੋ ਸੇਵਹੁ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਇ ॥
एको सेवहु अवरु न कोइ ॥
केवल एक ईश्वर की अर्चना करो, किसी अन्य (देवी-देवता) की न करो।

ਜਿਤੁ ਸੇਵਿਐ ਸਦਾ ਸੁਖੁ ਹੋਇ ॥
जितु सेविऐ सदा सुखु होइ ॥
जिसकी वन्दना करने से सदा सुख प्राप्त होता है।

ਨਾ ਓਹੁ ਮਰੈ ਨ ਆਵੈ ਜਾਇ ॥
ना ओहु मरै न आवै जाइ ॥
वह अनश्वर है, आवागमन से रहित है,

ਤਿਸੁ ਬਿਨੁ ਅਵਰੁ ਸੇਵੀ ਕਿਉ ਮਾਇ ॥੨॥
तिसु बिनु अवरु सेवी किउ माइ ॥२॥
हे माता ! उसके अतिरिक्त किसी अन्य की सेवा क्यों की जाए॥२॥

ਸੇ ਜਨ ਸਾਚੇ ਜਿਨੀ ਸਾਚੁ ਪਛਾਣਿਆ ॥
से जन साचे जिनी साचु पछाणिआ ॥
वही व्यक्ति सत्यशील हैं, जिन्होंने परम सत्य को पहचान लिया है।

ਆਪੁ ਮਾਰਿ ਸਹਜੇ ਨਾਮਿ ਸਮਾਣਿਆ ॥
आपु मारि सहजे नामि समाणिआ ॥
वे अहम्-भावना को मारकर स्वाभाविक ही प्रभु-नाम में तल्लीन रहते हैं।

ਗੁਰਮੁਖਿ ਨਾਮੁ ਪਰਾਪਤਿ ਹੋਇ ॥
गुरमुखि नामु परापति होइ ॥
गुरु से ही नाम प्राप्त होता है,

ਮਨੁ ਨਿਰਮਲੁ ਨਿਰਮਲ ਸਚੁ ਸੋਇ ॥੩॥
मनु निरमलु निरमल सचु सोइ ॥३॥
जिससे मन निर्मल हो जाता है और वह परम सत्य सबसे निर्मल है॥३॥

ਜਿਨਿ ਗਿਆਨੁ ਕੀਆ ਤਿਸੁ ਹਰਿ ਤੂ ਜਾਣੁ ॥
जिनि गिआनु कीआ तिसु हरि तू जाणु ॥
जिसने ज्ञान उत्पन्न किया है, उस परमेश्वर को तू जान।

ਸਾਚ ਸਬਦਿ ਪ੍ਰਭੁ ਏਕੁ ਸਿਞਾਣੁ ॥
साच सबदि प्रभु एकु सिञाणु ॥
सच्चे शब्द द्वारा एक प्रभु को पहचान।

ਹਰਿ ਰਸੁ ਚਾਖੈ ਤਾਂ ਸੁਧਿ ਹੋਇ ॥
हरि रसु चाखै तां सुधि होइ ॥
नानक का मत है कि हरि नाम रूपी रस चखने से मन शुद्ध हो जाता है और

ਨਾਨਕ ਨਾਮਿ ਰਤੇ ਸਚੁ ਸੋਇ ॥੪॥੮॥
नानक नामि रते सचु सोइ ॥४॥८॥
नाम में तल्लीन रहने वाला ही सत्यशील है॥४॥८॥

ਬਸੰਤੁ ਮਹਲਾ ੩ ॥
बसंतु महला ३ ॥
बसंतु महला ३॥

ਨਾਮਿ ਰਤੇ ਕੁਲਾਂ ਕਾ ਕਰਹਿ ਉਧਾਰੁ ॥
नामि रते कुलां का करहि उधारु ॥
ईश्वर के नाम में रत भक्तजन अपनी वंशावलि का उद्धार कर देते हैं,

ਸਾਚੀ ਬਾਣੀ ਨਾਮ ਪਿਆਰੁ ॥
साची बाणी नाम पिआरु ॥
उनकी वाणी भी मधुर एवं सत्य होती है और नाम से ही उनका प्रेम लगा रहता है।

ਮਨਮੁਖ ਭੂਲੇ ਕਾਹੇ ਆਏ ॥
मनमुख भूले काहे आए ॥
भूले हुए मनमुख क्योंकर संसार में आए हैं ?

ਨਾਮਹੁ ਭੂਲੇ ਜਨਮੁ ਗਵਾਏ ॥੧॥
नामहु भूले जनमु गवाए ॥१॥
ईश्वर के नाम को विस्मृत कर उन्होंने जन्म गंवा दिया है॥१॥

ਜੀਵਤ ਮਰੈ ਮਰਿ ਮਰਣੁ ਸਵਾਰੈ ॥
जीवत मरै मरि मरणु सवारै ॥
जो जीवन में मोह-माया की ओर से मर जाता है, वह विकारों की ओर से मर कर अपना मरना संवार लेता है,

ਗੁਰ ਕੈ ਸਬਦਿ ਸਾਚੁ ਉਰ ਧਾਰੈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
गुर कै सबदि साचु उर धारै ॥१॥ रहाउ ॥
गुरु के उपदेश से वह सत्य को ही हृदय में धारण करता है॥१॥ रहाउ॥

ਗੁਰਮੁਖਿ ਸਚੁ ਭੋਜਨੁ ਪਵਿਤੁ ਸਰੀਰਾ ॥
गुरमुखि सचु भोजनु पवितु सरीरा ॥
परम सत्य का चिंतन ही गुरमुख का भोजन होता है, जिससे उसका शरीर पवित्र रहता है।

ਮਨੁ ਨਿਰਮਲੁ ਸਦ ਗੁਣੀ ਗਹੀਰਾ ॥
मनु निरमलु सद गुणी गहीरा ॥
उसके निर्मल मन में गुणों का गहरा सागर प्रभु बसा रहता है।

ਜੰਮੈ ਮਰੈ ਨ ਆਵੈ ਜਾਇ ॥
जमै मरै न आवै जाइ ॥
यह जन्म-मरण से मुक्त हो जाता है, उसका आवागमन मिट जाता है और

ਗੁਰ ਪਰਸਾਦੀ ਸਾਚਿ ਸਮਾਇ ॥੨॥
गुर परसादी साचि समाइ ॥२॥
गुरु की कृपा से वह सत्य में समाहित हो जाता है।॥२॥

ਸਾਚਾ ਸੇਵਹੁ ਸਾਚੁ ਪਛਾਣੈ ॥
साचा सेवहु साचु पछाणै ॥
परम सत्य को पहचान कर उस शाश्वत प्रभु की आराधना करो।

ਗੁਰ ਕੈ ਸਬਦਿ ਹਰਿ ਦਰਿ ਨੀਸਾਣੈ ॥
गुर कै सबदि हरि दरि नीसाणै ॥
गुरु के उपदेश द्वारा प्रभु द्वार में जाने का रास्ता मिल जाता है।

error: Content is protected !!