ਕਾਲਿ ਦੈਤਿ ਸੰਘਾਰੇ ਜਮ ਪੁਰਿ ਗਏ ॥੨॥
कालि दैति संघारे जम पुरि गए ॥२॥
जब काल रूपी दैत्य संहार करता है तो वे यमपुरी पहुँच जाते हैं।॥२॥
ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਲਿਵ ਲਾਗੇ ॥
गुरमुखि हरि हरि हरि लिव लागे ॥
गुरुमुख की परमात्मा में ही लगन लगी रहती है और
ਜਨਮ ਮਰਣ ਦੋਊ ਦੁਖ ਭਾਗੇ ॥੩॥
जनम मरण दोऊ दुख भागे ॥३॥
उसके जन्म-मरण के दोनों ही दुख दूर हो जाते हैं।॥३॥
ਭਗਤ ਜਨਾ ਕਉ ਹਰਿ ਕਿਰਪਾ ਧਾਰੀ ॥
भगत जना कउ हरि किरपा धारी ॥
अपने भक्तजनों पर परमात्मा ने कृपा-दृष्टि की है,”
ਗੁਰੁ ਨਾਨਕੁ ਤੁਠਾ ਮਿਲਿਆ ਬਨਵਾਰੀ ॥੪॥੨॥
गुरु नानकु तुठा मिलिआ बनवारी ॥४॥२॥
गुरु नानक की प्रसन्नता से भगवान मिल गया है ॥४॥२॥
ਬਸੰਤੁ ਹਿੰਡੋਲ ਮਹਲਾ ੪ ਘਰੁ ੨
बसंतु हिंडोल महला ४ घरु २
बसंतु हिंडोल महला ४ घरु २
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि॥
ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਰਤਨ ਕੋਠੜੀ ਗੜ ਮੰਦਰਿ ਏਕ ਲੁਕਾਨੀ ॥
राम नामु रतन कोठड़ी गड़ मंदरि एक लुकानी ॥
राम नाम रूपी अमूल्य रत्न शरीर रूपी किले के मन्दिर में गुप्त रूप से विद्यमान है,
ਸਤਿਗੁਰੁ ਮਿਲੈ ਤ ਖੋਜੀਐ ਮਿਲਿ ਜੋਤੀ ਜੋਤਿ ਸਮਾਨੀ ॥੧॥
सतिगुरु मिलै त खोजीऐ मिलि जोती जोति समानी ॥१॥
अगर सच्चे गुरु से भेंट हो जाए तो ही इसकी खोज होती है, तदन्तर आत्म-ज्योति परम-ज्योति में विलीन हो जाती है।॥१॥
ਮਾਧੋ ਸਾਧੂ ਜਨ ਦੇਹੁ ਮਿਲਾਇ ॥
माधो साधू जन देहु मिलाइ ॥
हे प्रभु! साधुजनों से हमें मिला दो,
ਦੇਖਤ ਦਰਸੁ ਪਾਪ ਸਭਿ ਨਾਸਹਿ ਪਵਿਤ੍ਰ ਪਰਮ ਪਦੁ ਪਾਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
देखत दरसु पाप सभि नासहि पवित्र परम पदु पाइ ॥१॥ रहाउ ॥
क्योंकि उनके दर्शनों से सब पाप नाश हो जाते हैं और पवित्र परमपद प्राप्त हो जाता है।॥१॥रहाउ॥
ਪੰਚ ਚੋਰ ਮਿਲਿ ਲਾਗੇ ਨਗਰੀਆ ਰਾਮ ਨਾਮ ਧਨੁ ਹਿਰਿਆ ॥
पंच चोर मिलि लागे नगरीआ राम नाम धनु हिरिआ ॥
कामादिक पाँच चोर शरीर रूपी नगरी में मिलकर लगे रहते हैं और वे राम नाम रूपी धन को चुराते हैं।
ਗੁਰਮਤਿ ਖੋਜ ਪਰੇ ਤਬ ਪਕਰੇ ਧਨੁ ਸਾਬਤੁ ਰਾਸਿ ਉਬਰਿਆ ॥੨॥
गुरमति खोज परे तब पकरे धनु साबतु रासि उबरिआ ॥२॥
जब गुरु की शिक्षा द्वारा छानबीन की तो इन्हें पकड़ लिया और वे राम नाम रूपी धन की सारी राशि बचा ली॥२॥
ਪਾਖੰਡ ਭਰਮ ਉਪਾਵ ਕਰਿ ਥਾਕੇ ਰਿਦ ਅੰਤਰਿ ਮਾਇਆ ਮਾਇਆ ॥
पाखंड भरम उपाव करि थाके रिद अंतरि माइआ माइआ ॥
जीव धर्म-कर्म का आडम्बर एवं भर्मो का उपाय करके थक जाते हैं परन्तु उनके हृदय में माया का प्रभाव बना रहता है।
ਸਾਧੂ ਪੁਰਖੁ ਪੁਰਖਪਤਿ ਪਾਇਆ ਅਗਿਆਨ ਅੰਧੇਰੁ ਗਵਾਇਆ ॥੩॥
साधू पुरखु पुरखपति पाइआ अगिआन अंधेरु गवाइआ ॥३॥
जब महापुरुष साधु की संगत प्राप्त होती है तो अज्ञान का अंधेरा समाप्त हो जाता है।॥३॥
ਜਗੰਨਾਥ ਜਗਦੀਸ ਗੁਸਾਈ ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਸਾਧੁ ਮਿਲਾਵੈ ॥
जगंनाथ जगदीस गुसाई करि किरपा साधु मिलावै ॥
जब जगन्नाथ जगदीश्वर कृपा करके साधु पुरुष से मिला देता है तो
ਨਾਨਕ ਸਾਂਤਿ ਹੋਵੈ ਮਨ ਅੰਤਰਿ ਨਿਤ ਹਿਰਦੈ ਹਰਿ ਗੁਣ ਗਾਵੈ ॥੪॥੧॥੩॥
नानक सांति होवै मन अंतरि नित हिरदै हरि गुण गावै ॥४॥१॥३॥
नानक का मत है कि मन को शान्ति प्राप्त हो जाती है और वह नित्य ही हृदय में प्रभु के गुण गाता रहता है॥४॥१॥३॥
ਬਸੰਤੁ ਮਹਲਾ ੪ ਹਿੰਡੋਲ ॥
बसंतु महला ४ हिंडोल ॥
बसंतु महला ४ हिंडोल॥
ਤੁਮ੍ਹ੍ਹ ਵਡ ਪੁਰਖ ਵਡ ਅਗਮ ਗੁਸਾਈ ਹਮ ਕੀਰੇ ਕਿਰਮ ਤੁਮਨਛੇ ॥
तुम्ह वड पुरख वड अगम गुसाई हम कीरे किरम तुमनछे ॥
हे सृष्टि के स्वामी ! तू बहुत बड़ा है, सर्वशक्तिमान एवं अगम्य है और हम तेरे तुच्छ कीट मात्र हैं।
ਹਰਿ ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਕਰਹੁ ਪ੍ਰਭ ਕਿਰਪਾ ਗੁਰ ਸਤਿਗੁਰ ਚਰਣ ਹਮ ਬਨਛੇ ॥੧॥
हरि दीन दइआल करहु प्रभ किरपा गुर सतिगुर चरण हम बनछे ॥१॥
हे दीनदयाल ! कृपा करो, हम गुरु के चरण ही चाहते हैं।॥१॥
ਗੋਬਿੰਦ ਜੀਉ ਸਤਸੰਗਤਿ ਮੇਲਿ ਕਰਿ ਕ੍ਰਿਪਛੇ ॥
गोबिंद जीउ सतसंगति मेलि करि क्रिपछे ॥
हे गोविन्द ! कृपा-दृष्टि करके सत्संगत से मिला दो;
ਜਨਮ ਜਨਮ ਕੇ ਕਿਲਵਿਖ ਮਲੁ ਭਰਿਆ ਮਿਲਿ ਸੰਗਤਿ ਕਰਿ ਪ੍ਰਭ ਹਨਛੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
जनम जनम के किलविख मलु भरिआ मिलि संगति करि प्रभ हनछे ॥१॥ रहाउ ॥
मन में जन्म-जन्मांतर की पापों की मैल भरी हुई है, अतः अच्छी संगत में मिलाकर नेक बना दो॥१॥रहाउ॥।
ਤੁਮ੍ਹ੍ਹਰਾ ਜਨੁ ਜਾਤਿ ਅਵਿਜਾਤਾ ਹਰਿ ਜਪਿਓ ਪਤਿਤ ਪਵੀਛੇ ॥
तुम्हरा जनु जाति अविजाता हरि जपिओ पतित पवीछे ॥
हे प्रभु ! ऊँची जाति अथवा छोटी जाति से संबंधित जिस व्यक्ति ने भी तुम्हारा जाप किया है, वह विकारों से छूटकर पवित्र हो गया है।
ਹਰਿ ਕੀਓ ਸਗਲ ਭਵਨ ਤੇ ਊਪਰਿ ਹਰਿ ਸੋਭਾ ਹਰਿ ਪ੍ਰਭ ਦਿਨਛੇ ॥੨॥
हरि कीओ सगल भवन ते ऊपरि हरि सोभा हरि प्रभ दिनछे ॥२॥
प्रभु ने समूचे लोकों में उसे सर्वोपरि कर दिया है और वह सर्वत्र शोभा प्रदान करता है॥२॥
ਜਾਤਿ ਅਜਾਤਿ ਕੋਈ ਪ੍ਰਭ ਧਿਆਵੈ ਸਭਿ ਪੂਰੇ ਮਾਨਸ ਤਿਨਛੇ ॥
जाति अजाति कोई प्रभ धिआवै सभि पूरे मानस तिनछे ॥
उच्च अथवा निम्न जाति वाला कोई भी पुरुष प्रभु का ध्यान करे तो उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी हो जाती हैं।
ਸੇ ਧੰਨਿ ਵਡੇ ਵਡ ਪੂਰੇ ਹਰਿ ਜਨ ਜਿਨੑ ਹਰਿ ਧਾਰਿਓ ਹਰਿ ਉਰਛੇ ॥੩॥
से धंनि वडे वड पूरे हरि जन जिन्ह हरि धारिओ हरि उरछे ॥३॥
जिन्होंने परमात्मा को अपने हृदय में धारण कर लिया है, वही खुशनसीब, धन्य और महान् हैं॥३॥
ਹਮ ਢੀਂਢੇ ਢੀਮ ਬਹੁਤੁ ਅਤਿ ਭਾਰੀ ਹਰਿ ਧਾਰਿ ਕ੍ਰਿਪਾ ਪ੍ਰਭ ਮਿਲਛੇ ॥
हम ढींढे ढीम बहुतु अति भारी हरि धारि क्रिपा प्रभ मिलछे ॥
हे प्रभु! हम बहुत नीच, मूर्ख एवं कठोर दिल हैं, कृपा करके मिल जाओ।
ਜਨ ਨਾਨਕ ਗੁਰੁ ਪਾਇਆ ਹਰਿ ਤੂਠੇ ਹਮ ਕੀਏ ਪਤਿਤ ਪਵੀਛੇ ॥੪॥੨॥੪॥
जन नानक गुरु पाइआ हरि तूठे हम कीए पतित पवीछे ॥४॥२॥४॥
हे नानक ! जब गुरु को पाया तो प्रभु प्रसन्न हो गया और हम पतित जीवों को उसने पावन कर दिया॥४॥२॥४॥
ਬਸੰਤੁ ਹਿੰਡੋਲ ਮਹਲਾ ੪ ॥
बसंतु हिंडोल महला ४ ॥
बसंतु हिंडोल महला ४॥
ਮੇਰਾ ਇਕੁ ਖਿਨੁ ਮਨੂਆ ਰਹਿ ਨ ਸਕੈ ਨਿਤ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮ ਰਸਿ ਗੀਧੇ ॥
मेरा इकु खिनु मनूआ रहि न सकै नित हरि हरि नाम रसि गीधे ॥
मेरा मन एक पल भी रह नहीं सकता और यह तो नित्य हरिनाम के भजन रस में ही मस्त रहता है।
ਜਿਉ ਬਾਰਿਕੁ ਰਸਕਿ ਪਰਿਓ ਥਨਿ ਮਾਤਾ ਥਨਿ ਕਾਢੇ ਬਿਲਲ ਬਿਲੀਧੇ ॥੧॥
जिउ बारिकु रसकि परिओ थनि माता थनि काढे बिलल बिलीधे ॥१॥
ज्यों छोटा-सा बच्चा माता के स्तनों का दुग्धपान करने में लीन रहता है और स्तनों से निकालने पर रोने चिल्लाने लगता है॥१॥
ਗੋਬਿੰਦ ਜੀਉ ਮੇਰੇ ਮਨ ਤਨ ਨਾਮ ਹਰਿ ਬੀਧੇ ॥
गोबिंद जीउ मेरे मन तन नाम हरि बीधे ॥
हे गोविन्द ! मेरा मन तन भी इसी तरह नाम रस में बिंध गया है।
ਵਡੈ ਭਾਗਿ ਗੁਰੁ ਸਤਿਗੁਰੁ ਪਾਇਆ ਵਿਚਿ ਕਾਇਆ ਨਗਰ ਹਰਿ ਸੀਧੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
वडै भागि गुरु सतिगुरु पाइआ विचि काइआ नगर हरि सीधे ॥१॥ रहाउ ॥
अहोभाग्य से गुरु को पाया तो शरीर रूपी नगर में प्रभु की प्राप्ति हो गई॥१॥रहाउ॥