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ਮਃ ੫ ॥मः ५ ॥महला ५॥ ਦੁਖੀਆ ਦਰਦ ਘਣੇ ਵੇਦਨ ਜਾਣੇ ਤੂ ਧਣੀ ॥दुखीआ दरद घणे वेदन जाणे तू धणी ॥हे मालिक ! तू मेरी वेदना को जानता ही है केि मुझ जैसे दुखियारे को कितने ही दर्द लगे हुए हैं। ਜਾਣਾ ਲਖ ਭਵੇ ਪਿਰੀ ਡਿਖੰਦੋ ਤਾ ਜੀਵਸਾ ॥੨॥जाणा लख भवे पिरी डिखंदो ता जीवसा
