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ਗੁਰ ਸੇਵਾ ਸਦਾ ਸੁਖੁ ਹੈ ਜਿਸ ਨੋ ਹੁਕਮੁ ਮਨਾਏ ॥੭॥गुर सेवा सदा सुखु है जिस नो हुकमु मनाए ॥७॥गुरु की सेवा से सदा सुख प्राप्त होता है, पर सेवा भी वही करता है, जिससे हुक्म मनवाता है॥ ७॥ ਸੁਇਨਾ ਰੁਪਾ ਸਭ ਧਾਤੁ ਹੈ ਮਾਟੀ ਰਲਿ ਜਾਈ ॥सुइना रुपा सभ धातु है माटी रलि जाई ॥सोना-चांदी

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ਗੁਰ ਪੂਰੇ ਸਾਬਾਸਿ ਹੈ ਕਾਟੈ ਮਨ ਪੀਰਾ ॥੨॥गुर पूरे साबासि है काटै मन पीरा ॥२॥पूर्ण गुरु को मेरी शाबाश है, जिसने मन की पीड़ा दूर कर दी है॥ २॥ ਲਾਲਾ ਗੋਲਾ ਧਣੀ ਕੋ ਕਿਆ ਕਹਉ ਵਡਿਆਈਐ ॥लाला गोला धणी को किआ कहउ वडिआईऐ ॥जो मालिक का गुलाम एवं दास है, उसकी भला क्या प्रशंसा करूं

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ਧੰਧੈ ਧਾਵਤ ਜਗੁ ਬਾਧਿਆ ਨਾ ਬੂਝੈ ਵੀਚਾਰੁ ॥धंधै धावत जगु बाधिआ ना बूझै वीचारु ॥माया ने संसारी धंधों में व्यस्त जगत् को बन्धनों में बाँध लिया है परन्तु यह सत्य-विचार को नहीं बूझता। ਜੰਮਣ ਮਰਣੁ ਵਿਸਾਰਿਆ ਮਨਮੁਖ ਮੁਗਧੁ ਗਵਾਰੁ ॥जमण मरणु विसारिआ मनमुख मुगधु गवारु ॥मनमुखी जीव जन्म-मरण को भुलाकर मूर्ख एवं गंवार बना हुआ

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ਮਾਰੂ ਮਹਲਾ ੫ ॥मारू महला ५ ॥मारू महला ५॥ ਵੈਦੋ ਨ ਵਾਈ ਭੈਣੋ ਨ ਭਾਈ ਏਕੋ ਸਹਾਈ ਰਾਮੁ ਹੇ ॥੧॥वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥१॥जग में न कोई वैद्य, न दवाई, न कोई शुभचिंतक एवं न ही कोई बहिन एवं भाई है, केवल एक राम ही सदा सहायक है। १॥

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ਮੇਰੇ ਮਨ ਨਾਮੁ ਹਿਰਦੈ ਧਾਰਿ ॥मेरे मन नामु हिरदै धारि ॥हे मेरे मन ! हृदय में प्रभु नाम को धारण करो; ਕਰਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਮਨੁ ਤਨੁ ਲਾਇ ਹਰਿ ਸਿਉ ਅਵਰ ਸਗਲ ਵਿਸਾਰਿ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥करि प्रीति मनु तनु लाइ हरि सिउ अवर सगल विसारि ॥१॥ रहाउ ॥अन्य सबकुछ भुलाकर मन-तन से भगवान से प्रीति करो॥ १॥

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ਅਟਲ ਅਖਇਓ ਦੇਵਾ ਮੋਹਨ ਅਲਖ ਅਪਾਰਾ ॥ अटल अखइओ देवा मोहन अलख अपारा ॥ हे मोहन, हे देव ! तू अलक्ष्य, अपरंपार, अटल एवं अनश्वर है। O’ eternal, imperishable God, You are fascinating, incomprehensible, and infinite. ਦਾਨੁ ਪਾਵਉ ਸੰਤਾ ਸੰਗੁ ਨਾਨਕ ਰੇਨੁ ਦਾਸਾਰਾ ॥੪॥੬॥੨੨॥ दानु पावउ संता संगु नानक रेनु दासारा ॥४॥६॥२२॥ नानक वंदना करते

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ਅਟਲ ਅਖਇਓ ਦੇਵਾ ਮੋਹਨ ਅਲਖ ਅਪਾਰਾ ॥अटल अखइओ देवा मोहन अलख अपारा ॥हे मोहन, हे देव ! तू अलक्ष्य, अपरंपार, अटल एवं अनश्वर है। ਦਾਨੁ ਪਾਵਉ ਸੰਤਾ ਸੰਗੁ ਨਾਨਕ ਰੇਨੁ ਦਾਸਾਰਾ ॥੪॥੬॥੨੨॥दानु पावउ संता संगु नानक रेनु दासारा ॥४॥६॥२२॥नानक वंदना करते हैं कि मुझे संतों की संगत एवं भक्तजनों की चरण-धूल का दान उपलब्ध हो॥

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ਹਮ ਤੁਮ ਸੰਗਿ ਝੂਠੇ ਸਭਿ ਬੋਲਾ ॥हम तुम संगि झूठे सभि बोला ॥हमारे संग हुए तुम्हारे सब वचन झूठे हैं। ਪਾਇ ਠਗਉਰੀ ਆਪਿ ਭੁਲਾਇਓ ॥पाइ ठगउरी आपि भुलाइओ ॥ईश्वर ने माया का भ्रम डालकर स्वयं ही जीव को कुमार्गगामी किया हुआ है। ਨਾਨਕ ਕਿਰਤੁ ਨ ਜਾਇ ਮਿਟਾਇਓ ॥੨॥नानक किरतु न जाइ मिटाइओ ॥२॥हे नानक !

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ਬਾਝੁ ਗੁਰੂ ਗੁਬਾਰਾ ॥बाझु गुरू गुबारा ॥गुरु के बिना अज्ञान रूपी घोर अंधेरा बना रहता है ਮਿਲਿ ਸਤਿਗੁਰ ਨਿਸਤਾਰਾ ॥੨॥मिलि सतिगुर निसतारा ॥२॥परन्तु सच्चा गुरु मिल जाए तो मोक्ष प्राप्त हो जाता है।२॥ ਹਉ ਹਉ ਕਰਮ ਕਮਾਣੇ ॥हउ हउ करम कमाणे ॥जीव अभिमान में जितने भी कर्म करते हैं, ਤੇ ਤੇ ਬੰਧ ਗਲਾਣੇ ॥ते ते

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ਬੇਦੁ ਪੁਕਾਰੈ ਮੁਖ ਤੇ ਪੰਡਤ ਕਾਮਾਮਨ ਕਾ ਮਾਠਾ ॥बेदु पुकारै मुख ते पंडत कामामन का माठा ॥पण्डित अपने मुख से वेद पढ़ता है किन्तु नाम-अभ्यास करने में आलसी है। ਮੋਨੀ ਹੋਇ ਬੈਠਾ ਇਕਾਂਤੀ ਹਿਰਦੈ ਕਲਪਨ ਗਾਠਾ ॥मोनी होइ बैठा इकांती हिरदै कलपन गाठा ॥मौनी एकांत में ध्यान लगाए बैठ जाता है परन्तु उसके हृदय में

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