Hindi Page 1024
ਗੁਰਮੁਖਿ ਵਿਰਲਾ ਚੀਨੈ ਕੋਈ ॥गुरमुखि विरला चीनै कोई ॥कोई विरला गुरुमुख ही रहस्य को पहचानता था। ਦੁਇ ਪਗ ਧਰਮੁ ਧਰੇ ਧਰਣੀਧਰ ਗੁਰਮੁਖਿ ਸਾਚੁ ਤਿਥਾਈ ਹੇ ॥੮॥दुइ पग धरमु धरे धरणीधर गुरमुखि साचु तिथाई हे ॥८॥पृथ्वी को धारण कृरने वाला अब धर्म रूपी बैल दो पैरों पर खड़ा था और गुरु से ही सत्य की प्राप्ति
