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ਤੰਤ ਮੰਤ੍ਰ ਸਭ ਅਉਖਧ ਜਾਨਹਿ ਅੰਤਿ ਤਊ ਮਰਨਾ ॥੨॥तंत मंत्र सभ अउखध जानहि अंति तऊ मरना ॥२॥जो तंत्र, मंत्र एवं समस्त औषधियों को जानता है, आखिरकार सबकी मृत्यु आनी है॥ २॥ ਰਾਜ ਭੋਗ ਅਰੁ ਛਤ੍ਰ ਸਿੰਘਾਸਨ ਬਹੁ ਸੁੰਦਰਿ ਰਮਨਾ ॥राज भोग अरु छत्र सिंघासन बहु सुंदरि रमना ॥राज को भोगने वाले, सिंहासन पर छत्र धारण

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ਆਸਾ ॥आसा ॥आसा ॥ ਗਜ ਸਾਢੇ ਤੈ ਤੈ ਧੋਤੀਆ ਤਿਹਰੇ ਪਾਇਨਿ ਤਗ ॥गज साढे तै तै धोतीआ तिहरे पाइनि तग ॥जो व्यक्ति साढ़े तीन-तीन गज लम्बी धोती और त्रिसूती जनेऊ पहनते हैं। ਗਲੀ ਜਿਨੑਾ ਜਪਮਾਲੀਆ ਲੋਟੇ ਹਥਿ ਨਿਬਗ ॥गली जिन्हा जपमालीआ लोटे हथि निबग ॥जिनके गले में जपमाला तथा हाथों में चमचमाते लोटे होते हैं।

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ਪਉੜੀ ॥पउड़ी ॥पउड़ी। ਆਪੇ ਹੀ ਕਰਣਾ ਕੀਓ ਕਲ ਆਪੇ ਹੀ ਤੈ ਧਾਰੀਐ ॥आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥हे परमात्मा ! तू स्वयं ही सृष्टि रचयिता है और स्वयं ही सत्ता को धारण किया हुआ है। ਦੇਖਹਿ ਕੀਤਾ ਆਪਣਾ ਧਰਿ ਕਚੀ ਪਕੀ ਸਾਰੀਐ ॥देखहि कीता आपणा धरि कची पकी सारीऐ ॥तू अपनी

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ਪਉੜੀ ॥पउड़ी ॥पउड़ी। ਸਤਿਗੁਰੁ ਵਡਾ ਕਰਿ ਸਾਲਾਹੀਐ ਜਿਸੁ ਵਿਚਿ ਵਡੀਆ ਵਡਿਆਈਆ ॥सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥जिस सतगुरु में महान् गुण मौजूद हैं, उसे बड़ा मानकर उसी की स्तुति करनी चाहिए। ਸਹਿ ਮੇਲੇ ਤਾ ਨਦਰੀ ਆਈਆ ॥सहि मेले ता नदरी आईआ ॥भगवान की कृपा से सतगुरु मिल जाए तो वह सतगुरु की

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ਨੀਲ ਵਸਤ੍ਰ ਪਹਿਰਿ ਹੋਵਹਿ ਪਰਵਾਣੁ ॥नील वसत्र पहिरि होवहि परवाणु ॥ब्राह्मण नीले वस्त्र पहन कर मुसलमानों की नजर में स्वीकृत होना चाहते हैं। ਮਲੇਛ ਧਾਨੁ ਲੇ ਪੂਜਹਿ ਪੁਰਾਣੁ ॥मलेछ धानु ले पूजहि पुराणु ॥मुसलमानों से धन-धान्य लेते हैं, जिन्हें मलेच्छ कहते हैं और पुराणों की फिर भी पूजा करते हैं। ਅਭਾਖਿਆ ਕਾ ਕੁਠਾ ਬਕਰਾ ਖਾਣਾ

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ਨੰਗਾ ਦੋਜਕਿ ਚਾਲਿਆ ਤਾ ਦਿਸੈ ਖਰਾ ਡਰਾਵਣਾ ॥नंगा दोजकि चालिआ ता दिसै खरा डरावणा ॥जब वह नग्न ही नरक को जाता है तो वह सचमुच ही बड़ा भयानक लगता है। ਕਰਿ ਅਉਗਣ ਪਛੋਤਾਵਣਾ ॥੧੪॥करि अउगण पछोतावणा ॥१४॥वह अपने किए हुए अवगुणों पर पश्चाताप करता है॥ १४ ॥ ਸਲੋਕੁ ਮਃ ੧ ॥सलोकु मः १ ॥श्लोक महला

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ਸਲੋਕੁ ਮਃ ੧ ॥सलोकु मः १ ॥श्लोक महला १॥ ਨਾਨਕ ਮੇਰੁ ਸਰੀਰ ਕਾ ਇਕੁ ਰਥੁ ਇਕੁ ਰਥਵਾਹੁ ॥नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥हे नानक ! चौरासी लाख योनियों में सुमेरु पर्वत समान मानव-शरीर सर्वोच्च है। इस शरीर का एक रथ एवं एक रथवान है। ਜੁਗੁ ਜੁਗੁ ਫੇਰਿ ਵਟਾਈਅਹਿ ਗਿਆਨੀ ਬੁਝਹਿ ਤਾਹਿ ॥जुगु

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ਅੰਧੀ ਰਯਤਿ ਗਿਆਨ ਵਿਹੂਣੀ ਭਾਹਿ ਭਰੇ ਮੁਰਦਾਰੁ ॥अंधी रयति गिआन विहूणी भाहि भरे मुरदारु ॥अन्धी प्रजा ज्ञान से विहीन है और मृतक की भाँति चुपचाप अन्याय सहती है। ਗਿਆਨੀ ਨਚਹਿ ਵਾਜੇ ਵਾਵਹਿ ਰੂਪ ਕਰਹਿ ਸੀਗਾਰੁ ॥गिआनी नचहि वाजे वावहि रूप करहि सीगारु ॥ज्ञानी नृत्य करते हैं, बाजे बजाते और अनेक प्रकार के रूप धारण करके

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ਸਤਿਗੁਰੁ ਭੇਟੇ ਸੋ ਸੁਖੁ ਪਾਏ ॥सतिगुरु भेटे सो सुखु पाए ॥जो सतगुरु से मिलता है, उसे सुख प्राप्त होता है ਹਰਿ ਕਾ ਨਾਮੁ ਮੰਨਿ ਵਸਾਏ ॥हरि का नामु मंनि वसाए ॥और हरि का नाम वह अपने मन में बसा लेता है। ਨਾਨਕ ਨਦਰਿ ਕਰੇ ਸੋ ਪਾਏ ॥नानक नदरि करे सो पाए ॥हे नानक ! प्रभु

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ਓਨੑੀ ਮੰਦੈ ਪੈਰੁ ਨ ਰਖਿਓ ਕਰਿ ਸੁਕ੍ਰਿਤੁ ਧਰਮੁ ਕਮਾਇਆ ॥ओन्ही मंदै पैरु न रखिओ करि सुक्रितु धरमु कमाइआ ॥वे कुमार्ग पर अपना पैर नहीं रखते और शुभ कर्म एवं धर्म कमाते हैं। ਓਨੑੀ ਦੁਨੀਆ ਤੋੜੇ ਬੰਧਨਾ ਅੰਨੁ ਪਾਣੀ ਥੋੜਾ ਖਾਇਆ ॥ओन्ही दुनीआ तोड़े बंधना अंनु पाणी थोड़ा खाइआ ॥वे दुनिया के बन्धनों को तोड़ देते

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