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ਤਾ ਮਹਿ ਮਗਨ ਹੋਤ ਨ ਤੇਰੋ ਜਨੁ ॥੨॥ता महि मगन होत न तेरो जनु ॥२॥तेरा सेवक इनके भीतर मग्न नहीं होता॥ २॥ ਪ੍ਰੇਮ ਕੀ ਜੇਵਰੀ ਬਾਧਿਓ ਤੇਰੋ ਜਨ ॥प्रेम की जेवरी बाधिओ तेरो जन ॥रविदास कहते हैं कि हे प्रभु ! तेरा सेवक तेरी प्रेम की रस्सी से बंधा हुआ है, ਕਹਿ ਰਵਿਦਾਸ ਛੂਟਿਬੋ ਕਵਨ

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ਰਾਮ ਰਸਾਇਨ ਪੀਓ ਰੇ ਦਗਰਾ ॥੩॥੪॥राम रसाइन पीओ रे दगरा ॥३॥४॥हे दगावाज ! राम-नाम रूपी अमृत का पान कर॥ ३॥ ४॥ ਆਸਾ ॥आसा ॥आसा ॥ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ਜਿ ਚੀਨੑਸੀ ਆਸਾ ਤੇ ਨ ਭਾਵਸੀ ॥पारब्रहमु जि चीन्हसी आसा ते न भावसी ॥जो आदमी पारब्रह्म को पहचान लेता है, उसे अन्य आशाएँ अच्छी नहीं लगती। ਰਾਮਾ ਭਗਤਹ ਚੇਤੀਅਲੇ

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ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है। ਆਸਾ ਬਾਣੀ ਸ੍ਰੀ ਨਾਮਦੇਉ ਜੀ ਕੀआसा बाणी स्री नामदेउ जी कीआसा बाणी श्री नामदेउ जी की ਏਕ ਅਨੇਕ ਬਿਆਪਕ ਪੂਰਕ ਜਤ ਦੇਖਉ ਤਤ ਸੋਈ ॥एक अनेक बिआपक पूरक जत देखउ तत सोई ॥एक ईश्वर ही अनेक रूपों

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ਆਸਾ ॥आसा ॥आसा ॥ ਮੇਰੀ ਬਹੁਰੀਆ ਕੋ ਧਨੀਆ ਨਾਉ ॥मेरी बहुरीआ को धनीआ नाउ ॥(कबीर की माता कहती है कि) मेरी बहू का नाम धनीआ (धनवन्ती) था ਲੇ ਰਾਖਿਓ ਰਾਮ ਜਨੀਆ ਨਾਉ ॥੧॥ले राखिओ राम जनीआ नाउ ॥१॥परन्तु (साधु-संतों के प्रभाव से) अब उसका नाम राम-जनिया (राम की सेविका) रख दिया गया है॥ १॥ ਇਨੑ

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ਜਉ ਮੈ ਰੂਪ ਕੀਏ ਬਹੁਤੇਰੇ ਅਬ ਫੁਨਿ ਰੂਪੁ ਨ ਹੋਈ ॥जउ मै रूप कीए बहुतेरे अब फुनि रूपु न होई ॥चाहे मैंने अनेक रूप (जन्म) धारण किए हैं। परन्तु अब मैं दोबारा अन्य रूप (जन्म) धारण नहीं करूंगा। ਤਾਗਾ ਤੰਤੁ ਸਾਜੁ ਸਭੁ ਥਾਕਾ ਰਾਮ ਨਾਮ ਬਸਿ ਹੋਈ ॥੧॥तागा तंतु साजु सभु थाका राम नाम बसि

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ਜੀਵਨੈ ਕੀ ਆਸ ਕਰਹਿ ਜਮੁ ਨਿਹਾਰੈ ਸਾਸਾ ॥जीवनै की आस करहि जमु निहारै सासा ॥तू अधिक जीवन जीने की आशा करता है परन्तु यम तेरी सांसें देख रहा है। ਬਾਜੀਗਰੀ ਸੰਸਾਰੁ ਕਬੀਰਾ ਚੇਤਿ ਢਾਲਿ ਪਾਸਾ ॥੩॥੧॥੨੩॥बाजीगरी संसारु कबीरा चेति ढालि पासा ॥३॥१॥२३॥हे कबीर ! यह दुनिया तो बाजीगर का खेल है इसलिए सोच-समझकर जीवन बाजी

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ਇਹ ਸ੍ਰਪਨੀ ਤਾ ਕੀ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ॥इह स्रपनी ता की कीती होई ॥यह माया रूपी सर्पिणी तो उस प्रभु की पैदा की हुई है, ਬਲੁ ਅਬਲੁ ਕਿਆ ਇਸ ਤੇ ਹੋਈ ॥੪॥बलु अबलु किआ इस ते होई ॥४॥अपने आप उसमें कौन-सा बल अथवा अबल है॥ ४॥ ਇਹ ਬਸਤੀ ਤਾ ਬਸਤ ਸਰੀਰਾ ॥इह बसती ता बसत सरीरा

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ਜਮ ਕਾ ਡੰਡੁ ਮੂੰਡ ਮਹਿ ਲਾਗੈ ਖਿਨ ਮਹਿ ਕਰੈ ਨਿਬੇਰਾ ॥੩॥जम का डंडु मूंड महि लागै खिन महि करै निबेरा ॥३॥जब यम का दण्ड उसके सिर पर पड़ता है तो एक क्षण में ही निर्णय हो जाता है अर्थात् जब मनुष्य का देहांत हो जाता है तो धन वही रह जाता है॥ ३॥ ਹਰਿ ਜਨੁ

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ਨਾਰਦ ਸਾਰਦ ਕਰਹਿ ਖਵਾਸੀ ॥नारद सारद करहि खवासी ॥नारद मुनि हो अथवा सरस्वती देवी, सभी उस हरि की सेवा-भक्ति में लीन हैं। ਪਾਸਿ ਬੈਠੀ ਬੀਬੀ ਕਵਲਾ ਦਾਸੀ ॥੨॥पासि बैठी बीबी कवला दासी ॥२॥हरि के पास उसकी दासी देवी लक्ष्मी भी विराजमान है। २ ॥ ਕੰਠੇ ਮਾਲਾ ਜਿਹਵਾ ਰਾਮੁ ॥कंठे माला जिहवा रामु ॥जिव्हा में राम

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ਤੇਲ ਜਲੇ ਬਾਤੀ ਠਹਰਾਨੀ ਸੂੰਨਾ ਮੰਦਰੁ ਹੋਈ ॥੧॥तेल जले बाती ठहरानी सूंना मंदरु होई ॥१॥जब प्राण रूपी तेल जल जाता है अर्थात शरीर में से प्राण निकल जाते हैं तो सुरति रूपी बाती बुझ जाती है। चारों ओर अंधेरा होने से शरीर रूपी मंदिर सुनसान हो जाता है॥ १॥ ਰੇ ਬਉਰੇ ਤੁਹਿ ਘਰੀ ਨ ਰਾਖੈ

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