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ਨਿੰਦਕ ਕੀ ਗਤਿ ਕਤਹੂੰ ਨਾਹੀ ਖਸਮੈ ਏਵੈ ਭਾਣਾ ॥निंदक की गति कतहूं नाही खसमै एवै भाणा ॥निन्दक की कहीं भी गति नहीं होती, प्रभु की यही इच्छा है। ਜੋ ਜੋ ਨਿੰਦ ਕਰੇ ਸੰਤਨ ਕੀ ਤਿਉ ਸੰਤਨ ਸੁਖੁ ਮਾਨਾ ॥੩॥जो जो निंद करे संतन की तिउ संतन सुखु माना ॥३॥ज्यों ज्यों संतों की निन्दा होती है,

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ਹਉ ਮਾਰਉ ਹਉ ਬੰਧਉ ਛੋਡਉ ਮੁਖ ਤੇ ਏਵ ਬਬਾੜੇ ॥हउ मारउ हउ बंधउ छोडउ मुख ते एव बबाड़े ॥अपने मुँह से वह इस प्रकार व्यर्थ बकवास करता है कि मैं हर किसी को जान से मार, बांध एवं मुक्त कर सकता हूँ ਆਇਆ ਹੁਕਮੁ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਕਾ ਛੋਡਿ ਚਲਿਆ ਏਕ ਦਿਹਾੜੇ ॥੨॥आइआ हुकमु पारब्रहम का छोडि

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ਪੀੜ ਗਈ ਫਿਰਿ ਨਹੀ ਦੁਹੇਲੀ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥पीड़ गई फिरि नही दुहेली ॥१॥ रहाउ ॥उसका दुख-दर्द दूर हो जाता है और फिर कभी दु:खी नहीं होती ॥ १॥ रहाउ॥ ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਚਰਨ ਸੰਗਿ ਮੇਲੀ ॥करि किरपा चरन संगि मेली ॥अपनी कृपा करके प्रभु उसे अपने चरणों से मिला लेता है और ਸੂਖ ਸਹਜ ਆਨੰਦ ਸੁਹੇਲੀ

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ਦੁਪਦੇ ॥आसा महला ५ दुपदे ॥आसा महला ५ दुपदे ॥ ਭਈ ਪਰਾਪਤਿ ਮਾਨੁਖ ਦੇਹੁਰੀਆ ॥भई परापति मानुख देहुरीआ ॥हे मानव ! तुझे जो यह मानव जन्म प्राप्त हुआ है। ਗੋਬਿੰਦ ਮਿਲਣ ਕੀ ਇਹ ਤੇਰੀ ਬਰੀਆ ॥गोबिंद मिलण की इह तेरी बरीआ ॥यही तुम्हारा प्रभु को मिलने का शुभावसर है; अर्थात् प्रभु का

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ਪੂਰਾ ਗੁਰੁ ਪੂਰੀ ਬਣਤ ਬਣਾਈ ॥पूरा गुरु पूरी बणत बणाई ॥पूर्ण गुरु-परमेश्वर ने जो कुछ भी रचा है वह पूर्ण है। ਨਾਨਕ ਭਗਤ ਮਿਲੀ ਵਡਿਆਈ ॥੪॥੨੪॥नानक भगत मिली वडिआई ॥४॥२४॥हे नानक ! प्रभु-भक्तों को ही प्रशंसा मिली है॥ ४॥ २४ ॥ ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥आसा महला ५ ॥आसा महला ५ ॥ ਗੁਰ ਕੈ ਸਬਦਿ ਬਨਾਵਹੁ

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ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਗੁਣ ਗਾਈਅਹਿ ਨੀਤ ॥कहु नानक गुण गाईअहि नीत ॥हे नानक ! नित्य ही भगवान के गुण गाने चाहिए,” ਮੁਖ ਊਜਲ ਹੋਇ ਨਿਰਮਲ ਚੀਤ ॥੪॥੧੯॥मुख ऊजल होइ निरमल चीत ॥४॥१९॥क्योंकि गुणगान करने से सत्य के दरबार में मुख उज्ज्वल तथा चित्त निर्मल हो जाता है।॥ ४॥ १६॥ ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥आसा महला ५ ॥आसा

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ਦਰਸਨ ਕੀ ਮਨਿ ਆਸ ਘਨੇਰੀ ਕੋਈ ਐਸਾ ਸੰਤੁ ਮੋ ਕਉ ਪਿਰਹਿ ਮਿਲਾਵੈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥दरसन की मनि आस घनेरी कोई ऐसा संतु मो कउ पिरहि मिलावै ॥१॥ रहाउ ॥मेरे मन में उसके दर्शन की तीव्र अभिलाषा है। आशा है कि कोई ऐसा संत (सच्चा गुरु) मिल जाए, जो मेरा प्रियतम से मिलन करवा दे ॥

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ਪੰਚਪਦੇ ॥आसा महला ५ पंचपदे ॥आसा महला ५ पंचपदे ॥ ਪ੍ਰਥਮੇ ਤੇਰੀ ਨੀਕੀ ਜਾਤਿ ॥प्रथमे तेरी नीकी जाति ॥हे जीव रूपी नारी ! सर्वप्रथम, तेरी जाति कुलीन है। ਦੁਤੀਆ ਤੇਰੀ ਮਨੀਐ ਪਾਂਤਿ ॥दुतीआ तेरी मनीऐ पांति ॥द्वितीय, तेरा वंश भी महान् माना जाता है। ਤ੍ਰਿਤੀਆ ਤੇਰਾ ਸੁੰਦਰ ਥਾਨੁ ॥त्रितीआ तेरा सुंदर थानु

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥आसा महला ५ ॥आसा महला ५ ॥ ਦੂਖ ਰੋਗ ਭਏ ਗਤੁ ਤਨ ਤੇ ਮਨੁ ਨਿਰਮਲੁ ਹਰਿ ਹਰਿ ਗੁਣ ਗਾਇ ॥दूख रोग भए गतु तन ते मनु निरमलु हरि हरि गुण गाइ ॥हरि-परमेश्वर का गुणानुवाद करने से मेरा मन निर्मल हो गया है और मेरे तन से दुःख-रोग मिट गए हैं। ਭਏ ਅਨੰਦ

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥आसा महला ५ ॥आसा महला ५ ॥ ਪਰਦੇਸੁ ਝਾਗਿ ਸਉਦੇ ਕਉ ਆਇਆ ॥परदेसु झागि सउदे कउ आइआ ॥मैं परदेस में भटकने के पश्चात् बड़ी मुश्किल से तेरे द्वार पर नाम रूपी सौदा लेने हेतु आया हूँ। ਵਸਤੁ ਅਨੂਪ ਸੁਣੀ ਲਾਭਾਇਆ ॥वसतु अनूप सुणी लाभाइआ ॥मैंने सुना है कि तेरे पास नाम एक

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