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ਸਤਿਗੁਰੁ ਸੇਵਿ ਪਾਏ ਨਿਜ ਥਾਉ ॥੧॥सतिगुरु सेवि पाए निज थाउ ॥१॥सतिगुरु की सेवा करने से मनुष्य आत्मस्वरूप प्राप्त कर लेता है॥ १॥ ਮਨ ਚੂਰੇ ਖਟੁ ਦਰਸਨ ਜਾਣੁ ॥मन चूरे खटु दरसन जाणु ॥अपने मन को जीतना ही षड्दर्शन का ज्ञान है। ਸਰਬ ਜੋਤਿ ਪੂਰਨ ਭਗਵਾਨੁ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥सरब जोति पूरन भगवानु ॥१॥ रहाउ ॥भगवान की

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੧ ॥आसा महला १ ॥आसा महला १ ॥ ਕਰਮ ਕਰਤੂਤਿ ਬੇਲਿ ਬਿਸਥਾਰੀ ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਫਲੁ ਹੂਆ ॥करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूआ ॥शुभ कर्मों एवं नेक आचरण की लता फैली हुई है और उस लता को राम के नाम का फल लगा हुआ है। ਤਿਸੁ ਰੂਪੁ ਨ ਰੇਖ ਅਨਾਹਦੁ ਵਾਜੈ ਸਬਦੁ

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ਜੇ ਸਉ ਵਰ੍ਹਿਆ ਜੀਵਣ ਖਾਣੁ ॥जे सउ वर्हिआ जीवण खाणु ॥यदि मनुष्य सैंकड़ों वर्ष जीवन रहने तक भी खाता रहे तो ਖਸਮ ਪਛਾਣੈ ਸੋ ਦਿਨੁ ਪਰਵਾਣੁ ॥੨॥खसम पछाणै सो दिनु परवाणु ॥२॥केवल वही दिन प्रभु के दरबार में स्वीकृत होगा, जब वह प्रभु को पहचानता है॥ २॥ ਦਰਸਨਿ ਦੇਖਿਐ ਦਇਆ ਨ ਹੋਇ ॥दरसनि देखिऐ दइआ

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ਕੀਮਤਿ ਪਾਇ ਨ ਕਹਿਆ ਜਾਇ ॥ कीमति पाइ न कहिआ जाइ ॥ वास्तव में उस सर्गुण स्वरूप परमात्मा की न तो कोई कीमत आंक सकता है और न ही उसका कोई अंत कह सकता है, क्योंकि वह अनन्त व असीम है। O’ God, Your creation cannot be estimated or fully described. ਕਹਣੈ ਵਾਲੇ ਤੇਰੇ ਰਹੇ

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ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੪ ॥आसा महला ४ ॥आसा महला ४ ॥ ਸੋ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰੰਜਨੁ ਹਰਿ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰੰਜਨੁ ਹਰਿ ਅਗਮਾ ਅਗਮ ਅਪਾਰਾ ॥सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥वह अकालपुरुष सृष्टि के समस्त जीवों में व्यापक है, फिर भी मायातीत है, अगम्य है तथा अनन्त है। ਸਭਿ ਧਿਆਵਹਿ ਸਭਿ ਧਿਆਵਹਿ ਤੁਧੁ ਜੀ ਹਰਿ

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ੴ ਸਤਿਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥१ ऑ- निरंकार वही एक है। सति नामु – उसका नाम सत्य है। करता – वह सृष्टि व उसके जीवों की रचने वाला है। पुरखु – वह यह सब कुछ करने में परिपूर्ण

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ਹਉ ਬਨਜਾਰੋ ਰਾਮ ਕੋ ਸਹਜ ਕਰਉ ਬੵਾਪਾਰੁ ॥हउ बनजारो राम को सहज करउ ब्यापारु ॥मैं राम का व्यापारी हूँ और सहज ही ज्ञान का व्यापार करता हूँ। ਮੈ ਰਾਮ ਨਾਮ ਧਨੁ ਲਾਦਿਆ ਬਿਖੁ ਲਾਦੀ ਸੰਸਾਰਿ ॥੨॥मै राम नाम धनु लादिआ बिखु लादी संसारि ॥२॥मैंने राम के नाम का पदार्थ लादा है परन्तु संसार ने माया-रूपी

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ਜਬ ਲਗੁ ਘਟ ਮਹਿ ਦੂਜੀ ਆਨ ॥जब लगु घट महि दूजी आन ॥लेकिन जब तक मनुष्य के हृदय में सांसारिक मोह की वासना है, ਤਉ ਲਉ ਮਹਲਿ ਨ ਲਾਭੈ ਜਾਨ ॥तउ लउ महलि न लाभै जान ॥तब तक वह प्रभु-चरणों की शरण में लग नहीं सकता। ਰਮਤ ਰਾਮ ਸਿਉ ਲਾਗੋ ਰੰਗੁ ॥रमत राम सिउ लागो

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ਜੁਗੁ ਜੁਗੁ ਜੀਵਹੁ ਅਮਰ ਫਲ ਖਾਹੁ ॥੧੦॥जुगु जुगु जीवहु अमर फल खाहु ॥१०॥इस परिश्रम का ऐसा फल मिलेगा जो कभी खत्म नहीं होगा, ऐसा सुन्दर जीवन जियोगे जो सदा स्थिर रहेगा ॥ १०॥ ਦਸਮੀ ਦਹ ਦਿਸ ਹੋਇ ਅਨੰਦ ॥दसमी दह दिस होइ अनंद ॥दसमी-दसों दिशाओं में आनन्द ही आनन्द विद्यमान है। ਛੂਟੈ ਭਰਮੁ ਮਿਲੈ ਗੋਬਿੰਦ

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ਬਾਵਨ ਅਖਰ ਜੋਰੇ ਆਨਿ ॥वन अखर जोरे आनि ॥मनुष्य ने बावन अक्षर जोड़ लिए हैं। ਸਕਿਆ ਨ ਅਖਰੁ ਏਕੁ ਪਛਾਨਿ ॥सकिआ न अखरु एकु पछानि ॥परन्तु वह ईश्वर के एक शब्द को नहीं पहचान सकता। ਸਤ ਕਾ ਸਬਦੁ ਕਬੀਰਾ ਕਹੈ ॥सत का सबदु कबीरा कहै ॥कबीर सत्य वचन कहता है कि ਪੰਡਿਤ ਹੋਇ ਸੁ ਅਨਭੈ

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