Hindi Page 331

ਕਉਨੁ ਕੋ ਪੂਤੁ ਪਿਤਾ ਕੋ ਕਾ ਕੋ ॥कउनु को पूतु पिता को का को ॥कौन कोई किसी का पुत्र है? कौन कोई किसी का पिता है? अर्थात् कोई किसी का रक्षक नहीं। ਕਉਨੁ ਮਰੈ ਕੋ ਦੇਇ ਸੰਤਾਪੋ ॥੧॥कउनु मरै को देइ संतापो ॥१॥कौन कोई मरता है और कौन कोई किसी को दुःख देता है ?

Hindi Page 330

ਜਬ ਨ ਹੋਇ ਰਾਮ ਨਾਮ ਅਧਾਰਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥जब न होइ राम नाम अधारा ॥१॥ रहाउ ॥जब राम के नाम का आधार नहीं होगा ॥ १॥ रहाउ ॥ ਕਹੁ ਕਬੀਰ ਖੋਜਉ ਅਸਮਾਨ ॥कहु कबीर खोजउ असमान ॥हे कबीर ! मैं आकाश तक खोज कर चुका हूँ ਰਾਮ ਸਮਾਨ ਨ ਦੇਖਉ ਆਨ ॥੨॥੩੪॥राम समान न देखउ

Hindi Page 329

ਮਨਹਿ ਮਾਰਿ ਕਵਨ ਸਿਧਿ ਥਾਪੀ ॥੧॥मनहि मारि कवन सिधि थापी ॥१॥अपने मन को मार कर कौन सिद्ध बना है ? ॥ १॥ ਕਵਨੁ ਸੁ ਮੁਨਿ ਜੋ ਮਨੁ ਮਾਰੈ ॥कवनु सु मुनि जो मनु मारै ॥वह कौन-सा मुनि है, जिसने अपने मन को मार दिया है? ਮਨ ਕਉ ਮਾਰਿ ਕਹਹੁ ਕਿਸੁ ਤਾਰੈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥मन कउ

Hindi Page 328

ਗਉੜੀ ਕਬੀਰ ਜੀ ॥गउड़ी कबीर जी ॥गउड़ी कबीर जी ॥ ਜਾ ਕੈ ਹਰਿ ਸਾ ਠਾਕੁਰੁ ਭਾਈ ॥जा कै हरि सा ठाकुरु भाई ॥हे भाई ! जिसका भगवान जैसा ठाकुर मौजूद है, ਮੁਕਤਿ ਅਨੰਤ ਪੁਕਾਰਣਿ ਜਾਈ ॥੧॥मुकति अनंत पुकारणि जाई ॥१॥अनन्त मुक्तियाँ उसके समक्ष अपने आप न्योछावर होती हैं।॥ १॥ ਅਬ ਕਹੁ ਰਾਮ ਭਰੋਸਾ ਤੋਰਾ ॥अब

Hindi Page 327

ਤਨ ਮਹਿ ਹੋਤੀ ਕੋਟਿ ਉਪਾਧਿ ॥तन महि होती कोटि उपाधि ॥इस शरीर में करोड़ों ही रोग थे। ਉਲਟਿ ਭਈ ਸੁਖ ਸਹਜਿ ਸਮਾਧਿ ॥उलटि भई सुख सहजि समाधि ॥ईश्वर का नाम-सिमरन करने से अब वे भी सहज सुख एवं समाधि में बदल गए हैं। ਆਪੁ ਪਛਾਨੈ ਆਪੈ ਆਪ ॥आपु पछानै आपै आप ॥मेरे मन ने अपने

Hindi Page 326

ਐਸੇ ਘਰ ਹਮ ਬਹੁਤੁ ਬਸਾਏ ॥ऐसे घर हम बहुतु बसाए ॥उससे पहले मैंने ऐसे बहुत से शरीरों में निवास किया था॥ ਜਬ ਹਮ ਰਾਮ ਗਰਭ ਹੋਇ ਆਏ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥जब हम राम गरभ होइ आए ॥१॥ रहाउ ॥हे राम ! जब मैं अपनी माता के गर्भ में डाला गया था १॥ रहाउ ॥ ਜੋਗੀ ਜਤੀ

Hindi Page 325

ਗਉੜੀ ਕਬੀਰ ਜੀ ॥गउड़ी कबीर जी ॥गउड़ी कबीर जी ॥ ਅੰਧਕਾਰ ਸੁਖਿ ਕਬਹਿ ਨ ਸੋਈ ਹੈ ॥अंधकार सुखि कबहि न सोई है ॥भगवान को विस्मृत करके अज्ञानता रूपी अंधेरे में कभी सुखपूर्वक नहीं सोया जा सकता। ਰਾਜਾ ਰੰਕੁ ਦੋਊ ਮਿਲਿ ਰੋਈ ਹੈ ॥੧॥राजा रंकु दोऊ मिलि रोई है ॥१॥राजा हो अथवा रंक हो, दोनों ही

Hindi Page 324

ਤੂੰ ਸਤਿਗੁਰੁ ਹਉ ਨਉਤਨੁ ਚੇਲਾ ॥तूं सतिगुरु हउ नउतनु चेला ॥हे मेरे मालिक ! तू सतिगुरु है और मैं तेरा नया चेला हूँ। ਕਹਿ ਕਬੀਰ ਮਿਲੁ ਅੰਤ ਕੀ ਬੇਲਾ ॥੪॥੨॥कहि कबीर मिलु अंत की बेला ॥४॥२॥कबीर जी कहते हैं – हे प्रभु ! अब तो जीवन के अन्तिम क्षण हैं, अपने दर्शन प्रदान कीजिए॥ ४॥

Hindi Page 323

ਨਾਨਕ ਲੜਿ ਲਾਇ ਉਧਾਰਿਅਨੁ ਦਯੁ ਸੇਵਿ ਅਮਿਤਾ ॥੧੯॥नानक लड़ि लाइ उधारिअनु दयु सेवि अमिता ॥१९॥हे नानक ! ऐसे अनन्त परमात्मा का चिन्तन कर, जो अपने साथ लगाकर तुझे (संसार सागर से) पार कर देगा ॥ १६॥ ਸਲੋਕ ਮਃ ੫ ॥सलोक मः ५ ॥श्लोक महला ५॥ ਧੰਧੜੇ ਕੁਲਾਹ ਚਿਤਿ ਨ ਆਵੈ ਹੇਕੜੋ ॥धंधड़े कुलाह चिति न

Hindi Page 322

ਜੀਵਨ ਪਦੁ ਨਿਰਬਾਣੁ ਇਕੋ ਸਿਮਰੀਐ ॥जीवन पदु निरबाणु इको सिमरीऐ ॥निर्वाण अवस्था वाली जीवन पदवी पाने के लिए एक पवित्र प्रभु की आराधना करो। ਦੂਜੀ ਨਾਹੀ ਜਾਇ ਕਿਨਿ ਬਿਧਿ ਧੀਰੀਐ ॥दूजी नाही जाइ किनि बिधि धीरीऐ ॥दूसरा कोई स्थान नहीं, (क्योंकि) किसी दूसरे से हमारी कैसे संतुष्टि हो सकती है? ਡਿਠਾ ਸਭੁ ਸੰਸਾਰੁ ਸੁਖੁ ਨ

error: Content is protected !!