ਜਬ ਲਗੁ ਘਟ ਮਹਿ ਦੂਜੀ ਆਨ ॥
जब लगु घट महि दूजी आन ॥
लेकिन जब तक मनुष्य के हृदय में सांसारिक मोह की वासना है,
ਤਉ ਲਉ ਮਹਲਿ ਨ ਲਾਭੈ ਜਾਨ ॥
तउ लउ महलि न लाभै जान ॥
तब तक वह प्रभु-चरणों की शरण में लग नहीं सकता।
ਰਮਤ ਰਾਮ ਸਿਉ ਲਾਗੋ ਰੰਗੁ ॥
रमत राम सिउ लागो रंगु ॥
कबीर जी कहते हैं-जब राम का सिमरन करते करते मनुष्य का प्रेम राम के साथ हो जाता है तो
ਕਹਿ ਕਬੀਰ ਤਬ ਨਿਰਮਲ ਅੰਗ ॥੮॥੧॥
कहि कबीर तब निरमल अंग ॥८॥१॥
उसका हृदय पावन हो जाता है॥ ८ ॥ १॥
ਰਾਗੁ ਗਉੜੀ ਚੇਤੀ ਬਾਣੀ ਨਾਮਦੇਉ ਜੀਉ ਕੀ
रागु गउड़ी चेती बाणी नामदेउ जीउ की
रागु गउड़ी चेती बाणी नामदेउ जीउ की
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।
ਦੇਵਾ ਪਾਹਨ ਤਾਰੀਅਲੇ ॥
देवा पाहन तारीअले ॥
राम ने वे पत्थर भी सागर पर तार दिए हैं (जिन पर राम का नाम लिखा हुआ था)
ਰਾਮ ਕਹਤ ਜਨ ਕਸ ਨ ਤਰੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
राम कहत जन कस न तरे ॥१॥ रहाउ ॥
तेरे नाम का जाप करने से मैं तेरा सेवक कैसे (संसार-सागर से) पार नहीं होऊंगा ? ॥ १॥ रहाउ॥
ਤਾਰੀਲੇ ਗਨਿਕਾ ਬਿਨੁ ਰੂਪ ਕੁਬਿਜਾ ਬਿਆਧਿ ਅਜਾਮਲੁ ਤਾਰੀਅਲੇ ॥
तारीले गनिका बिनु रूप कुबिजा बिआधि अजामलु तारीअले ॥
हे प्रभु ! तुमने गनिका (वेश्या) को बचा लिया, तुमने कुरूप कुब्जा का कोढ़ दूर किया और पापों में ग्रस्त अजामल को पार कर दिया,
ਚਰਨ ਬਧਿਕ ਜਨ ਤੇਊ ਮੁਕਤਿ ਭਏ ॥
चरन बधिक जन तेऊ मुकति भए ॥
(श्रीकृष्ण के) चरणों में निशाना लगाने वाले शिकारी तथा कई विकारी व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर गए।
ਹਉ ਬਲਿ ਬਲਿ ਜਿਨ ਰਾਮ ਕਹੇ ॥੧॥
हउ बलि बलि जिन राम कहे ॥१॥
जिन्होंने राम का नाम याद किया है, मैं उन पर तन-मन से बलिहारी जाता हूँ॥ १॥
ਦਾਸੀ ਸੁਤ ਜਨੁ ਬਿਦਰੁ ਸੁਦਾਮਾ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਕਉ ਰਾਜ ਦੀਏ ॥
दासी सुत जनु बिदरु सुदामा उग्रसैन कउ राज दीए ॥
हे परमात्मा ! दासी-पुत्र विदुर तेरा भक्त लोकप्रिय हुआ; सुदामा (जिसका तूने दारिद्रय दूर किया), उग्रसेन को शासन प्रदान किया।
ਜਪ ਹੀਨ ਤਪ ਹੀਨ ਕੁਲ ਹੀਨ ਕ੍ਰਮ ਹੀਨ ਨਾਮੇ ਕੇ ਸੁਆਮੀ ਤੇਊ ਤਰੇ ॥੨॥੧॥
जप हीन तप हीन कुल हीन क्रम हीन नामे के सुआमी तेऊ तरे ॥२॥१॥
हे नामदेव के स्वामी ! तेरी दया से वे (संसार-सागर रो) पार हो गए हैं, जिन्होंने कोई जप नहीं किया, कोई तपस्या नहीं की, जिनकी कोई उच्च जाति नहीं थी और जिनके कर्म भी शुभ नहीं थे॥ २॥ १॥
ਰਾਗੁ ਗਉੜੀ ਰਵਿਦਾਸ ਜੀ ਕੇ ਪਦੇ ਗਉੜੀ ਗੁਆਰੇਰੀ
रागु गउड़ी रविदास जी के पदे गउड़ी गुआरेरी
रागु गउड़ी रविदास जी के पदे गउड़ी गुआरेरी
ੴ ਸਤਿਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिनामु करता पुरखु गुरप्रसादि ॥
ੴ सतिनामु करता पुरखु गुरप्रसादि ॥
ਮੇਰੀ ਸੰਗਤਿ ਪੋਚ ਸੋਚ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ॥
मेरी संगति पोच सोच दिनु राती ॥
हे प्रभु ! मुझे दिन-रात यह चिन्ता लगी रहती है कि मेरी संगति बुरी है (अर्थात् नीच लोगों के साथ मेरा रहन-सहन है),
ਮੇਰਾ ਕਰਮੁ ਕੁਟਿਲਤਾ ਜਨਮੁ ਕੁਭਾਂਤੀ ॥੧॥
मेरा करमु कुटिलता जनमु कुभांती ॥१॥
मेरे कर्म भी कुटिल हैं और मेरा जन्म भी नीच जाति में से है॥ १॥
ਰਾਮ ਗੁਸਈਆ ਜੀਅ ਕੇ ਜੀਵਨਾ ॥
राम गुसईआ जीअ के जीवना ॥
हे मेरे राम ! हे गुसाई ! हे मेरे प्राणों के सहारे !
ਮੋਹਿ ਨ ਬਿਸਾਰਹੁ ਮੈ ਜਨੁ ਤੇਰਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
मोहि न बिसारहु मै जनु तेरा ॥१॥ रहाउ ॥
मुझे मत भुलाओ, मैं तेरा सेवक हूँ॥ १॥ रहाउ ॥
ਮੇਰੀ ਹਰਹੁ ਬਿਪਤਿ ਜਨ ਕਰਹੁ ਸੁਭਾਈ ॥
मेरी हरहु बिपति जन करहु सुभाई ॥
हे प्रभु ! मेरी विपत्ति दूर कीजिए और मुझ सेवक को अपनी श्रेष्ठ प्रीति प्रदान कीजिए।
ਚਰਣ ਨ ਛਾਡਉ ਸਰੀਰ ਕਲ ਜਾਈ ॥੨
रण न छाडउ सरीर कल जाई ॥२॥
मैं तेरे चरण नहीं छोडूंगा, चाहे भेरे शरीर की शक्ति भी चली जाए॥ २॥
ਕਹੁ ਰਵਿਦਾਸ ਪਰਉ ਤੇਰੀ ਸਾਭਾ ॥
कहु रविदास परउ तेरी साभा ॥
हे रविदास ! मैंने तेरी शरण ली है, हे प्रभु !
ਬੇਗਿ ਮਿਲਹੁ ਜਨ ਕਰਿ ਨ ਬਿਲਾਂਬਾ ॥੩॥੧॥
बेगि मिलहु जन करि न बिलांबा ॥३॥१॥
अपने सेवक को शीघ्र मिल एवं विलम्ब मत कर ॥ ३॥ १॥
ਬੇਗਮ ਪੁਰਾ ਸਹਰ ਕੋ ਨਾਉ ॥
बेगम पुरा सहर को नाउ ॥
बेगमपुरा (उस) शहर का नाम है।
ਦੂਖੁ ਅੰਦੋਹੁ ਨਹੀ ਤਿਹਿ ਠਾਉ ॥
दूखु अंदोहु नही तिहि ठाउ ॥
उस स्थान पर कोई दुःख एवं क्लेश नहीं।
ਨਾਂ ਤਸਵੀਸ ਖਿਰਾਜੁ ਨ ਮਾਲੁ ॥
नां तसवीस खिराजु न मालु ॥
वहाँ सांसारिक धन नहीं और न ही उस धन को चुंगी लगने का भय है।
ਖਉਫੁ ਨ ਖਤਾ ਨ ਤਰਸੁ ਜਵਾਲੁ ॥੧॥
खउफु न खता न तरसु जवालु ॥१॥
वहाँ न कोई खौफ, न भूल, न ही प्यास और न ही कोई गिरावट है॥ १॥
ਅਬ ਮੋਹਿ ਖੂਬ ਵਤਨ ਗਹ ਪਾਈ ॥
अब मोहि खूब वतन गह पाई ॥
हे मेरे भाई ! मुझे वहीं वराने के लिए सुन्दर वतन मिल गया है।
ਊਹਾਂ ਖੈਰਿ ਸਦਾ ਮੇਰੇ ਭਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
ऊहां खैरि सदा मेरे भाई ॥१॥ रहाउ ॥
वहाँ सदा सुख-मंगल ही है॥ १॥ रहाउ ॥
ਕਾਇਮੁ ਦਾਇਮੁ ਸਦਾ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ॥
काइमु दाइमु सदा पातिसाही ॥
प्रभु की सत्ता दृढ, स्थिर एवं सदैव ही है।
ਦੋਮ ਨ ਸੇਮ ਏਕ ਸੋ ਆਹੀ ॥
दोम न सेम एक सो आही ॥
दूसरा अथवा तीसरा कोई नहीं, सब एक जैसे हैं,
ਆਬਾਦਾਨੁ ਸਦਾ ਮਸਹੂਰ ॥
आबादानु सदा मसहूर ॥
यह शहर हमेशा मशहूर है और समृद्ध है।
ਊਹਾਂ ਗਨੀ ਬਸਹਿ ਮਾਮੂਰ ॥੨॥
ऊहां गनी बसहि मामूर ॥२॥
वहाँ धनवान एवं तृप्त लोग रहते हैं।॥ २॥
ਤਿਉ ਤਿਉ ਸੈਲ ਕਰਹਿ ਜਿਉ ਭਾਵੈ ॥
तिउ तिउ सैल करहि जिउ भावै ॥
वे उस मालिक के मन्दिर के जानकार हैं, इसलिए उन्हें कोई नहीं रोकता।
ਮਹਰਮ ਮਹਲ ਨ ਕੋ ਅਟਕਾਵੈ ॥
महरम महल न को अटकावै ॥
जिस तरह उनको भला लगता है, वैसे ही वहाँ विचरण करते हैं।
ਕਹਿ ਰਵਿਦਾਸ ਖਲਾਸ ਚਮਾਰਾ ॥
कहि रविदास खलास चमारा ॥
बैंधनों से मुक्त हुआ चमार रविदास कहता है-
ਜੋ ਹਮ ਸਹਰੀ ਸੁ ਮੀਤੁ ਹਮਾਰਾ ॥੩॥੨॥
जो हम सहरी सु मीतु हमारा ॥३॥२॥
जो मेरे शहर का वासी है, वह मेरा मित्र है॥ ३ ॥ २ ॥
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।
ਗਉੜੀ ਬੈਰਾਗਣਿ ਰਵਿਦਾਸ ਜੀਉ ॥
गउड़ी बैरागणि रविदास जीउ ॥
गउड़ी बैरागणि रविदास जीउ ॥
ਘਟ ਅਵਘਟ ਡੂਗਰ ਘਣਾ ਇਕੁ ਨਿਰਗੁਣੁ ਬੈਲੁ ਹਮਾਰ ॥
घट अवघट डूगर घणा इकु निरगुणु बैलु हमार ॥
प्रभु का मार्ग बड़ा विषम एवं पहाड़ी है और मेरा बैल निर्गुण (छोटा-सा) है।
ਰਮਈਏ ਸਿਉ ਇਕ ਬੇਨਤੀ ਮੇਰੀ ਪੂੰਜੀ ਰਾਖੁ ਮੁਰਾਰਿ ॥੧॥
रमईए सिउ इक बेनती मेरी पूंजी राखु मुरारि ॥१॥
प्रियतम प्रभु के समक्ष मेरी वन्दना है-हे मुरारी ! मेरी पूँजी की तुम स्वयं रक्षा करना॥ १॥
ਕੋ ਬਨਜਾਰੋ ਰਾਮ ਕੋ ਮੇਰਾ ਟਾਂਡਾ ਲਾਦਿਆ ਜਾਇ ਰੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
को बनजारो राम को मेरा टांडा लादिआ जाइ रे ॥१॥ रहाउ ॥
क्या कोई राम का व्यापारी है, जो मेरे साथ मिलकर चले ? मेरा माल (नाम-धन) भी लदा हुआ जा रहा है॥ १॥ रहाउ॥