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ਹਰਿ ਹਰਿ ਅਗਮ ਅਗਾਧਿ ਬੋਧਿ ਅਪਰੰਪਰ ਪੁਰਖ ਅਪਾਰੀ ॥हरि हरि अगम अगाधि बोधि अपर्मपर पुरख अपारी ॥हरि-परमेश्वर अगम्य, अगाध ज्ञान वाला, अपरम्पर सर्वशक्तिमान एवं अनन्त है। ਜਨ ਕਉ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਹੁ ਜਗਜੀਵਨ ਜਨ ਨਾਨਕ ਪੈਜ ਸਵਾਰੀ ॥੪॥੧॥जन कउ क्रिपा करहु जगजीवन जन नानक पैज सवारी ॥४॥१॥हे जगत के जीवन ! अपने दास पर कृपा करो और

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ਨਾਨਕ ਆਪੇ ਵੇਖੈ ਆਪੇ ਸਚਿ ਲਾਏ ॥੪॥੭॥ नानक आपे वेखै आपे सचि लाए ॥४॥७॥ हे नानक ! वह स्वयं सबको देखता रहता है और स्वयं ही मनुष्य को सत्य-नाम में लगाता है॥४॥७॥ O’ Nanak, God Himself cherishes all and Himself unites all human beings to His eternal Name. ||4||7|| ਧਨਾਸਰੀ ਮਹਲਾ ੩ ॥ धनासरी महला

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ਪ੍ਰਭ ਸਾਚੇ ਕੀ ਸਾਚੀ ਕਾਰ ॥ ਨਾਨਕ ਨਾਮਿ ਸਵਾਰਣਹਾਰ ॥੪॥੪॥प्रभ साचे की साची कार ॥ नानक नामि सवारणहार ॥४॥४॥उस सच्चे प्रभु की आराधना भी सत्य है। हे नानक ! प्रभु का नाम मनुष्य को सुन्दर बनाने वाला है ॥४॥४॥ ਧਨਾਸਰੀ ਮਹਲਾ ੩ ॥धनासरी महला ३ ॥धनासरी महला ३ ॥ ਜੋ ਹਰਿ ਸੇਵਹਿ ਤਿਨ ਬਲਿ ਜਾਉ

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ਨਾਨਕ ਨਾਮੁ ਮਿਲੈ ਮਨੁ ਮਾਨਿਆ ॥੪॥੧॥नानक नामु मिलै मनु मानिआ ॥४॥१॥हे नानक ! उसे हरि-नाम मिल गया है और उसका मन तृप्त हो गया है ॥४॥१॥ ਧਨਾਸਰੀ ਮਹਲਾ ੩ ॥धनासरी महला ३ ॥धनासरी महला ३ ॥ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਨੁ ਨਿਰਮਲੁ ਅਤਿ ਅਪਾਰਾ ॥हरि नामु धनु निरमलु अति अपारा ॥हरि-नाम का धन अत्यंत निर्मल एवं अपंरपार

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ਮਗਰ ਪਾਛੈ ਕਛੁ ਨ ਸੂਝੈ ਏਹੁ ਪਦਮੁ ਅਲੋਅ ॥੨॥मगर पाछै कछु न सूझै एहु पदमु अलोअ ॥२॥मगर, उसे अपनी पीठ के पीछे कुछ भी दिखाई नहीं देता। उसका यह पद्मासन कितना अदभुत है ॥२॥ ਖਤ੍ਰੀਆ ਤ ਧਰਮੁ ਛੋਡਿਆ ਮਲੇਛ ਭਾਖਿਆ ਗਹੀ ॥खत्रीआ त धरमु छोडिआ मलेछ भाखिआ गही ॥क्षत्रिय हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु युद्ध

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ਜਿਨਿ ਮਨੁ ਰਾਖਿਆ ਅਗਨੀ ਪਾਇ ॥जिनि मनु राखिआ अगनी पाइ ॥जिसने माँ के गर्भ की अग्नि में पैदा करके हमारे मन की रक्षा की है। ਵਾਜੈ ਪਵਣੁ ਆਖੈ ਸਭ ਜਾਇ ॥੨॥वाजै पवणु आखै सभ जाइ ॥२॥उस परमात्मा की कृपा से जीवन-साँसें चलती हैं और जीव परस्पर बातचीत करता है ॥२॥ ਜੇਤਾ ਮੋਹੁ ਪਰੀਤਿ ਸੁਆਦ ॥जेता

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ਜਬ ਲਗੁ ਦੁਨੀਆ ਰਹੀਐ ਨਾਨਕ ਕਿਛੁ ਸੁਣੀਐ ਕਿਛੁ ਕਹੀਐ ॥जब लगु दुनीआ रहीऐ नानक किछु सुणीऐ किछु कहीऐ ॥हे नानक ! जब तक हमने दुनिया में रहना है, हमें प्रभु के बारे में कुछ कहना एवं कुछ सुनना चाहिए। ਭਾਲਿ ਰਹੇ ਹਮ ਰਹਣੁ ਨ ਪਾਇਆ ਜੀਵਤਿਆ ਮਰਿ ਰਹੀਐ ॥੫॥੨॥भालि रहे हम रहणु न पाइआ जीवतिआ

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ਧਨਾਸਰੀ ਮਹਲਾ ੧ ਘਰੁ ੧ ਚਉਪਦੇधनासरी महला १ घरु १ चउपदेधनासरी महला १ घरु १ चउपदे ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥औंकार वही एक है, उसका नाम सत्य है, वह सृष्टि एवं जीवो की रचना करने

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ਸਾਚੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਹਮ ਤੁਮ ਸਿਉ ਜੋਰੀ ॥साची प्रीति हम तुम सिउ जोरी ॥मैंने तो तुझ से सच्ची प्रीति जोड़ ली है और ਤੁਮ ਸਿਉ ਜੋਰਿ ਅਵਰ ਸੰਗਿ ਤੋਰੀ ॥੩॥तुम सिउ जोरि अवर संगि तोरी ॥३॥तुम से प्रीति जोड़कर दूसरों के साथ नाता तोड़ लिया है।३ । ਜਹ ਜਹ ਜਾਉ ਤਹਾ ਤੇਰੀ ਸੇਵਾ ॥जह जह जाउ

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ਰਾਜ ਭੁਇਅੰਗ ਪ੍ਰਸੰਗ ਜੈਸੇ ਹਹਿ ਅਬ ਕਛੁ ਮਰਮੁ ਜਨਾਇਆ ॥राज भुइअंग प्रसंग जैसे हहि अब कछु मरमु जनाइआ ॥जैसे अंधेरे में रस्सी को सांप समझने का प्रसंग है, वैसे ही मैं भूला हुआ था, पर अब तूने मुझे भेद बता दिया है। ਅਨਿਕ ਕਟਕ ਜੈਸੇ ਭੂਲਿ ਪਰੇ ਅਬ ਕਹਤੇ ਕਹਨੁ ਨ ਆਇਆ ॥੩॥अनिक कटक जैसे

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