Hindi Page 1308
ਭੈ ਭਾਇ ਭਗਤਿ ਨਿਹਾਲ ਨਾਨਕ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕੁਰਬਾਨ ॥੨॥੪॥੪੯॥भै भाइ भगति निहाल नानक सदा सदा कुरबान ॥२॥४॥४९॥नानक का कथन है कि हम उसकी भाव-भक्ति से निहाल हैं और सदैव उस पर कुर्बान जाते हैं॥२॥४॥४६॥ ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥कानड़ा महला ५ ॥कानड़ा महला ५॥ ਕਰਤ ਕਰਤ ਚਰਚ ਚਰਚ ਚਰਚਰੀ ॥करत करत चरच चरच चरचरी ॥लोग परमात्मा
