Hindi Page 1390

ਗਾਵਹਿ ਗੁਣ ਬਰਨ ਚਾਰਿ ਖਟ ਦਰਸਨ ਬ੍ਰਹਮਾਦਿਕ ਸਿਮਰੰਥਿ ਗੁਨਾ ॥गावहि गुण बरन चारि खट दरसन ब्रहमादिक सिमरंथि गुना ॥ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र- चार वर्ण, योगी, सन्यासी, वैष्णव इत्यादि छः शास्त्रं, ब्रह्मा इत्यादि सब लोग गुरु नानक का गुणगान करते हुए उनका स्मरण कर रहे हैं। ਗਾਵੈ ਗੁਣ ਸੇਸੁ ਸਹਸ ਜਿਹਬਾ ਰਸ ਆਦਿ ਅੰਤਿ ਲਿਵ

Hindi Page 1393

ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਰਸਨਿ ਗੁਰਮੁਖਿ ਬਰਦਾਯਉ ਉਲਟਿ ਗੰਗ ਪਸ੍ਚਮਿ ਧਰੀਆ ॥हरि नामु रसनि गुरमुखि बरदायउ उलटि गंग पस्चमि धरीआ ॥जो हरिनाम गुरु नानक ने रसना से उच्चरित करके जिज्ञासुओं को प्रदान किया और (अपने शिष्य भाई लहणा को गुरु-गद्दी सौंपकर) गंगा पश्चिम की ओर उलटी दिशा बहा दी। ਸੋਈ ਨਾਮੁ ਅਛਲੁ ਭਗਤਹ ਭਵ ਤਾਰਣੁ ਅਮਰਦਾਸ ਗੁਰ

Hindi Page 1394

ਸਕਯਥੁ ਜਨਮੁ ਕਲੵੁਚਰੈ ਗੁਰੁ ਪਰਸੵਿਉ ਅਮਰ ਪ੍ਰਗਾਸੁ ॥੮॥ सकयथु जनमु कल्युचरै गुरु परस्यिउ अमर प्रगासु ॥८॥ कवि कल्ह का कथन है कि जिन लोगों को विश्व विख्यात श्री गुरु अमरदास जी के दर्शन प्राप्त हुए, उनका जीवन सफल हो गया है।॥ (Therefore, the poet) Kall says, ‘fruitful is the advent of (that person) who has

Hindi Page 1394

ਸਕਯਥੁ ਜਨਮੁ ਕਲੵੁਚਰੈ ਗੁਰੁ ਪਰਸੵਿਉ ਅਮਰ ਪ੍ਰਗਾਸੁ ॥੮॥सकयथु जनमु कल्युचरै गुरु परस्यिउ अमर प्रगासु ॥८॥कवि कल्ह का कथन है कि जिन लोगों को विश्व विख्यात श्री गुरु अमरदास जी के दर्शन प्राप्त हुए, उनका जीवन सफल हो गया है।॥ ਬਾਰਿਜੁ ਕਰਿ ਦਾਹਿਣੈ ਸਿਧਿ ਸਨਮੁਖ ਮੁਖੁ ਜੋਵੈ ॥बारिजु करि दाहिणै सिधि सनमुख मुखु जोवै ॥गुरु अमरदास

Hindi Page 1395

ਇਕੁ ਬਿੰਨਿ ਦੁਗਣ ਜੁ ਤਉ ਰਹੈ ਜਾ ਸੁਮੰਤ੍ਰਿ ਮਾਨਵਹਿ ਲਹਿ ॥इकु बिंनि दुगण जु तउ रहै जा सुमंत्रि मानवहि लहि ॥जो मनुष्य गुरु का उपदेश लेकर एक ईश्वर को समझ लेता है, उसका द्वैतभाव दूर हो जाता है। ਜਾਲਪਾ ਪਦਾਰਥ ਇਤੜੇ ਗੁਰ ਅਮਰਦਾਸਿ ਡਿਠੈ ਮਿਲਹਿ ॥੫॥੧੪॥जालपा पदारथ इतड़े गुर अमरदासि डिठै मिलहि ॥५॥१४॥भाट जालप का

Hindi Page 1396

ਕਹਤਿਅਹ ਕਹਤੀ ਸੁਣੀ ਰਹਤ ਕੋ ਖੁਸੀ ਨ ਆਯਉ ॥कहतिअह कहती सुणी रहत को खुसी न आयउ ॥इनके बड़े-बड़े उपदेश तो सुनने को मिले परन्तु इनके जीवन-आचरण से मन खुश नहीं हुआ (अर्थात् ये बातें तो बड़ी-बड़ी करते थे मगर इनके आचरण से दिल दुखी ही हुआ)। ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਛੋਡਿ ਦੂਜੈ ਲਗੇ ਤਿਨੑ ਕੇ ਗੁਣ ਹਉ

Hindi Page 1397

ਸਤਗੁਰਿ ਦਯਾਲਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ੍ਹਾਯਾ ਤਿਸੁ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਵਸਿ ਪੰਚ ਕਰੇ ॥सतगुरि दयालि हरि नामु द्रिड़्हाया तिसु प्रसादि वसि पंच करे ॥इनके सच्चे गुरु अमरदास जी ने दयालु होकर मन में हरिनाम ही दृढ़ करवाया, जिसकी कृपा से उन्होंने कामादिक पाँच विकारों को वश में किया। ਕਵਿ ਕਲੵ ਠਕੁਰ ਹਰਦਾਸ ਤਨੇ ਗੁਰ ਰਾਮਦਾਸ ਸਰ ਅਭਰ ਭਰੇ

Hindi Page 1398

ਸੇਜ ਸਧਾ ਸਹਜੁ ਛਾਵਾਣੁ ਸੰਤੋਖੁ ਸਰਾਇਚਉ ਸਦਾ ਸੀਲ ਸੰਨਾਹੁ ਸੋਹੈ ॥सेज सधा सहजु छावाणु संतोखु सराइचउ सदा सील संनाहु सोहै ॥हे गुरु रामदास ! तूने श्रद्धा की सेज को बिछाया, सहज स्वभाव का शामियाना स्थित किया, संतोष को कनातों के रूप में स्थापित किया और शील-सादगी का सदैव कवच धारण किया, जो बहुत सुन्दर लग

Hindi Page 1399

ਨਲੵ ਕਵਿ ਪਾਰਸ ਪਰਸ ਕਚ ਕੰਚਨਾ ਹੁਇ ਚੰਦਨਾ ਸੁਬਾਸੁ ਜਾਸੁ ਸਿਮਰਤ ਅਨ ਤਰ ॥नल्य कवि पारस परस कच कंचना हुइ चंदना सुबासु जासु सिमरत अन तर ॥कवि नल्ह का कथन है कि गुरु रामदास रूपी पारस के स्पर्श से कंचन सरीखा हो गया हूँ, ज्यों चंदन की खुशबू से अन्य पेड़-पौधे खुशबूदार हो जाते हैं।

Hindi Page 1400

ਤਾਰਣ ਤਰਣ ਸਮ੍ਰਥੁ ਕਲਿਜੁਗਿ ਸੁਨਤ ਸਮਾਧਿ ਸਬਦ ਜਿਸੁ ਕੇਰੇ ॥तारण तरण सम्रथु कलिजुगि सुनत समाधि सबद जिसु केरे ॥कलियुग में एकमात्र वही संसार के बन्धनों से मुक्त करने वाला एवं सर्वकला समर्थ है, उसका पावन उपदेश सुनने से जीव प्रभु ध्यान में लीन हो जाता है। ਫੁਨਿ ਦੁਖਨਿ ਨਾਸੁ ਸੁਖਦਾਯਕੁ ਸੂਰਉ ਜੋ ਧਰਤ ਧਿਆਨੁ ਬਸਤ

error: Content is protected !!