ਭੈ ਭਾਇ ਭਗਤਿ ਨਿਹਾਲ ਨਾਨਕ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕੁਰਬਾਨ ॥੨॥੪॥੪੯॥
भै भाइ भगति निहाल नानक सदा सदा कुरबान ॥२॥४॥४९॥
नानक का कथन है कि हम उसकी भाव-भक्ति से निहाल हैं और सदैव उस पर कुर्बान जाते हैं॥२॥४॥४६॥
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥
कानड़ा महला ५ ॥
कानड़ा महला ५॥
ਕਰਤ ਕਰਤ ਚਰਚ ਚਰਚ ਚਰਚਰੀ ॥
करत करत चरच चरच चरचरी ॥
लोग परमात्मा की चर्चा करते रहते हैं
ਜੋਗ ਧਿਆਨ ਭੇਖ ਗਿਆਨ ਫਿਰਤ ਫਿਰਤ ਧਰਤ ਧਰਤ ਧਰਚਰੀ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
जोग धिआन भेख गिआन फिरत फिरत धरत धरत धरचरी ॥१॥ रहाउ ॥
योगाभ्यासी, ध्यानशील, वेषाडम्बरी, ज्ञानवान, भ्रमण करने वाले तथा धरती पर रहने वाले सब ॥१॥रहाउ॥
ਅਹੰ ਅਹੰ ਅਹੈ ਅਵਰ ਮੂੜ ਮੂੜ ਮੂੜ ਬਵਰਈ ॥
अहं अहं अहै अवर मूड़ मूड़ मूड़ बवरई ॥
कई लोग अभिमान में लीन रहते हैं और कई मूर्ख बावले हुए फिरते हैं।
ਜਤਿ ਜਾਤ ਜਾਤ ਜਾਤ ਸਦਾ ਸਦਾ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕਾਲ ਹਈ ॥੧॥
जति जात जात जात सदा सदा सदा सदा काल हई ॥१॥
वे जहाँ-जहाँ जाते हैं, मृत्यु सदैव बनी रहती है।॥१॥
ਮਾਨੁ ਮਾਨੁ ਮਾਨੁ ਤਿਆਗਿ ਮਿਰਤੁ ਮਿਰਤੁ ਨਿਕਟਿ ਨਿਕਟਿ ਸਦਾ ਹਈ ॥
मानु मानु मानु तिआगि मिरतु मिरतु निकटि निकटि सदा हई ॥
मान-अभिमान त्याग दो, मृत्यु सदा पास है।
ਹਰਿ ਹਰੇ ਹਰੇ ਭਾਜੁ ਕਹਤੁ ਨਾਨਕੁ ਸੁਨਹੁ ਰੇ ਮੂੜ ਬਿਨੁ ਭਜਨ ਭਜਨ ਭਜਨ ਅਹਿਲਾ ਜਨਮੁ ਗਈ ॥੨॥੫॥੫੦॥੧੨॥੬੨॥
हरि हरे हरे भाजु कहतु नानकु सुनहु रे मूड़ बिनु भजन भजन भजन अहिला जनमु गई ॥२॥५॥५०॥१२॥६२॥
परमात्मा का भजन करो, नानक कहते हैं कि अरे मूर्ख ! मेरी बात सुन, भगवान के भजन बिना जीवन व्यर्थ जा रहा है॥२॥५॥५०॥१२॥६२॥
ਕਾਨੜਾ ਅਸਟਪਦੀਆ ਮਹਲਾ ੪ ਘਰੁ ੧
कानड़ा असटपदीआ महला ४ घरु १
कानड़ा असटपदीआ महला ४ घरु १
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि॥
ਜਪਿ ਮਨ ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਸੁਖੁ ਪਾਵੈਗੋ ॥
जपि मन राम नामु सुखु पावैगो ॥
हे मन ! राम नाम का जाप कर लो, इसी से सुख प्राप्त होगा।
ਜਿਉ ਜਿਉ ਜਪੈ ਤਿਵੈ ਸੁਖੁ ਪਾਵੈ ਸਤਿਗੁਰੁ ਸੇਵਿ ਸਮਾਵੈਗੋ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
जिउ जिउ जपै तिवै सुखु पावै सतिगुरु सेवि समावैगो ॥१॥ रहाउ ॥
ज्यों-ज्यों जाप करोगे, त्यों-त्यों परम सुख मिलेगा और सतगुरु की सेवा में लीन रहोगे॥१॥रहाउ॥
ਭਗਤ ਜਨਾਂ ਕੀ ਖਿਨੁ ਖਿਨੁ ਲੋਚਾ ਨਾਮੁ ਜਪਤ ਸੁਖੁ ਪਾਵੈਗੋ ॥
भगत जनां की खिनु खिनु लोचा नामु जपत सुखु पावैगो ॥
भक्तजनों की हर पल हरिनाम जपने की कामना रहती है, इसी से उनको सुख प्राप्त होता है।
ਅਨ ਰਸ ਸਾਦ ਗਏ ਸਭ ਨੀਕਰਿ ਬਿਨੁ ਨਾਵੈ ਕਿਛੁ ਨ ਸੁਖਾਵੈਗੋ ॥੧॥
अन रस साद गए सभ नीकरि बिनु नावै किछु न सुखावैगो ॥१॥
उनको अन्य रसों का स्वाद भूल जाता है और नाम के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता॥१॥
ਗੁਰਮਤਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਮੀਠਾ ਲਾਗਾ ਗੁਰੁ ਮੀਠੇ ਬਚਨ ਕਢਾਵੈਗੋ ॥
गुरमति हरि हरि मीठा लागा गुरु मीठे बचन कढावैगो ॥
गुरु की शिक्षा से हरिनाम ही मीठा लगा है और गुरु मीठे वचन ही बोलता है।
ਸਤਿਗੁਰ ਬਾਣੀ ਪੁਰਖੁ ਪੁਰਖੋਤਮ ਬਾਣੀ ਸਿਉ ਚਿਤੁ ਲਾਵੈਗੋ ॥੨॥
सतिगुर बाणी पुरखु पुरखोतम बाणी सिउ चितु लावैगो ॥२॥
सतिगुरु की वाणी से पुरुषोत्तम परमेश्वर का ज्ञान मिलता है, अतः गुरु की वाणी से मन लगाओ॥२॥
ਗੁਰਬਾਣੀ ਸੁਨਤ ਮੇਰਾ ਮਨੁ ਦ੍ਰਵਿਆ ਮਨੁ ਭੀਨਾ ਨਿਜ ਘਰਿ ਆਵੈਗੋ ॥
गुरबाणी सुनत मेरा मनु द्रविआ मनु भीना निज घरि आवैगो ॥
गुरु की वाणी सुनकर मेरा मन द्रवित हो गया है और भीगा मन आत्मस्वरूप में आता है।
ਤਹ ਅਨਹਤ ਧੁਨੀ ਬਾਜਹਿ ਨਿਤ ਬਾਜੇ ਨੀਝਰ ਧਾਰ ਚੁਆਵੈਗੋ ॥੩॥
तह अनहत धुनी बाजहि नित बाजे नीझर धार चुआवैगो ॥३॥
वहाँ अनाहत ध्वनि गूंजती है, अमृतधारा बहती है॥३॥
ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਇਕੁ ਤਿਲ ਤਿਲ ਗਾਵੈ ਮਨੁ ਗੁਰਮਤਿ ਨਾਮਿ ਸਮਾਵੈਗੋ ॥
राम नामु इकु तिल तिल गावै मनु गुरमति नामि समावैगो ॥
जो पल भर के लिए राम नाम का भजन गाता है, गुरु की शिक्षा से उसका मन नाम में ही लीन हो जाता है।
ਨਾਮੁ ਸੁਣੈ ਨਾਮੋ ਮਨਿ ਭਾਵੈ ਨਾਮੇ ਹੀ ਤ੍ਰਿਪਤਾਵੈਗੋ ॥੪॥
नामु सुणै नामो मनि भावै नामे ही त्रिपतावैगो ॥४॥
ऐसा जिज्ञासु राम नाम का संकीर्तन सुनता, नाम ही उसके मन को अच्छा लगता है और नाम से ही वह तृप्त होता है।॥४॥
ਕਨਿਕ ਕਨਿਕ ਪਹਿਰੇ ਬਹੁ ਕੰਗਨਾ ਕਾਪਰੁ ਭਾਂਤਿ ਬਨਾਵੈਗੋ ॥
कनिक कनिक पहिरे बहु कंगना कापरु भांति बनावैगो ॥
बेशक स्वर्ण के आभूषण, कंगन एवं सुन्दर वस्त्र धारण कर लो,”
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਸਭਿ ਫੀਕ ਫਿਕਾਨੇ ਜਨਮਿ ਮਰੈ ਫਿਰਿ ਆਵੈਗੋ ॥੫॥
नाम बिना सभि फीक फिकाने जनमि मरै फिरि आवैगो ॥५॥
हरिनाम बिना सभी व्यर्थ हैं और पुनः जन्म-मरण का चक्र बना रहता है।॥५॥
ਮਾਇਆ ਪਟਲ ਪਟਲ ਹੈ ਭਾਰੀ ਘਰੁ ਘੂਮਨਿ ਘੇਰਿ ਘੁਲਾਵੈਗੋ ॥
माइआ पटल पटल है भारी घरु घूमनि घेरि घुलावैगो ॥
माया का पर्दा बहुत भारी है और यह भूल-भुलैया में डालकर मनुष्य को तबाह करता है।
ਪਾਪ ਬਿਕਾਰ ਮਨੂਰ ਸਭਿ ਭਾਰੇ ਬਿਖੁ ਦੁਤਰੁ ਤਰਿਓ ਨ ਜਾਵੈਗੋ ॥੬॥
पाप बिकार मनूर सभि भारे बिखु दुतरु तरिओ न जावैगो ॥६॥
पाप-विकारों ने लोहे की तरह भारी कर दिया है, इससे दुस्तर संसार-समुद्र से पार नहीं हुआ जा सकता॥६॥
ਭਉ ਬੈਰਾਗੁ ਭਇਆ ਹੈ ਬੋਹਿਥੁ ਗੁਰੁ ਖੇਵਟੁ ਸਬਦਿ ਤਰਾਵੈਗੋ ॥
भउ बैरागु भइआ है बोहिथु गुरु खेवटु सबदि तरावैगो ॥
ईश्वर के प्रेम एवं वैराग्य भाव को जहाज बना लो, गुरु खेवट अपने शब्द द्वारा संसार-समुद्र से पार करवा देगा।
ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਹਰਿ ਭੇਟੀਐ ਹਰਿ ਰਾਮੈ ਨਾਮਿ ਸਮਾਵੈਗੋ ॥੭॥
राम नामु हरि भेटीऐ हरि रामै नामि समावैगो ॥७॥
राम नाम के चिंतन से प्रभु से साक्षात्कार हो सकता है और राम नाम में लीन हो जाओगे॥७॥
ਅਗਿਆਨਿ ਲਾਇ ਸਵਾਲਿਆ ਗੁਰ ਗਿਆਨੈ ਲਾਇ ਜਗਾਵੈਗੋ ॥
अगिआनि लाइ सवालिआ गुर गिआनै लाइ जगावैगो ॥
प्रभु मनुष्य को अज्ञान की निद्रा में उाल देता है, गुरु का ज्ञान ही इससे जगाने वाला है।
ਨਾਨਕ ਭਾਣੈ ਆਪਣੈ ਜਿਉ ਭਾਵੈ ਤਿਵੈ ਚਲਾਵੈਗੋ ॥੮॥੧॥
नानक भाणै आपणै जिउ भावै तिवै चलावैगो ॥८॥१॥
नानक फुरमाते हैं- परमेश्वर की रज़ा शिरोधार्य है, जैसे उसे उचित लगता है, वैसे ही संसार को चलाता है॥८॥१॥
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੪ ॥
कानड़ा महला ४ ॥
कानड़ा महला ४॥
ਜਪਿ ਮਨ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਤਰਾਵੈਗੋ ॥
जपि मन हरि हरि नामु तरावैगो ॥
हे मन ! हरिनाम का जाप करो, संसार-समुद्र से तैर जाओगे।
ਜੋ ਜੋ ਜਪੈ ਸੋਈ ਗਤਿ ਪਾਵੈ ਜਿਉ ਧ੍ਰੂ ਪ੍ਰਹਿਲਾਦੁ ਸਮਾਵੈਗੋ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
जो जो जपै सोई गति पावै जिउ ध्रू प्रहिलादु समावैगो ॥१॥ रहाउ ॥
जो भी जाप करता है, वही मुक्ति पाता है, ज्यों भक्त धुव एवं भक्त प्रहलाद हरि में लीन हो गए॥१॥रहाउ॥