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ਪੰਚ ਸਿੰਘ ਰਾਖੇ ਪ੍ਰਭਿ ਮਾਰਿ ॥पंच सिंघ राखे प्रभि मारि ॥काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार रूपी पाँच शेरों को प्रभु ने मार दिया है, ਦਸ ਬਿਘਿਆੜੀ ਲਈ ਨਿਵਾਰਿ ॥दस बिघिआड़ी लई निवारि ॥दस इन्द्रिय रूपी बघियाड़ों का भी अंत कर दिया है, ਤੀਨਿ ਆਵਰਤ ਕੀ ਚੂਕੀ ਘੇਰ ॥तीनि आवरत की चूकी घेर ॥माया के
