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ਓਰੈ ਕਛੂ ਨ ਕਿਨਹੂ ਕੀਆ ॥ओरै कछू न किनहू कीआ ॥यहाँ (इहलोक में) किसी ने कुछ भी स्वयं सम्पूर्ण नहीं किया। ਨਾਨਕ ਸਭੁ ਕਛੁ ਪ੍ਰਭ ਤੇ ਹੂਆ ॥੫੧॥नानक सभु कछु प्रभ ते हूआ ॥५१॥हे नानक ! प्रभु ने ही यह सृष्टि रचना की हुई है॥ ५१॥ ਸਲੋਕੁ ॥सलोकु ॥श्लोक॥ ਲੇਖੈ ਕਤਹਿ ਨ ਛੂਟੀਐ ਖਿਨੁ ਖਿਨੁ

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ਸਲੋਕੁ ॥सलोकु ॥श्लोक॥ ਹਉ ਹਉ ਕਰਤ ਬਿਹਾਨੀਆ ਸਾਕਤ ਮੁਗਧ ਅਜਾਨ ॥हउ हउ करत बिहानीआ साकत मुगध अजान ॥शाक्त, मूर्ख एवं नासमझ इन्सान अहंकार करता हुआ अपनी आयु बिता देता है। ੜੜਕਿ ਮੁਏ ਜਿਉ ਤ੍ਰਿਖਾਵੰਤ ਨਾਨਕ ਕਿਰਤਿ ਕਮਾਨ ॥੧॥ड़ड़कि मुए जिउ त्रिखावंत नानक किरति कमान ॥१॥हे नानक ! दुःख में वह प्यासे पुरुष की भाँति मर

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ਸਲੋਕੁ ॥सलोक ॥श्लोक ॥ ਮਤਿ ਪੂਰੀ ਪਰਧਾਨ ਤੇ ਗੁਰ ਪੂਰੇ ਮਨ ਮੰਤ ॥मति पूरी परधान ते गुर पूरे मन मंत ॥जिनके मन में पूर्ण गुरु का मंत्र विद्यमान हो जाता है, उनकी बुद्धि पूर्ण हो जाती है और वे विख्यात हो जाते हैं। ਜਿਹ ਜਾਨਿਓ ਪ੍ਰਭੁ ਆਪੁਨਾ ਨਾਨਕ ਤੇ ਭਗਵੰਤ ॥੧॥जिह जानिओ प्रभु आपुना नानक

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ਨਿਧਿ ਨਿਧਾਨ ਹਰਿ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਪੂਰੇ ॥निधि निधान हरि अम्रित पूरे ॥हे नानक ! जिनके अन्तर्मन सर्वगुणों के भण्डार हरि-नाम के अमृत से भरे रहते हैं, ਤਹ ਬਾਜੇ ਨਾਨਕ ਅਨਹਦ ਤੂਰੇ ॥੩੬॥तह बाजे नानक अनहद तूरे ॥३६॥उनके भीतर एक ऐसा आनन्द कायम रहता है, जिस तरह लगातार अनहद ध्वनि के सर्व प्रकार के संगीत मिले-जुले स्वर

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ਤ੍ਰਾਸ ਮਿਟੈ ਜਮ ਪੰਥ ਕੀ ਜਾਸੁ ਬਸੈ ਮਨਿ ਨਾਉ ॥त्रास मिटै जम पंथ की जासु बसै मनि नाउ ॥जिसके हृदय में नाम निवास करता है, उसको मृत्यु का मार्ग एवं भय नहीं सताता। ਗਤਿ ਪਾਵਹਿ ਮਤਿ ਹੋਇ ਪ੍ਰਗਾਸ ਮਹਲੀ ਪਾਵਹਿ ਠਾਉ ॥गति पावहि मति होइ प्रगास महली पावहि ठाउ ॥वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है

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ਪਉੜੀ ॥पउड़ी ॥पउड़ी॥ ਠਠਾ ਮਨੂਆ ਠਾਹਹਿ ਨਾਹੀ ॥ठठा मनूआ ठाहहि नाही ॥ठ – वह किसी के भी मन को दुःख नहीं पहुँचाते ਜੋ ਸਗਲ ਤਿਆਗਿ ਏਕਹਿ ਲਪਟਾਹੀ ॥जो सगल तिआगि एकहि लपटाही ॥जो सब कुछ त्याग कर एक ईश्वर से जुड़े हुए हैं। ਠਹਕਿ ਠਹਕਿ ਮਾਇਆ ਸੰਗਿ ਮੂਏ ॥ठहकि ठहकि माइआ संगि मूए ॥जो लोग

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ਅਪਨੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਹੁ ਭਗਵੰਤਾ ॥अपनी क्रिपा करहु भगवंता ॥हे भगवान ! मुझ पर अपनी ऐसी कृपा कर दो । ਛਾਡਿ ਸਿਆਨਪ ਬਹੁ ਚਤੁਰਾਈ ॥छाडि सिआनप बहु चतुराई ॥मैंने अपनी अधिकतर बुद्धिमत्ता एवं चतुरता त्याग दी है ਸੰਤਨ ਕੀ ਮਨ ਟੇਕ ਟਿਕਾਈ ॥संतन की मन टेक टिकाई ॥और अपने मन को संतों के आसरे टिका दिया

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ਸਲੋਕੁ ॥सलोकु ॥श्लोक॥ ਗਨਿ ਮਿਨਿ ਦੇਖਹੁ ਮਨੈ ਮਾਹਿ ਸਰਪਰ ਚਲਨੋ ਲੋਗ ॥गनि मिनि देखहु मनै माहि सरपर चलनो लोग ॥“(हे जिज्ञासु !) अपने चित्त में भलीभाँति विचार कर देख लो, कि लोगों ने इस दुनिया से निश्चित ही चले जाना है। ਆਸ ਅਨਿਤ ਗੁਰਮੁਖਿ ਮਿਟੈ ਨਾਨਕ ਨਾਮ ਅਰੋਗ ॥੧॥आस अनित गुरमुखि मिटै नानक नाम अरोग

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ਪਉੜੀ ॥पउड़ी ॥पउड़ी ॥ ਯਯਾ ਜਾਰਉ ਦੁਰਮਤਿ ਦੋਊ ॥यया जारउ दुरमति दोऊ ॥य – अपनी दुर्बुद्धि एवं द्वैतवाद को जला दो। ਤਿਸਹਿ ਤਿਆਗਿ ਸੁਖ ਸਹਜੇ ਸੋਊ ॥तिसहि तिआगि सुख सहजे सोऊ ॥इनको त्याग कर सहज सुख में निद्रा करो। ਯਯਾ ਜਾਇ ਪਰਹੁ ਸੰਤ ਸਰਨਾ ॥यया जाइ परहु संत सरना ॥य – जाकर उन संतों की

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ਪਉੜੀ ॥पउड़ी ॥पउड़ी॥ ਰੇ ਮਨ ਬਿਨੁ ਹਰਿ ਜਹ ਰਚਹੁ ਤਹ ਤਹ ਬੰਧਨ ਪਾਹਿ ॥रे मन बिनु हरि जह रचहु तह तह बंधन पाहि ॥हे मेरे मन ! परमेश्वर के अलावा जिस किसी (मोह) में भी तू प्रवृत्त होता है, वहाँ ही तुझे बन्धन जकड़ लेते हैं। ਜਿਹ ਬਿਧਿ ਕਤਹੂ ਨ ਛੂਟੀਐ ਸਾਕਤ ਤੇਊ ਕਮਾਹਿ ॥जिह

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