ਵਖਤੁ ਵੀਚਾਰੇ ਸੁ ਬੰਦਾ ਹੋਇ ॥
वखतु वीचारे सु बंदा होइ ॥
जो प्राणी जीवन काल का विचार करता है, वही परमात्मा का सच्चा भक्त होता है।
ਕੁਦਰਤਿ ਹੈ ਕੀਮਤਿ ਨਹੀ ਪਾਇ ॥
कुदरति है कीमति नही पाइ ॥
भगवान कुदरत में निवास करता है परन्तु उसका मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
ਜਾ ਕੀਮਤਿ ਪਾਇ ਤ ਕਹੀ ਨ ਜਾਇ ॥
जा कीमति पाइ त कही न जाइ ॥
यदि इन्सान मूल्य जान भी ले, तो वह ब्यान नहीं कर सकता।
ਸਰੈ ਸਰੀਅਤਿ ਕਰਹਿ ਬੀਚਾਰੁ ॥
सरै सरीअति करहि बीचारु ॥
कुछ लोग शरीयत द्वारा मालिक-प्रभु बारे विचार करते हैं।
ਬਿਨੁ ਬੂਝੇ ਕੈਸੇ ਪਾਵਹਿ ਪਾਰੁ ॥
बिनु बूझे कैसे पावहि पारु ॥
परन्तु ईश्वर को समझने के बिना वह किस तरह पार हो सकते हैं ?
ਸਿਦਕੁ ਕਰਿ ਸਿਜਦਾ ਮਨੁ ਕਰਿ ਮਖਸੂਦੁ ॥
सिदकु करि सिजदा मनु करि मखसूदु ॥
धैर्य को नमन करो और मन को नाम-सिमरन में लगाने का जीवन-मनोरथ बनाओ ।
ਜਿਹ ਧਿਰਿ ਦੇਖਾ ਤਿਹ ਧਿਰਿ ਮਉਜੂਦੁ ॥੧॥
जिह धिरि देखा तिह धिरि मउजूदु ॥१॥
फिर जिस तरफ भी देखोगे, उधर ही ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन करोगे ॥१॥
ਮਃ ੩ ॥
मः ३ ॥ .
श्लोक महला ३ ॥
ਗੁਰ ਸਭਾ ਏਵ ਨ ਪਾਈਐ ਨਾ ਨੇੜੈ ਨਾ ਦੂਰਿ ॥
गुर सभा एव न पाईऐ ना नेड़ै ना दूरि ॥
गुरु की संगति (शारीरिक रूप से) निकट अथवा दूर रहने से प्राप्त नहीं होती।
ਨਾਨਕ ਸਤਿਗੁਰੁ ਤਾਂ ਮਿਲੈ ਜਾ ਮਨੁ ਰਹੈ ਹਦੂਰਿ ॥੨॥
नानक सतिगुरु तां मिलै जा मनु रहै हदूरि ॥२॥
हे नानक ! सतिगुरु तभी मिलते हैं, यदि मन उनकी उपस्थिति के अन्दर सदैव विचरण करे ॥२॥
ਪਉੜੀ ॥
पउड़ी ॥
पउड़ी ॥
ਸਪਤ ਦੀਪ ਸਪਤ ਸਾਗਰਾ ਨਵ ਖੰਡ ਚਾਰਿ ਵੇਦ ਦਸ ਅਸਟ ਪੁਰਾਣਾ ॥
सपत दीप सपत सागरा नव खंड चारि वेद दस असट पुराणा ॥
सृष्टि में सात द्वीप, सात समुद्र, नौ खण्ड, चार वेद एवं अठारह पुराण हैं।
ਹਰਿ ਸਭਨਾ ਵਿਚਿ ਤੂੰ ਵਰਤਦਾ ਹਰਿ ਸਭਨਾ ਭਾਣਾ ॥
हरि सभना विचि तूं वरतदा हरि सभना भाणा ॥
प्रभु ! तुम इन सबमें विद्यमान हो और तुम सबको प्रिय हो।
ਸਭਿ ਤੁਝੈ ਧਿਆਵਹਿ ਜੀਅ ਜੰਤ ਹਰਿ ਸਾਰਗ ਪਾਣਾ ॥
सभि तुझै धिआवहि जीअ जंत हरि सारग पाणा ॥
हे सारिंगपाणि ईश्वर ! समस्त जीव-जन्तु सदैव तुम्हारा ही सिमरन करते हैं।
ਜੋ ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਰਿ ਆਰਾਧਦੇ ਤਿਨ ਹਉ ਕੁਰਬਾਣਾ ॥
जो गुरमुखि हरि आराधदे तिन हउ कुरबाणा ॥
जो गुरमुख हरि की वंदना करते हैं, मैं उन पर कुर्बान जाता हूँ।
ਤੂੰ ਆਪੇ ਆਪਿ ਵਰਤਦਾ ਕਰਿ ਚੋਜ ਵਿਡਾਣਾ ॥੪॥
तूं आपे आपि वरतदा करि चोज विडाणा ॥४॥
हे ईश्वर ! तुम ही आश्चर्यजनक लीलाओं को रचकर स्वयं ही सब में विद्यमान हो रहे हो ॥४॥
ਸਲੋਕ ਮਃ ੩ ॥
सलोक मः ३ ॥
श्लोक महला ३ ॥
ਕਲਉ ਮਸਾਜਨੀ ਕਿਆ ਸਦਾਈਐ ਹਿਰਦੈ ਹੀ ਲਿਖਿ ਲੇਹੁ ॥
कलउ मसाजनी किआ सदाईऐ हिरदै ही लिखि लेहु ॥
लेखनी और दवात मंगवाने की क्या आवश्यकता है? जो लिखना चाहते हो, उसे अपने हृदय में ही लिखो।
ਸਦਾ ਸਾਹਿਬ ਕੈ ਰੰਗਿ ਰਹੈ ਕਬਹੂੰ ਨ ਤੂਟਸਿ ਨੇਹੁ ॥
सदा साहिब कै रंगि रहै कबहूं न तूटसि नेहु ॥
हृदय में लिख लेने से तुम सदैव प्रभु के प्रेम में लीन रहोगे और कभी भी उस परमेश्वर से अलग नहीं होगे।
ਕਲਉ ਮਸਾਜਨੀ ਜਾਇਸੀ ਲਿਖਿਆ ਭੀ ਨਾਲੇ ਜਾਇ ॥
कलउ मसाजनी जाइसी लिखिआ भी नाले जाइ ॥
कलम और दवात नाशवान हैं, लिखित कागज भी नष्ट हो जाएगा।
ਨਾਨਕ ਸਹ ਪ੍ਰੀਤਿ ਨ ਜਾਇਸੀ ਜੋ ਧੁਰਿ ਛੋਡੀ ਸਚੈ ਪਾਇ ॥੧॥
नानक सह प्रीति न जाइसी जो धुरि छोडी सचै पाइ ॥१॥
हे नानक ! जो प्रेम प्रभु ने प्रारम्भ से ही जीव की किस्मत में लिख दिया है, वह प्रेम कभी भी मिट नहीं सकता ॥१॥
ਮਃ ੩ ॥
मः ३ ॥
महला ३ ॥
ਨਦਰੀ ਆਵਦਾ ਨਾਲਿ ਨ ਚਲਈ ਵੇਖਹੁ ਕੋ ਵਿਉਪਾਇ ॥
नदरी आवदा नालि न चलई वेखहु को विउपाइ ॥
जो वस्तु दृश्यमान है, वह कभी अनंतकाल तक प्राणी का साथ नहीं देती। चाहे तुम परख कर देख सकते हो।
ਸਤਿਗੁਰਿ ਸਚੁ ਦ੍ਰਿੜਾਇਆ ਸਚਿ ਰਹਹੁ ਲਿਵ ਲਾਇ ॥
सतिगुरि सचु द्रिड़ाइआ सचि रहहु लिव लाइ ॥
अतः सतिगुरु ने सदैव सत्य की प्रेरणा दी है; उसी सत्य में सुरति लगाने से सत्य की प्राप्ति होगी।
ਨਾਨਕ ਸਬਦੀ ਸਚੁ ਹੈ ਕਰਮੀ ਪਲੈ ਪਾਇ ॥੨॥
नानक सबदी सचु है करमी पलै पाइ ॥२॥
हे नानक ! वह सत्य प्रभु नाम द्वारा ही मिलता है, किन्तु उसकी उपलब्धि शुभ कर्मों से होती है।॥२॥
ਪਉੜੀ ॥
पउड़ी ॥
पउड़ी ॥
ਹਰਿ ਅੰਦਰਿ ਬਾਹਰਿ ਇਕੁ ਤੂੰ ਤੂੰ ਜਾਣਹਿ ਭੇਤੁ ॥
हरि अंदरि बाहरि इकु तूं तूं जाणहि भेतु ॥
हे प्रभु ! अन्दर-बाहर अर्थात् समस्त सृष्टि में तू ही मौजूद है। इस रहस्य को तू ही जानता है।
ਜੋ ਕੀਚੈ ਸੋ ਹਰਿ ਜਾਣਦਾ ਮੇਰੇ ਮਨ ਹਰਿ ਚੇਤੁ ॥
जो कीचै सो हरि जाणदा मेरे मन हरि चेतु ॥
मनुष्य जो कुछ भी करता है, उसको परमात्मा जानता है। हे मेरे मन ! तू ईश्वर का चिन्तन कर।
ਸੋ ਡਰੈ ਜਿ ਪਾਪ ਕਮਾਵਦਾ ਧਰਮੀ ਵਿਗਸੇਤੁ ॥
सो डरै जि पाप कमावदा धरमी विगसेतु ॥
जो प्राणी पाप करता है, केवल वही भय में रहता है। परन्तु धर्म करने वाला नित्य प्रसन्नचित्त रहता है।
ਤੂੰ ਸਚਾ ਆਪਿ ਨਿਆਉ ਸਚੁ ਤਾ ਡਰੀਐ ਕੇਤੁ ॥
तूं सचा आपि निआउ सचु ता डरीऐ केतु ॥
हे भगवान ! तुम सत्य-स्वरूप हो, तुम्हारा न्याय भी सत्य है। अतः (प्रभु की शरण में) हमें किस बात का भय है।
ਜਿਨਾ ਨਾਨਕ ਸਚੁ ਪਛਾਣਿਆ ਸੇ ਸਚਿ ਰਲੇਤੁ ॥੫॥
जिना नानक सचु पछाणिआ से सचि रलेतु ॥५॥
हे नानक ! जिन्होंने सत्य (परमात्मा) को पहचान लिया, वे उस सत्य में ही विलीन हो जाते हैं ॥५॥
ਸਲੋਕ ਮਃ ੩ ॥
सलोक मः ३ ॥
श्लोक महला ३ ॥
ਕਲਮ ਜਲਉ ਸਣੁ ਮਸਵਾਣੀਐ ਕਾਗਦੁ ਭੀ ਜਲਿ ਜਾਉ ॥
कलम जलउ सणु मसवाणीऐ कागदु भी जलि जाउ ॥
दवात सहित कलम भी जल जाए, लिखा हुआ कागज भी जल जाए,
ਲਿਖਣ ਵਾਲਾ ਜਲਿ ਬਲਉ ਜਿਨਿ ਲਿਖਿਆ ਦੂਜਾ ਭਾਉ ॥
लिखण वाला जलि बलउ जिनि लिखिआ दूजा भाउ ॥
स्वयं लिखने वाला भी जल कर मर जाए, जिसने द्वैत-भाव बारे लिखा है।
ਨਾਨਕ ਪੂਰਬਿ ਲਿਖਿਆ ਕਮਾਵਣਾ ਅਵਰੁ ਨ ਕਰਣਾ ਜਾਇ ॥੧॥
नानक पूरबि लिखिआ कमावणा अवरु न करणा जाइ ॥१॥
हे नानक ! प्राणी वही कर्म करता है, जो उसके पूर्व-जन्म के कर्म-फलानुसार है। अन्य कुछ नहीं किया जा सकता॥१॥
ਮਃ ੩ ॥
मः ३ ॥
महला ३ ॥
ਹੋਰੁ ਕੂੜੁ ਪੜਣਾ ਕੂੜੁ ਬੋਲਣਾ ਮਾਇਆ ਨਾਲਿ ਪਿਆਰੁ ॥
होरु कूड़ु पड़णा कूड़ु बोलणा माइआ नालि पिआरु ॥
भगवान के नाम के सिवाय अन्य कुछ पढ़ना एवं बोलना मिथ्या है। ये तो माया से प्रेम उत्पन्न करते हैं।
ਨਾਨਕ ਵਿਣੁ ਨਾਵੈ ਕੋ ਥਿਰੁ ਨਹੀ ਪੜਿ ਪੜਿ ਹੋਇ ਖੁਆਰੁ ॥੨॥
नानक विणु नावै को थिरु नही पड़ि पड़ि होइ खुआरु ॥२॥
हे नानक ! भगवान के नाम के सिवाय कुछ भी अटल नहीं रह सकता। इसके अलावा अन्य पढ़-पढ़कर मनुष्य नष्ट ही होते हैं।
ਪਉੜੀ ॥
पउड़ी ॥
पउड़ी ॥
ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਵਡੀ ਹੈ ਹਰਿ ਕੀਰਤਨੁ ਹਰਿ ਕਾ ॥
हरि की वडिआई वडी है हरि कीरतनु हरि का ॥
भगवान की महिमा महान है और भगवान का भजन करना ही जीव हेतु उत्तम है।
ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਵਡੀ ਹੈ ਜਾ ਨਿਆਉ ਹੈ ਧਰਮ ਕਾ ॥
हरि की वडिआई वडी है जा निआउ है धरम का ॥
भगवान की महिमा महान है, क्योंकि भगवान का न्याय धर्म का है।
ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਵਡੀ ਹੈ ਜਾ ਫਲੁ ਹੈ ਜੀਅ ਕਾ ॥
हरि की वडिआई वडी है जा फलु है जीअ का ॥
भगवान की महिमा महान है, जो जीव को महिमा करने का ही फल प्राप्त होता है।
ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਵਡੀ ਹੈ ਜਾ ਨ ਸੁਣਈ ਕਹਿਆ ਚੁਗਲ ਕਾ ॥
हरि की वडिआई वडी है जा न सुणई कहिआ चुगल का ॥
भगवान की महिमा महान है, जो वह निंदक की बात नहीं सुनता।
ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਵਡੀ ਹੈ ਅਪੁਛਿਆ ਦਾਨੁ ਦੇਵਕਾ ॥੬॥
हरि की वडिआई वडी है अपुछिआ दानु देवका ॥६॥
भगवान की महिमा महान है, क्योंकि वह बिना पूछे ही सबकी कामनाएँ पूरी करता है ॥६॥
ਸਲੋਕ ਮਃ ੩ ॥
सलोक मः ३ ॥
श्लोक महला ३ ॥
ਹਉ ਹਉ ਕਰਤੀ ਸਭ ਮੁਈ ਸੰਪਉ ਕਿਸੈ ਨ ਨਾਲਿ ॥
हउ हउ करती सभ मुई स्मपउ किसै न नालि ॥
सारी दुनिया मैं-मैं अर्थात् अहंकार करती हुई नष्ट हो गई है। मृत्यु के समय यह धन-संपति किसी के साथ नहीं जाती।
ਦੂਜੈ ਭਾਇ ਦੁਖੁ ਪਾਇਆ ਸਭ ਜੋਹੀ ਜਮਕਾਲਿ ॥
दूजै भाइ दुखु पाइआ सभ जोही जमकालि ॥
मोह-माया में फँसकर सभी ने दुःख ही प्राप्त किया है। यमदूत सभी को प्रताड़ित करता है।