Hindi Page 1144

ਜਿਸੁ ਲੜਿ ਲਾਇ ਲਏ ਸੋ ਲਾਗੈ ॥
जिसु लड़ि लाइ लए सो लागै ॥
ईश्वर जिसे अपनी लगन में लगा लेता है, वही लगता है और

ਜਨਮ ਜਨਮ ਕਾ ਸੋਇਆ ਜਾਗੈ ॥੩॥
जनम जनम का सोइआ जागै ॥३॥
उसका जन्म-जन्म का सोया हुआ मन जागृत हो जाता है।॥३॥

ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਭਗਤਨ ਕਾ ਆਪਿ ॥
तेरे भगत भगतन का आपि ॥
हे ईश्वर ! भक्तगण तेरे हैं और तू स्वयं भक्तों का है,

ਅਪਣੀ ਮਹਿਮਾ ਆਪੇ ਜਾਪਿ ॥
अपणी महिमा आपे जापि ॥
अपनी महिमा का जाप तू स्वयं ही उनसे करवाता है।

ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਤੇਰੈ ਹਾਥਿ ॥
जीअ जंत सभि तेरै हाथि ॥
नानक का कथन है कि हे प्रभु ! जगत के सब जीव-जन्तु तेरे वश में हैं और

ਨਾਨਕ ਕੇ ਪ੍ਰਭ ਸਦ ਹੀ ਸਾਥਿ ॥੪॥੧੬॥੨੯॥
नानक के प्रभ सद ही साथि ॥४॥१६॥२९॥
तू सदा ही हमारे साथ है॥४॥ १६॥ २६॥

ਭੈਰਉ ਮਹਲਾ ੫ ॥
भैरउ महला ५ ॥
भैरउ महला ५॥

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਅੰਤਰਜਾਮੀ ॥
नामु हमारै अंतरजामी ॥
भगवन्नाम हमारे मन की भावना को जाननेवाला है औरं

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਆਵੈ ਕਾਮੀ ॥
नामु हमारै आवै कामी ॥
नाम ही हमारे काम आता है।

ਰੋਮਿ ਰੋਮਿ ਰਵਿਆ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ॥
रोमि रोमि रविआ हरि नामु ॥
रोम-रोम में हरिनाम ही बसा हुआ है और

ਸਤਿਗੁਰ ਪੂਰੈ ਕੀਨੋ ਦਾਨੁ ॥੧॥
सतिगुर पूरै कीनो दानु ॥१॥
पूर्ण सतगुरु ने यही दान किया है॥१॥

ਨਾਮੁ ਰਤਨੁ ਮੇਰੈ ਭੰਡਾਰ ॥
नामु रतनु मेरै भंडार ॥
प्रभु-नाम रूपी रत्न ही हमारा भण्डार है, जो

ਅਗਮ ਅਮੋਲਾ ਅਪਰ ਅਪਾਰ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
अगम अमोला अपर अपार ॥१॥ रहाउ ॥
अगम्य, अमूल्य एवं अपरम्पार है॥१॥ रहाउ॥

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਨਿਹਚਲ ਧਨੀ ॥
नामु हमारै निहचल धनी ॥
हरि-नाम ही हमारा निश्चल मालिक है और

ਨਾਮ ਕੀ ਮਹਿਮਾ ਸਭ ਮਹਿ ਬਨੀ ॥
नाम की महिमा सभ महि बनी ॥
नाम की महिमा सब में बनी हुई है।

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਪੂਰਾ ਸਾਹੁ ॥
नामु हमारै पूरा साहु ॥
नाम ही हमारे लिए पूर्ण शाह है और

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਬੇਪਰਵਾਹੁ ॥੨॥
नामु हमारै बेपरवाहु ॥२॥
नाम ही हमारे लिए बेपरवाह है॥२॥

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਭੋਜਨ ਭਾਉ ॥
नामु हमारै भोजन भाउ ॥
हरि-नाम ही हमारा प्रेम एवं भोजन है और

ਨਾਮੁ ਹਮਾਰੈ ਮਨ ਕਾ ਸੁਆਉ ॥
नामु हमारै मन का सुआउ ॥
हरि-नाम हमारे मन की कामनाओं को पूरा करता है।

ਨਾਮੁ ਨ ਵਿਸਰੈ ਸੰਤ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
नामु न विसरै संत प्रसादि ॥
संत की कृपा से हरिनाम कदापि विस्मृत नहीं होता और

ਨਾਮੁ ਲੈਤ ਅਨਹਦ ਪੂਰੇ ਨਾਦ ॥੩॥
नामु लैत अनहद पूरे नाद ॥३॥
नाम जपने से पूर्ण अनाहत ध्वनि श्रवण का आनंद मिलता है।॥३॥

ਪ੍ਰਭ ਕਿਰਪਾ ਤੇ ਨਾਮੁ ਨਉ ਨਿਧਿ ਪਾਈ ॥
प्रभ किरपा ते नामु नउ निधि पाई ॥
प्रभु-कृपा से नाम रूपी नवनिधि उपलब्ध हुई है और

ਗੁਰ ਕਿਰਪਾ ਤੇ ਨਾਮ ਸਿਉ ਬਨਿ ਆਈ ॥
गुर किरपा ते नाम सिउ बनि आई ॥
गुरु की कृपा से नाम से ही प्रेम बना हुआ है।

ਧਨਵੰਤੇ ਸੇਈ ਪਰਧਾਨ ॥ ਨਾਨਕ ਜਾ ਕੈ ਨਾਮੁ ਨਿਧਾਨ ॥੪॥੧੭॥੩੦॥
धनवंते सेई परधान ॥ नानक जा कै नामु निधान ॥४॥१७॥३०॥
जिसके पास हरि-नाम रूपी भण्डार है, वास्तव में वही धनवान एवं प्रधान है॥४॥ १७॥ ३०॥

ਭੈਰਉ ਮਹਲਾ ੫ ॥
भैरउ महला ५ ॥
भैरउ महला ५॥

ਤੂ ਮੇਰਾ ਪਿਤਾ ਤੂਹੈ ਮੇਰਾ ਮਾਤਾ ॥
तू मेरा पिता तूहै मेरा माता ॥
हे ईश्वर ! तू ही मेरा माता-पिता है,

ਤੂ ਮੇਰੇ ਜੀਅ ਪ੍ਰਾਨ ਸੁਖਦਾਤਾ ॥
तू मेरे जीअ प्रान सुखदाता ॥
तू ही मेरी आत्मा व प्राणों को सुख देने वाला है।

ਤੂ ਮੇਰਾ ਠਾਕੁਰੁ ਹਉ ਦਾਸੁ ਤੇਰਾ ॥
तू मेरा ठाकुरु हउ दासु तेरा ॥
तू मेरा मालिक है एवं मैं तेरा दास हूँ,

ਤੁਝ ਬਿਨੁ ਅਵਰੁ ਨਹੀ ਕੋ ਮੇਰਾ ॥੧॥
तुझ बिनु अवरु नही को मेरा ॥१॥
तेरे अलावा मेरा कोई नहीं है॥१॥

ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਕਰਹੁ ਪ੍ਰਭ ਦਾਤਿ ॥
करि किरपा करहु प्रभ दाति ॥
हे प्रभु ! कृपा कर यह देन प्रदान करो कि

ਤੁਮ੍ਹ੍ਹਰੀ ਉਸਤਤਿ ਕਰਉ ਦਿਨ ਰਾਤਿ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
तुम्हरी उसतति करउ दिन राति ॥१॥ रहाउ ॥
दिन-रात मैं तेरी प्रशंसा करता रहूँ॥१॥ रहाउ॥

ਹਮ ਤੇਰੇ ਜੰਤ ਤੂ ਬਜਾਵਨਹਾਰਾ ॥
हम तेरे जंत तू बजावनहारा ॥
हम तेरे यंत्र हैं और तू बजाने वाला है।

ਹਮ ਤੇਰੇ ਭਿਖਾਰੀ ਦਾਨੁ ਦੇਹਿ ਦਾਤਾਰਾ ॥
हम तेरे भिखारी दानु देहि दातारा ॥
हम तेरें भिखारी मात्र हैं और तू ही देने वाला दाता है।

ਤਉ ਪਰਸਾਦਿ ਰੰਗ ਰਸ ਮਾਣੇ ॥
तउ परसादि रंग रस माणे ॥
तेरी कृपा से सब खुशियाँ मना रहे हैं और

ਘਟ ਘਟ ਅੰਤਰਿ ਤੁਮਹਿ ਸਮਾਣੇ ॥੨॥
घट घट अंतरि तुमहि समाणे ॥२॥
घट-घट में तू ही व्याप्त है॥२॥

ਤੁਮ੍ਹ੍ਹਰੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੇ ਜਪੀਐ ਨਾਉ ॥
तुम्हरी क्रिपा ते जपीऐ नाउ ॥
तेरी कृपा से ही नाम का जाप होता है और

ਸਾਧਸੰਗਿ ਤੁਮਰੇ ਗੁਣ ਗਾਉ ॥
साधसंगि तुमरे गुण गाउ ॥
साधु पुरुषों के संग तेरे ही गुण गाते हैं।

ਤੁਮ੍ਹ੍ਹਰੀ ਦਇਆ ਤੇ ਹੋਇ ਦਰਦ ਬਿਨਾਸੁ ॥
तुम्हरी दइआ ते होइ दरद बिनासु ॥
तेरी दया से दुख-दर्द नष्ट हो जाते हैं,

ਤੁਮਰੀ ਮਇਆ ਤੇ ਕਮਲ ਬਿਗਾਸੁ ॥੩॥
तुमरी मइआ ते कमल बिगासु ॥३॥
तेरी अनुकंपा से हृदय-कमल खिल जाता है।॥३॥

ਹਉ ਬਲਿਹਾਰਿ ਜਾਉ ਗੁਰਦੇਵ ॥
हउ बलिहारि जाउ गुरदेव ॥
हे गुरुदेव ! मैं तुझ पर कुर्बान जाता हूँ,

ਸਫਲ ਦਰਸਨੁ ਜਾ ਕੀ ਨਿਰਮਲ ਸੇਵ ॥
सफल दरसनु जा की निरमल सेव ॥
तेरे दर्शन फलदायक हैं और तेरी सेवा अति निर्मल है।

ਦਇਆ ਕਰਹੁ ਠਾਕੁਰ ਪ੍ਰਭ ਮੇਰੇ ॥
दइआ करहु ठाकुर प्रभ मेरे ॥
नानक की विनती है कि हे मेरे प्रभु ! मुझ पर दया करो

ਗੁਣ ਗਾਵੈ ਨਾਨਕੁ ਨਿਤ ਤੇਰੇ ॥੪॥੧੮॥੩੧॥
गुण गावै नानकु नित तेरे ॥४॥१८॥३१॥
ताकि नित्य तेरा गुणगान करता रहूँ॥४॥ १८॥ ३१॥

ਭੈਰਉ ਮਹਲਾ ੫ ॥
भैरउ महला ५ ॥
भैरउ महला ५॥

ਸਭ ਤੇ ਊਚ ਜਾ ਕਾ ਦਰਬਾਰੁ ॥
सभ ते ऊच जा का दरबारु ॥
जिसका दरबार सबसे ऊँचा है,

ਸਦਾ ਸਦਾ ਤਾ ਕਉ ਜੋਹਾਰੁ ॥
सदा सदा ता कउ जोहारु ॥
उस ऑकार को सदैव अभिवन्दन है।                                                                                        

ਊਚੇ ਤੇ ਊਚਾ ਜਾ ਕਾ ਥਾਨ ॥
ऊचे ते ऊचा जा का थान ॥
जिसका स्थान सर्वोपरि है,

ਕੋਟਿ ਅਘਾ ਮਿਟਹਿ ਹਰਿ ਨਾਮ ॥੧॥
कोटि अघा मिटहि हरि नाम ॥१॥
उस हरि-नाम के जाप से करोड़ों पाप-अपराध मिट जाते हैं।॥१॥

ਤਿਸੁ ਸਰਣਾਈ ਸਦਾ ਸੁਖੁ ਹੋਇ ॥
तिसु सरणाई सदा सुखु होइ ॥
उसकी शरण में आने से सदा सुख प्राप्त होता है,

ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਜਾ ਕਉ ਮੇਲੈ ਸੋਇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
करि किरपा जा कउ मेलै सोइ ॥१॥ रहाउ ॥
जिस पर कृपा कर देता है, उसे अपने साथ मिला लेता है॥१॥ रहाउ॥

ਜਾ ਕੇ ਕਰਤਬ ਲਖੇ ਨ ਜਾਹਿ ॥
जा के करतब लखे न जाहि ॥
जिसके कौतुक दिखाई नहीं देते,

ਜਾ ਕਾ ਭਰਵਾਸਾ ਸਭ ਘਟ ਮਾਹਿ ॥
जा का भरवासा सभ घट माहि ॥
सब लोगों की जिस पर अटूट आस्था है,

ਪ੍ਰਗਟ ਭਇਆ ਸਾਧੂ ਕੈ ਸੰਗਿ ॥
प्रगट भइआ साधू कै संगि ॥
वह साधु पुरुषों की संगत में रहने से प्रगट होता है।

ਭਗਤ ਅਰਾਧਹਿ ਅਨਦਿਨੁ ਰੰਗਿ ॥੨॥
भगत अराधहि अनदिनु रंगि ॥२॥
भक्तगण निष्ठापूर्वक दिन-रात उसकी आराधना करते रहते हैं। २॥

ਦੇਦੇ ਤੋਟਿ ਨਹੀ ਭੰਡਾਰ ॥
देदे तोटि नही भंडार ॥
वह जितना भी देता है, उसके भण्डार में कोई कमी नहीं आती।

ਖਿਨ ਮਹਿ ਥਾਪਿ ਉਥਾਪਨਹਾਰ ॥
खिन महि थापि उथापनहार ॥
वह पल में बनाने-बिगाड़ने वाला है।

ਜਾ ਕਾ ਹੁਕਮੁ ਨ ਮੇਟੈ ਕੋਇ ॥
जा का हुकमु न मेटै कोइ ॥
जिसका हुक्म कोई भी नहीं टाल सकता,

ਸਿਰਿ ਪਾਤਿਸਾਹਾ ਸਾਚਾ ਸੋਇ ॥੩॥
सिरि पातिसाहा साचा सोइ ॥३॥
वह सच्चा परमेश्वर समूची सृष्टि का बादशाह है॥३॥

ਜਿਸ ਕੀ ਓਟ ਤਿਸੈ ਕੀ ਆਸਾ ॥
जिस की ओट तिसै की आसा ॥
जिसका अवलम्ब सब प्राप्त करते हैं, उसी की हमें आशा है।

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