ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਸੀਤਲੁ ਹੂਆ ॥
जिसु नामु रिदै सो सीतलु हूआ ॥
जिसके हृदय में हरि का नाम है, उसे ही शीतल शान्ति प्राप्त होती है।
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਧ੍ਰਿਗੁ ਜੀਵਣੁ ਮੂਆ ॥੨॥
नाम बिना ध्रिगु जीवणु मूआ ॥२॥
हरिनामोपासना के बिना जीना धिक्कार है॥२॥
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਜੀਵਨ ਮੁਕਤਾ ॥
जिसु नामु रिदै सो जीवन मुकता ॥
जिस दिल में प्रभु-नाम अवस्थित है, वही जीवन्मुक्त होता है।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਸਭ ਹੀ ਜੁਗਤਾ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु सभ ही जुगता ॥
जिसके हृदय में हरि-नाम है, उसके पास सब युक्तियां हैं।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਨਿ ਨਉ ਨਿਧਿ ਪਾਈ ॥
जिसु नामु रिदै तिनि नउ निधि पाई ॥
नौ-निधियाँ उसे ही प्राप्त होती हैं, जिसके हृदय में राम नाम है।
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਭ੍ਰਮਿ ਆਵੈ ਜਾਈ ॥੩॥
नाम बिना भ्रमि आवै जाई ॥३॥
प्रभु-नाम के बिना भ्रम में पड़कर आवागमन बना रहता हैI॥३॥
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਵੇਪਰਵਾਹਾ ॥
जिसु नामु रिदै सो वेपरवाहा ॥
जिसके हृदय में हरि-नाम है, उसे कोई परवाह नहीं होती।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਸਦ ਹੀ ਲਾਹਾ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु सद ही लाहा ॥
हृदय में नाम बसाने वाला सदा लाभ पाता है।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਵਡ ਪਰਵਾਰਾ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु वड परवारा ॥
जिसके हृदय में नाम विराजता है, उसका परिवार सुख-समृद्धि पाता है।
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਮਨਮੁਖ ਗਾਵਾਰਾ ॥੪॥
नाम बिना मनमुख गावारा ॥४॥
प्रभु-नाम के बिना मनुष्य मनमुखी गंवार माना जाता है।॥४॥
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਨਿਹਚਲ ਆਸਨੁ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु निहचल आसनु ॥
जिसके हृदय में राम नाम है, उसका आसन अटल है,
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਤਖਤਿ ਨਿਵਾਸਨੁ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु तखति निवासनु ॥
जिसके हृदय में प्रभु का नाम है, वही राजसिंहासन पर सुशोभित होता है।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਸਾਚਾ ਸਾਹੁ ॥
जिसु नामु रिदै सो साचा साहु ॥
वही सच्चा साहूकार है, जिसके हृदय में परमात्मा का नाम है।
ਨਾਮਹੀਣ ਨਾਹੀ ਪਤਿ ਵੇਸਾਹੁ ॥੫॥
नामहीण नाही पति वेसाहु ॥५॥
नामविहीन व्यक्ति की कोई इज्जत नहीं और उस पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता॥५॥
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਸਭ ਮਹਿ ਜਾਤਾ ॥
जिसु नामु रिदै सो सभ महि जाता ॥
जिसके हृदय में प्रभु का नाम है, वह सब में प्रसिद्ध हो जाता है और
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਪੁਰਖੁ ਬਿਧਾਤਾ ॥
जिसु नामु रिदै सो पुरखु बिधाता ॥
वही परमपुरुष विधाता रूप है।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਸਭ ਤੇ ਊਚਾ ॥
जिसु नामु रिदै सो सभ ते ऊचा ॥
जिसके हृदय में हरि-नाम है, वही सबसे ऊँचा होता है,
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਭ੍ਰਮਿ ਜੋਨੀ ਮੂਚਾ ॥੬॥
नाम बिना भ्रमि जोनी मूचा ॥६॥
परन्तु नाम से विहीन रहकर प्राणी योनि-चक्र में भटकता रहता है॥ ६॥
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਪ੍ਰਗਟਿ ਪਹਾਰਾ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु प्रगटि पहारा ॥
जिसके हृदय में परमात्मा का नाम है, उसे संसार में व्याप्त प्रभु ही दृष्टिगत होता है और
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਤਿਸੁ ਮਿਟਿਆ ਅੰਧਾਰਾ ॥
जिसु नामु रिदै तिसु मिटिआ अंधारा ॥
उसका अज्ञान का अंधेरा मिट जाता है।
ਜਿਸੁ ਨਾਮੁ ਰਿਦੈ ਸੋ ਪੁਰਖੁ ਪਰਵਾਣੁ ॥
जिसु नामु रिदै सो पुरखु परवाणु ॥
जिसके हृदय में नाम है, वही पुरुष स्वीकार होता है और
ਨਾਮ ਬਿਨਾ ਫਿਰਿ ਆਵਣ ਜਾਣੁ ॥੭॥
नाम बिना फिरि आवण जाणु ॥७॥
हरि-नाम के बिना पुनः आवागमन में पड़ा रहता है।॥७॥
ਤਿਨਿ ਨਾਮੁ ਪਾਇਆ ਜਿਸੁ ਭਇਓ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ॥
तिनि नामु पाइआ जिसु भइओ क्रिपाल ॥
प्रभु-नाम वही पाता है, जिस पर कृपालु होता है,
ਸਾਧਸੰਗਤਿ ਮਹਿ ਲਖੇ ਗੋੁਪਾਲ ॥
साधसंगति महि लखे गोपाल ॥
वह साधु पुरुषों की संगत में भगवान के दर्शन करता है।
ਆਵਣ ਜਾਣ ਰਹੇ ਸੁਖੁ ਪਾਇਆ ॥
आवण जाण रहे सुखु पाइआ ॥
उसका आवागमन निवृत हो जाता है और तमाम सुख प्राप्त करता है।
ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਤਤੈ ਤਤੁ ਮਿਲਾਇਆ ॥੮॥੧॥੪॥
कहु नानक ततै ततु मिलाइआ ॥८॥१॥४॥
हे नानक ! यूं आत्म-तत्व परम-तत्व में ही विलीन हो जाता है॥ ८॥ १॥४॥
ਭੈਰਉ ਮਹਲਾ ੫ ॥
भैरउ महला ५ ॥
भैरउ महला ५॥
ਕੋਟਿ ਬਿਸਨ ਕੀਨੇ ਅਵਤਾਰ ॥
कोटि बिसन कीने अवतार ॥
जिस परमात्मा ने करोड़ों विष्णु अवतार उत्पन्न किए,
ਕੋਟਿ ਬ੍ਰਹਮੰਡ ਜਾ ਕੇ ਧ੍ਰਮਸਾਲ ॥
कोटि ब्रहमंड जा के ध्रमसाल ॥
धर्म का आचरण करने के लिए करोड़ों ब्रह्माण्ड बनाए,
ਕੋਟਿ ਮਹੇਸ ਉਪਾਇ ਸਮਾਏ ॥
कोटि महेस उपाइ समाए ॥
करोड़ों शिवशंकर उत्पन्न कर उन्हें स्वयं में विलीन कर लिया और
ਕੋਟਿ ਬ੍ਰਹਮੇ ਜਗੁ ਸਾਜਣ ਲਾਏ ॥੧॥
कोटि ब्रहमे जगु साजण लाए ॥१॥
करोड़ों ही ब्रह्मा जगत को बनाने के लिए लगाए हुए हैं।॥१॥
ਐਸੋ ਧਣੀ ਗੁਵਿੰਦੁ ਹਮਾਰਾ ॥
ऐसो धणी गुविंदु हमारा ॥
हमारा मालिक परमेश्वर ऐसा है कि
ਬਰਨਿ ਨ ਸਾਕਉ ਗੁਣ ਬਿਸਥਾਰਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
बरनि न साकउ गुण बिसथारा ॥१॥ रहाउ ॥
उसके गुणों का विस्तार मैं व्यक्त नहीं कर सकता॥१॥ रहाउ॥
ਕੋਟਿ ਮਾਇਆ ਜਾ ਕੈ ਸੇਵਕਾਇ ॥
कोटि माइआ जा कै सेवकाइ ॥
हरदम प्रभु की सेवा में तल्लीन माया भी करोड़ों हैं,
ਕੋਟਿ ਜੀਅ ਜਾ ਕੀ ਸਿਹਜਾਇ ॥
कोटि जीअ जा की सिहजाइ ॥
वह करोड़ों जीवों में रमण कर रहा है,
ਕੋਟਿ ਉਪਾਰਜਨਾ ਤੇਰੈ ਅੰਗਿ ॥
कोटि उपारजना तेरै अंगि ॥
हे स्वामी ! ऐसी सृष्टियाँ भी करोड़ों हैं, जो तेरे अंगों में तल्लीन हैं,
ਕੋਟਿ ਭਗਤ ਬਸਤ ਹਰਿ ਸੰਗਿ ॥੨॥
कोटि भगत बसत हरि संगि ॥२॥
करोड़ों भक्त उस परमात्मा के संग बसते हैं।॥२॥
ਕੋਟਿ ਛਤ੍ਰਪਤਿ ਕਰਤ ਨਮਸਕਾਰ ॥
कोटि छत्रपति करत नमसकार ॥
करोड़ों छत्रपति तेरी वंदना करते हैं,
ਕੋਟਿ ਇੰਦ੍ਰ ਠਾਢੇ ਹੈ ਦੁਆਰ ॥
कोटि इंद्र ठाढे है दुआर ॥
करोड़ों इन्द्र तेरे द्वार पर हाथ जोड़कर खड़े हैं,
ਕੋਟਿ ਬੈਕੁੰਠ ਜਾ ਕੀ ਦ੍ਰਿਸਟੀ ਮਾਹਿ ॥
कोटि बैकुंठ जा की द्रिसटी माहि ॥
करोड़ों वैकुण्ठ जिसकी दृष्टि में हैं,
ਕੋਟਿ ਨਾਮ ਜਾ ਕੀ ਕੀਮਤਿ ਨਾਹਿ ॥੩॥
कोटि नाम जा की कीमति नाहि ॥३॥
करोड़ों ही उसके नाम हैं, जिनकी महिमा अमूल्य है॥३॥
ਕੋਟਿ ਪੂਰੀਅਤ ਹੈ ਜਾ ਕੈ ਨਾਦ ॥
कोटि पूरीअत है जा कै नाद ॥
जिसके करोड़ों नाद गूंजते रहते हैं,
ਕੋਟਿ ਅਖਾਰੇ ਚਲਿਤ ਬਿਸਮਾਦ ॥
कोटि अखारे चलित बिसमाद ॥
जिसकी विस्मयपूर्ण करोड़ों कर्मभूमियाँ एवं लीलाएँ हैं।
ਕੋਟਿ ਸਕਤਿ ਸਿਵ ਆਗਿਆਕਾਰ ॥
कोटि सकति सिव आगिआकार ॥
करोड़ों शिव-शक्तियाँ उसकी आज्ञा का पालन करती हैं,
ਕੋਟਿ ਜੀਅ ਦੇਵੈ ਆਧਾਰ ॥੪॥
कोटि जीअ देवै आधार ॥४॥
वह सर्वशक्तिमान करोड़ों जीवों को आसरा दे रहा है॥४॥
ਕੋਟਿ ਤੀਰਥ ਜਾ ਕੇ ਚਰਨ ਮਝਾਰ ॥
कोटि तीरथ जा के चरन मझार ॥
करोड़ों तीर्थ जिसके चरणों में तल्लीन हैं,
ਕੋਟਿ ਪਵਿਤ੍ਰ ਜਪਤ ਨਾਮ ਚਾਰ ॥
कोटि पवित्र जपत नाम चार ॥
करोड़ों लोग जिसका पावन नाम जपते हैं,
ਕੋਟਿ ਪੂਜਾਰੀ ਕਰਤੇ ਪੂਜਾ ॥
कोटि पूजारी करते पूजा ॥
करोड़ों पुजारी उसकी पूजा-अर्चना करते हैं,
ਕੋਟਿ ਬਿਸਥਾਰਨੁ ਅਵਰੁ ਨ ਦੂਜਾ ॥੫॥
कोटि बिसथारनु अवरु न दूजा ॥५॥
करोड़ों ही विस्तार उस परमात्मा के हैं, अन्य कोई नहीं॥५॥
ਕੋਟਿ ਮਹਿਮਾ ਜਾ ਕੀ ਨਿਰਮਲ ਹੰਸ ॥
कोटि महिमा जा की निरमल हंस ॥
करोड़ों पुण्यात्माएँ निरंकार की महिमा गा रही हैं।
ਕੋਟਿ ਉਸਤਤਿ ਜਾ ਕੀ ਕਰਤ ਬ੍ਰਹਮੰਸ ॥
कोटि उसतति जा की करत ब्रहमंस ॥
ब्रह्म के अंश करोड़ों ही उसकी स्तुति करते हैं।
ਕੋਟਿ ਪਰਲਉ ਓਪਤਿ ਨਿਮਖ ਮਾਹਿ ॥
कोटि परलउ ओपति निमख माहि ॥
वह अखिलेश्वर पल में करोड़ों प्रलय अथवा उत्पतियाँ करने में सर्वशक्तिमान है।
ਕੋਟਿ ਗੁਣਾ ਤੇਰੇ ਗਣੇ ਨ ਜਾਹਿ ॥੬॥
कोटि गुणा तेरे गणे न जाहि ॥६॥
हे परमात्मा ! तेरे करोड़ों गुणों को गिना नहीं जा सकता॥६॥
ਕੋਟਿ ਗਿਆਨੀ ਕਥਹਿ ਗਿਆਨੁ ॥
कोटि गिआनी कथहि गिआनु ॥
करोड़ों ज्ञानवान ज्ञान-चर्चा करते हैं,
ਕੋਟਿ ਧਿਆਨੀ ਧਰਤ ਧਿਆਨੁ ॥
कोटि धिआनी धरत धिआनु ॥
करोड़ों ध्यानशील उसके ध्यान में लीन होते हैं,
ਕੋਟਿ ਤਪੀਸਰ ਤਪ ਹੀ ਕਰਤੇ ॥
कोटि तपीसर तप ही करते ॥
उसे पाने की उमंग में करोड़ों तपस्वी उसकी तपस्या करते हैं और