ਪੇਖਿ ਦਰਸਨੁ ਨਾਨਕ ਬਿਗਸੇ ਆਪਿ ਲਏ ਮਿਲਾਏ ॥੪॥੫॥੮॥
पेखि दरसनु नानक बिगसे आपि लए मिलाए ॥४॥५॥८॥
हे नानक ! उसके दर्शन करके मैं प्रसन्न हो गया हूँ और वह स्वयं ही जीवों को अपने साथ मिला लेता है।॥४॥५॥८॥
ਸੂਹੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
सूही महला ५ ॥
सूही महला ५ ॥
ਅਬਿਚਲ ਨਗਰੁ ਗੋਬਿੰਦ ਗੁਰੂ ਕਾ ਨਾਮੁ ਜਪਤ ਸੁਖੁ ਪਾਇਆ ਰਾਮ ॥
अबिचल नगरु गोबिंद गुरू का नामु जपत सुखु पाइआ राम ॥
गुरु परमेश्वर की यह पावन नगरी निश्चल है और यहाँ पर नाम जप कर सुख उपलब्ध होता है।
ਮਨ ਇਛੇ ਸੇਈ ਫਲ ਪਾਏ ਕਰਤੈ ਆਪਿ ਵਸਾਇਆ ਰਾਮ ॥
मन इछे सेई फल पाए करतै आपि वसाइआ राम ॥
परमेश्वर ने स्वयं इसे बसाया है और यहाँ पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
ਕਰਤੈ ਆਪਿ ਵਸਾਇਆ ਸਰਬ ਸੁਖ ਪਾਇਆ ਪੁਤ ਭਾਈ ਸਿਖ ਬਿਗਾਸੇ ॥
करतै आपि वसाइआ सरब सुख पाइआ पुत भाई सिख बिगासे ॥
ईश्वर ने स्वयं नगरी को बसाया है, यहाँ पर सर्व सुख फल प्राप्त होते हैं और पुत्र, भाई एवं शिष्य सभी प्रसन्न रहते हैं।
ਗੁਣ ਗਾਵਹਿ ਪੂਰਨ ਪਰਮੇਸੁਰ ਕਾਰਜੁ ਆਇਆ ਰਾਸੇ ॥
गुण गावहि पूरन परमेसुर कारजु आइआ रासे ॥
पूर्ण परमेश्वर के गुण गाने से सारे कार्य सम्पूर्ण हो गए हैं।
ਪ੍ਰਭੁ ਆਪਿ ਸੁਆਮੀ ਆਪੇ ਰਖਾ ਆਪਿ ਪਿਤਾ ਆਪਿ ਮਾਇਆ ॥
प्रभु आपि सुआमी आपे रखा आपि पिता आपि माइआ ॥
प्रभु स्वयं सबका स्वामी है, स्वयं सबका रखवाला और स्वयं सबका माता-पिता है।
ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਸਤਿਗੁਰ ਬਲਿਹਾਰੀ ਜਿਨਿ ਏਹੁ ਥਾਨੁ ਸੁਹਾਇਆ ॥੧॥
कहु नानक सतिगुर बलिहारी जिनि एहु थानु सुहाइआ ॥१॥
हे नानक ! मैं सतिगुरु पर बलिहारी जाता हूँ, जिसने यह स्थान सुन्दर बना दिया है।॥ १॥
ਘਰ ਮੰਦਰ ਹਟਨਾਲੇ ਸੋਹੇ ਜਿਸੁ ਵਿਚਿ ਨਾਮੁ ਨਿਵਾਸੀ ਰਾਮ ॥
घर मंदर हटनाले सोहे जिसु विचि नामु निवासी राम ॥
जिसके हृदय में नाम का निवास हो गया है, उसकी दुकानों सहित घर एवं मन्दिर सुन्दर बन गए हैं।
ਸੰਤ ਭਗਤ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਅਰਾਧਹਿ ਕਟੀਐ ਜਮ ਕੀ ਫਾਸੀ ਰਾਮ ॥
संत भगत हरि नामु अराधहि कटीऐ जम की फासी राम ॥
संत एवं भक्त सभी हरि नाम की आराधना करते रहते हैं और उनकी यम की फांसी कट गई है।
ਕਾਟੀ ਜਮ ਫਾਸੀ ਪ੍ਰਭਿ ਅਬਿਨਾਸੀ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਿਆਏ ॥
काटी जम फासी प्रभि अबिनासी हरि हरि नामु धिआए ॥
जो हरि नाम का ध्यान करते रहते हैं, अविनाशी प्रभु ने उनकी यम की फांसी काट दी है।
ਸਗਲ ਸਮਗ੍ਰੀ ਪੂਰਨ ਹੋਈ ਮਨ ਇਛੇ ਫਲ ਪਾਏ ॥
सगल समग्री पूरन होई मन इछे फल पाए ॥
प्रभु-भक्ति के लिए सारी सामग्री पूरी हो गई है और उन्होंने मनोवांछित फल पा लिया है।
ਸੰਤ ਸਜਨ ਸੁਖਿ ਮਾਣਹਿ ਰਲੀਆ ਦੂਖ ਦਰਦ ਭ੍ਰਮ ਨਾਸੀ ॥
संत सजन सुखि माणहि रलीआ दूख दरद भ्रम नासी ॥
सज्जन संत सुख में आनंद मना रहे हैं और उनके दुख-दर्द एवं भ्रम सब नाश हो गए हैं।
ਸਬਦਿ ਸਵਾਰੇ ਸਤਿਗੁਰਿ ਪੂਰੈ ਨਾਨਕ ਸਦ ਬਲਿ ਜਾਸੀ ॥੨॥
सबदि सवारे सतिगुरि पूरै नानक सद बलि जासी ॥२॥
हे नानक ! पूर्ण सतगुरु ने शब्द द्वारा उनका जीव सुन्दर बना दिया है और मैं सदैव उस पर बलिहारी जाता हूँ॥ २ ॥
ਦਾਤਿ ਖਸਮ ਕੀ ਪੂਰੀ ਹੋਈ ਨਿਤ ਨਿਤ ਚੜੈ ਸਵਾਈ ਰਾਮ ॥
दाति खसम की पूरी होई नित नित चड़ै सवाई राम ॥
मालिक-प्रभु की देन पूरी हुई है और यह नेित्य बढ़ती रहती है।
ਪਾਰਬ੍ਰਹਮਿ ਖਸਮਾਨਾ ਕੀਆ ਜਿਸ ਦੀ ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਰਾਮ ॥
पारब्रहमि खसमाना कीआ जिस दी वडी वडिआई राम ॥
जिस परमात्मा की बड़ाई बहुत बड़ी है, उसने मुझे अपना बना लिया है।
ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਭਗਤਨ ਕਾ ਰਾਖਾ ਸੋ ਪ੍ਰਭੁ ਭਇਆ ਦਇਆਲਾ ॥
आदि जुगादि भगतन का राखा सो प्रभु भइआ दइआला ॥
सो वह प्रभु मुझ पर दयालु हो गया है, जो युग-युगांतर से अपने भक्तों का रखवाला बना हुआ है।
ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਸੁਖੀ ਵਸਾਏ ਪ੍ਰਭਿ ਆਪੇ ਕਰਿ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲਾ ॥
जीअ जंत सभि सुखी वसाए प्रभि आपे करि प्रतिपाला ॥
उसने सभी जीव-जंतु सुखी वसा दिए हैं, वह प्रभु स्वयं सबका पालन-पोषण करता है।
ਦਹ ਦਿਸ ਪੂਰਿ ਰਹਿਆ ਜਸੁ ਸੁਆਮੀ ਕੀਮਤਿ ਕਹਣੁ ਨ ਜਾਈ ॥
दह दिस पूरि रहिआ जसु सुआमी कीमति कहणु न जाई ॥
दसों दिशाओं में स्वामी का यश फैला हुआ है और इसकी महत्ता के लिए शब्द उपलब्ध नहीं।
ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਸਤਿਗੁਰ ਬਲਿਹਾਰੀ ਜਿਨਿ ਅਬਿਚਲ ਨੀਵ ਰਖਾਈ ॥੩॥
कहु नानक सतिगुर बलिहारी जिनि अबिचल नीव रखाई ॥३॥
हे नानक ! मैं सतगुरु पर बलिहारी जाता हूँ, जिसने (अमृतसर) नगर की अटल नींव रखवाई है॥ ३॥
ਗਿਆਨ ਧਿਆਨ ਪੂਰਨ ਪਰਮੇਸੁਰ ਹਰਿ ਹਰਿ ਕਥਾ ਨਿਤ ਸੁਣੀਐ ਰਾਮ ॥
गिआन धिआन पूरन परमेसुर हरि हरि कथा नित सुणीऐ राम ॥
यहाँ पर संत एवं भक्त पूर्ण परमेश्वर के ज्ञान एवं ध्यान की चर्चा करते रहते हैं और नित्य हरि कथा सुनते रहते हैं
ਅਨਹਦ ਚੋਜ ਭਗਤ ਭਵ ਭੰਜਨ ਅਨਹਦ ਵਾਜੇ ਧੁਨੀਐ ਰਾਮ ॥
अनहद चोज भगत भव भंजन अनहद वाजे धुनीऐ राम ॥
भक्तों के जन्म-मरण के चक्कर नाश करने वाले परमात्मा के चोज-तमाशों और महिमा की एक-रस प्रबल ध्वनि उठती रहती है।
ਅਨਹਦ ਝੁਣਕਾਰੇ ਤਤੁ ਬੀਚਾਰੇ ਸੰਤ ਗੋਸਟਿ ਨਿਤ ਹੋਵੈ ॥
अनहद झुणकारे ततु बीचारे संत गोसटि नित होवै ॥
उनके मन में अनहद शब्द की झंकार होती रहती हैं। वहीं नित्य संतों की ज्ञान-गोष्ठी होती है और परमतत्व का विचार होता रहता है।
ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਅਰਾਧਹਿ ਮੈਲੁ ਸਭ ਕਾਟਹਿ ਕਿਲਵਿਖ ਸਗਲੇ ਖੋਵੈ ॥
हरि नामु अराधहि मैलु सभ काटहि किलविख सगले खोवै ॥
वह हरिनाम की आराधना करके अपनी अहंकार रूपी मैल दूर करते हैं और सब पापों को दूर कर देते हैं।
ਤਹ ਜਨਮ ਨ ਮਰਣਾ ਆਵਣ ਜਾਣਾ ਬਹੁੜਿ ਨ ਪਾਈਐ ਜੋੁਨੀਐ ॥
तह जनम न मरणा आवण जाणा बहुड़ि न पाईऐ जोनीऐ ॥
इस तरह उनका न जन्म होता है, न मरण होता है, अपितु आवागमन समाप्त हो जाता है और इस तरह वे दोबारा योनियों में भी नहीं पड़ते।
ਨਾਨਕ ਗੁਰੁ ਪਰਮੇਸਰੁ ਪਾਇਆ ਜਿਸੁ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਇਛ ਪੁਨੀਐ ॥੪॥੬॥੯॥
नानक गुरु परमेसरु पाइआ जिसु प्रसादि इछ पुनीऐ ॥४॥६॥९॥
हे नानक ! उन्होंने गुरु-परमेश्वर को पा लिया है, जिसकी कृपा से सब मनोकामनाएँ पूरी हो गई हैं।॥ ४॥ ६॥ ६॥
ਸੂਹੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
सूही महला ५ ॥
सूही महला ५ ॥
ਸੰਤਾ ਕੇ ਕਾਰਜਿ ਆਪਿ ਖਲੋਇਆ ਹਰਿ ਕੰਮੁ ਕਰਾਵਣਿ ਆਇਆ ਰਾਮ ॥
संता के कारजि आपि खलोइआ हरि कमु करावणि आइआ राम ॥
संतों के शुभ-कार्य में ईश्वर स्वयं सहायक हुआ है, यह कार्य सम्पन्न करवाने के लिए वह स्वयं आया है।
ਧਰਤਿ ਸੁਹਾਵੀ ਤਾਲੁ ਸੁਹਾਵਾ ਵਿਚਿ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜਲੁ ਛਾਇਆ ਰਾਮ ॥
धरति सुहावी तालु सुहावा विचि अम्रित जलु छाइआ राम ॥
अब धरती सुहावनी हो गई है एवं पावन सरोवर भी बड़ा सुन्दर लगता है। इस सरोवर में अमृत-जल भर गया है।
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜਲੁ ਛਾਇਆ ਪੂਰਨ ਸਾਜੁ ਕਰਾਇਆ ਸਗਲ ਮਨੋਰਥ ਪੂਰੇ ॥
अम्रित जलु छाइआ पूरन साजु कराइआ सगल मनोरथ पूरे ॥
परमात्मा की कृपा से इसमें अमृत-जल भर गया है, उसने स्वयं समूचा कार्य सम्पन्न कर दिया है, इस प्रकार संतों के सारे मनोरथ पूरे हो गए हैं।
ਜੈ ਜੈ ਕਾਰੁ ਭਇਆ ਜਗ ਅੰਤਰਿ ਲਾਥੇ ਸਗਲ ਵਿਸੂਰੇ ॥
जै जै कारु भइआ जग अंतरि लाथे सगल विसूरे ॥
सारे जगत् में (प्रभु की) जय-जयकार हो रही है और संतों की सब चिन्ताएँ मिट गई हैं।
ਪੂਰਨ ਪੁਰਖ ਅਚੁਤ ਅਬਿਨਾਸੀ ਜਸੁ ਵੇਦ ਪੁਰਾਣੀ ਗਾਇਆ ॥
पूरन पुरख अचुत अबिनासी जसु वेद पुराणी गाइआ ॥
पूर्ण परम पुरुष, अच्युत एवं अविनाशी परमात्मा का यश वेदों एवं पुराणों ने गाया है।
ਅਪਨਾ ਬਿਰਦੁ ਰਖਿਆ ਪਰਮੇਸਰਿ ਨਾਨਕ ਨਾਮੁ ਧਿਆਇਆ ॥੧॥
अपना बिरदु रखिआ परमेसरि नानक नामु धिआइआ ॥१॥
हे नानक ! जब भी संतों ने नाम का ध्यान किया है तो परमेश्वर ने अपने विरद् का पालन किया है।॥ १॥
ਨਵ ਨਿਧਿ ਸਿਧਿ ਰਿਧਿ ਦੀਨੇ ਕਰਤੇ ਤੋਟਿ ਨ ਆਵੈ ਕਾਈ ਰਾਮ ॥
नव निधि सिधि रिधि दीने करते तोटि न आवै काई राम ॥
रचनहार ईश्वर ने हमें नौ निधियाँ एवं ऋद्धियाँ-सिद्धियाँ प्रदान कर दी हैं और अब किसी वस्तु की कोई कमी नहीं आती।