ਮਿਸਲ ਫਕੀਰਾਂ ਗਾਖੜੀ ਸੁ ਪਾਈਐ ਪੂਰ ਕਰੰਮਿ ॥੧੧੧॥
मिसल फकीरां गाखड़ी सु पाईऐ पूर करमि ॥१११॥
फकीरों का रहन-सहन बहुत कठिन है, यह ऊँचे भाग्य से ही प्राप्त होता है।॥१११॥
Therefore, we should get up early and remember God because the lifestyle of a saint is very difficult to follow and is achieved only by good fortune, and good deeds. ||111||
ਪਹਿਲੈ ਪਹਰੈ ਫੁਲੜਾ ਫਲੁ ਭੀ ਪਛਾ ਰਾਤਿ ॥
पहिलै पहरै फुलड़ा फलु भी पछा राति ॥
रात्रिकाल के प्रथम प्रहर की ईश-वन्दना एक फूल की तरह है तथा पिछली रात्रि अर्थात् भोर समय की वन्दना फल समान है।
Remembrance of God in the first quarter of the night is like a beautiful flower, but remembering Him during the last hours of the night (or the early morning hours) is its fruit.
ਜੋ ਜਾਗੰਨੑਿ ਲਹੰਨਿ ਸੇ ਸਾਈ ਕੰਨੋ ਦਾਤਿ ॥੧੧੨॥
जो जागंन्हि लहंनि से साई कंनो दाति ॥११२॥
जो प्रभातकाल जागकर वन्दना करते हैं, उनको ही परमात्मा से कृपा रूपी फल प्राप्त होता है।॥११२॥
However, only those who wake up in these hours to remember Naam receive the benefaction from the Master. ||112||
ਦਾਤੀ ਸਾਹਿਬ ਸੰਦੀਆ ਕਿਆ ਚਲੈ ਤਿਸੁ ਨਾਲਿ ॥
दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥
सम्पूर्ण नियामतें मालिक की हैं, किसी का कोई अख्तयार नहीं है कि दाता उसे भी अवश्य दे।
All bounties belong to God, and no one can force Him to bestow them.
ਇਕਿ ਜਾਗੰਦੇ ਨਾ ਲਹਨੑਿ ਇਕਨੑਾ ਸੁਤਿਆ ਦੇਇ ਉਠਾਲਿ ॥੧੧੩॥
इकि जागंदे ना लहन्हि इकन्हा सुतिआ देइ उठालि ॥११३॥
कुछ जागकर भी उसकी नियामत को पा नहीं सकते और किसी सोए हुए को वह जगाकर भी दे देता है।॥११३॥
In spite of waking up early, some may not receive anything because of their ego, while He may Himself awaken the other fortunate ones from sleep to bless them with the bounty of Naam. ||113||
ਢੂਢੇਦੀਏ ਸੁਹਾਗ ਕੂ ਤਉ ਤਨਿ ਕਾਈ ਕੋਰ ॥
ढूढेदीए सुहाग कू तउ तनि काई कोर ॥
हे जीव स्त्री ! तू अपने सुहाग (प्रभु) को ढूंढ रही है (यदि नहीं मिला) तो तुझ में ही कोई कमी है।
O’ mortal in search of Master-God, it seems that there is some deficiency in you because even though you wake up early to worship Him with devotion, still cannot find Him.
ਜਿਨੑਾ ਨਾਉ ਸੁਹਾਗਣੀ ਤਿਨੑਾ ਝਾਕ ਨ ਹੋਰ ॥੧੧੪॥
जिन्हा नाउ सुहागणी तिन्हा झाक न होर ॥११४॥
जिनका नाम सुहागिन है, उनको किसी अन्य की चाह नहीं ॥११४॥
Those fortunate ones remember God, and do not look to another. ||114||
ਸਬਰ ਮੰਝ ਕਮਾਣ ਏ ਸਬਰੁ ਕਾ ਨੀਹਣੋ ॥
सबर मंझ कमाण ए सबरु का नीहणो ॥
अन्तर्मन में यदि सहनशीलता की कमान हो और सहनशीलता का ही चिल्ला हो और
If a person has the bow of patience in his mind, the string of which is also of patience,
ਸਬਰ ਸੰਦਾ ਬਾਣੁ ਖਾਲਕੁ ਖਤਾ ਨ ਕਰੀ ॥੧੧੫॥
सबर संदा बाणु खालकु खता न करी ॥११५॥
तीर भी सहनशीलता का ही हो तो फिर ईश्वर इस तीर का निशाना चूकने नहीं देता ॥११५ ॥
and he aims with the arrow of patience, then the Creator doesn’t let him miss the target. ||115||
ਸਬਰ ਅੰਦਰਿ ਸਾਬਰੀ ਤਨੁ ਏਵੈ ਜਾਲੇਨੑਿ ॥
सबर अंदरि साबरी तनु एवै जालेन्हि ॥
सहनशील व्यक्ति सहनशीलता में रहकर कठिन साधना द्वारा शरीर को जला देते हैं।
The true patient devotees of God keep remembering Him with patience, and let their bodies suffer in patience and bear patiently all the rigors of contemplation,
ਹੋਨਿ ਨਜੀਕਿ ਖੁਦਾਇ ਦੈ ਭੇਤੁ ਨ ਕਿਸੈ ਦੇਨਿ ॥੧੧੬॥
होनि नजीकि खुदाइ दै भेतु न किसै देनि ॥११६॥
वे खुदा के निकट हो जाते हैं और यह भेद किसी को नहीं देते ॥११६ ॥
this way, they keep getting close to God, but they don’t reveal this secret to anybody or boast about their success. ||116||
ਸਬਰੁ ਏਹੁ ਸੁਆਉ ਜੇ ਤੂੰ ਬੰਦਾ ਦਿੜੁ ਕਰਹਿ ॥
सबरु एहु सुआउ जे तूं बंदा दिड़ु करहि ॥
सहनशीलता ही जीवन का मनोरथ है, हे मनुष्य ! यदि तू इसे पक्का कर ले तो
O’ man, let patience be the purpose of your life, implant it within your mind,
ਵਧਿ ਥੀਵਹਿ ਦਰੀਆਉ ਟੁਟਿ ਨ ਥੀਵਹਿ ਵਾਹੜਾ ॥੧੧੭॥
वधि थीवहि दरीआउ टुटि न थीवहि वाहड़ा ॥११७॥
बढ़कर दरिया बन जाओगे और फिर टूट कर छोटा-सा नाला नहीं बन पाओगे ॥११७ ॥
and with that you would prosper like a wide river, and wouldn’t shrink to a tiny stream i.e. if you keep remembering Naam patiently, then you would love everybody in the world. ||117||
ਫਰੀਦਾ ਦਰਵੇਸੀ ਗਾਖੜੀ ਚੋਪੜੀ ਪਰੀਤਿ ॥
फरीदा दरवेसी गाखड़ी चोपड़ी परीति ॥
बाबा फरीद कहते हैं- फकीरी करना बहुत कठिन है, परन्तु तेरी यह प्रीति दिखावा-मात्र है।
O’ Farid, the life of patience is the true sainthood which is very difficult, but just the same your love for God is superficial.
ਇਕਨਿ ਕਿਨੈ ਚਾਲੀਐ ਦਰਵੇਸਾਵੀ ਰੀਤਿ ॥੧੧੮॥
इकनि किनै चालीऐ दरवेसावी रीति ॥११८॥
इस फकीरी राह पर तो कोई विरला ही चल पाता है॥११८ ॥
It is only a rare few persons who are able to follow the life routine of saints. ||118||
ਤਨੁ ਤਪੈ ਤਨੂਰ ਜਿਉ ਬਾਲਣੁ ਹਡ ਬਲੰਨੑਿ ॥
तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड बलंन्हि ॥
मेरा शरीर तंदूर की तरह तप जाए, बेशक हड़ियाँ लकड़ियों की तरह जल जाएँ।
Even if my body heats up like an oven, my bones burn like firewood,
ਪੈਰੀ ਥਕਾਂ ਸਿਰਿ ਜੁਲਾਂ ਜੇ ਮੂੰ ਪਿਰੀ ਮਿਲੰਨੑਿ ॥੧੧੯॥
पैरी थकां सिरि जुलां जे मूं पिरी मिलंन्हि ॥११९॥
पैरों से चलकर अगर थक भी जाऊँ तो सिर के बल पर चल पडूं। यदि मुझे मालिक मिल जाए (तो सब कष्ट सहने को तैयार हूँ) ॥११६ ॥
and my feet become so tired that I may have to walk on my head, I am ready to tolerate these miseries if I can realize my beloved Master. ||119||
ਤਨੁ ਨ ਤਪਾਇ ਤਨੂਰ ਜਿਉ ਬਾਲਣੁ ਹਡ ਨ ਬਾਲਿ ॥
तनु न तपाइ तनूर जिउ बालणु हड न बालि ॥
हे फरीद ! शरीर को तंदूर की तरह गर्म मत कर और न ही हड़ियों को लकड़ियों की तरह जला।
You do not need to heat up your body like an oven, and burn your bones like firewood.
ਸਿਰਿ ਪੈਰੀ ਕਿਆ ਫੇੜਿਆ ਅੰਦਰਿ ਪਿਰੀ ਨਿਹਾਲਿ ॥੧੨੦॥
सिरि पैरी किआ फेड़िआ अंदरि पिरी निहालि ॥१२०॥
सिर और पैरों ने तेरा क्या बिगाड़ा है (इनको क्यों दुखी कर रहा है) अन्तर्मन में ही मालिक को देख ॥१२० ॥
Your head and feet have not done any wrong, so do not put them through such ordeals, and visualize the Beloved God within yourself. ||120||
ਹਉ ਢੂਢੇਦੀ ਸਜਣਾ ਸਜਣੁ ਮੈਡੇ ਨਾਲਿ ॥
हउ ढूढेदी सजणा सजणु मैडे नालि ॥
“(जीव-स्त्री कहती है) मैं जिस सज्जन प्रभु को ढूंढ रही हूँ, वह सज्जन तो मेरे साथ (मन में) ही है।
I am going around looking for my well-wisher God, but He is already within me.
ਨਾਨਕ ਅਲਖੁ ਨ ਲਖੀਐ ਗੁਰਮੁਖਿ ਦੇਇ ਦਿਖਾਲਿ ॥੧੨੧॥
नानक अलखु न लखीऐ गुरमुखि देइ दिखालि ॥१२१॥
हे नानक ! उस अदृष्ट प्रभु को देखा नहीं जा सकता, वस्तुतः गुरु ही उसके दर्शन करवाता है ॥१२१ ॥
O’ Nanak, He is imperceptible, we cannot recognize Him on our own, but the Guru’s teachings can help us visualize Him. ||121||
ਹੰਸਾ ਦੇਖਿ ਤਰੰਦਿਆ ਬਗਾ ਆਇਆ ਚਾਉ ॥
हंसा देखि तरंदिआ बगा आइआ चाउ ॥
हंसों (महापुरुषों) को (भवसागर में) तैरते देखकर बगुलों (ढोंगियों) को भी चाव पैदा हुआ,
Seeing the swans swimming in a lake, the cranes also started craving to swim like them,
ਡੁਬਿ ਮੁਏ ਬਗ ਬਪੁੜੇ ਸਿਰੁ ਤਲਿ ਉਪਰਿ ਪਾਉ ॥੧੨੨॥
डुबि मुए बग बपुड़े सिरु तलि उपरि पाउ ॥१२२॥
पर बगुले बेचारे पानी में डूब गए, उनका सिर नीचे और पैर ऊपर हो गए॥१२२ ॥
but the poor cranes tried but were drowned to death with their heads below the water and their feet sticking out above. ||122||
ਮੈ ਜਾਣਿਆ ਵਡ ਹੰਸੁ ਹੈ ਤਾਂ ਮੈ ਕੀਤਾ ਸੰਗੁ ॥
मै जाणिआ वड हंसु है तां मै कीता संगु ॥
मैं समझा था कि यह कोई बड़ा हंस (महापुरुष) है, तो ही मैंने उसकी संगत की।
I thought that it was a great swan, and that is why I joined its company.
ਜੇ ਜਾਣਾ ਬਪੁੜਾ ਜਨਮਿ ਨ ਭੇੜੀ ਅੰਗੁ ॥੧੨੩॥
जे जाणा बगु बपुड़ा जनमि न भेड़ी अंगु ॥१२३॥
ਬਗੁपरन्तु यदि मुझे मालूम हो जाता कि यह तो ढोंगी बगुला है तो कभी भी साथ न करती॥१२३॥
Had I known that it was a wretched crane I would have never let it come close to me during my life. ||123||
ਕਿਆ ਹੰਸੁ ਕਿਆ ਬਗੁਲਾ ਜਾ ਕਉ ਨਦਰਿ ਧਰੇ ॥
किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि धरे ॥
क्या हंस (बड़ा) और क्या बगुला (छोटा), जिस पर ईश्वर की कृपा-दृष्टि हो जाए, वही महान् है।
It doesn’t matter whether it is a swan or a crane, God accepts it as His own when He blesses it with His glance of grace;
ਜੇ ਤਿਸੁ ਭਾਵੈ ਨਾਨਕਾ ਕਾਗਹੁ ਹੰਸੁ ਕਰੇ ॥੧੨੪॥
जे तिसु भावै नानका कागहु हंसु करे ॥१२४॥
गुरु नानक कथन करते हैं कि यदि मालिक की मर्जी हो तो वह काले कौए (बुरे) को भी (भला पुरुष) हंस बना देता है॥१२४ ॥
because O’ Nanak, what to talk about a crane, He changes even a crow into a swan (or a sinner into a saint) if He is pleased. ||124||
ਸਰਵਰ ਪੰਖੀ ਹੇਕੜੋ ਫਾਹੀਵਾਲ ਪਚਾਸ ॥
सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास ॥
जगत रूपी सरोवर में जीव रूपी अकेला ही पक्षी है, जिसे फंसाने वाले (कामादिक) पचास हैं।
The human being is like a lonely bird in the lake of this world, whereas there are fifty evil desires like lust in him, that want to trap him.
ਇਹੁ ਤਨੁ ਲਹਰੀ ਗਡੁ ਥਿਆ ਸਚੇ ਤੇਰੀ ਆਸ ॥੧੨੫॥
इहु तनु लहरी गडु थिआ सचे तेरी आस ॥१२५॥
यह शरीर विकार रूपी लहरों में फंस गया है, इनमें से निकलने के लिए हे प्रभु ! तेरी ही आशा है ॥१२५ ॥
O’ God, this body of mine is caught in these waves of sinful worldly desires, therefore You are my only hope to escape them. ||125||
ਕਵਣੁ ਸੁ ਅਖਰੁ ਕਵਣੁ ਗੁਣੁ ਕਵਣੁ ਸੁ ਮਣੀਆ ਮੰਤੁ ॥
कवणु सु अखरु कवणु गुणु कवणु सु मणीआ मंतु ॥
वह कौन-सा अक्षर (शब्द) है, कौन-सा गुण अथवा कौन-सा मंत्र है।
O’ sister, please tell me what words I may utter, what merits I must acquire, what is that supreme incantation which I may recite,
ਕਵਣੁ ਸੁ ਵੇਸੋ ਹਉ ਕਰੀ ਜਿਤੁ ਵਸਿ ਆਵੈ ਕੰਤੁ ॥੧੨੬॥
कवणु सु वेसो हउ करी जितु वसि आवै कंतु ॥१२६॥
मैं ऐसा कौन-सा वेष धारण करूँ, जिससे मेरा प्रभु मेरे वश में आ जाए॥१२६ ॥
and what kind of dress must I wear to captivate the Master-God. ||126||
ਨਿਵਣੁ ਸੁ ਅਖਰੁ ਖਵਣੁ ਗੁਣੁ ਜਿਹਬਾ ਮਣੀਆ ਮੰਤੁ ॥
निवणु सु अखरु खवणु गुणु जिहबा मणीआ मंतु ॥
उत्तर है- नम्र भाषा अपनाओ, अगर कोई बुरा बोलता है तो क्षमा-भावना का गुण धारण करो, जीभ से मीठा बोलने का मंत्र अपनाओ।
O’ sister, utter every word with humility, acquire the merit of forgiveness, and sweet speech is the supreme incantation.
ਏ ਤ੍ਰੈ ਭੈਣੇ ਵੇਸ ਕਰਿ ਤਾਂ ਵਸਿ ਆਵੀ ਕੰਤੁ ॥੧੨੭॥
ए त्रै भैणे वेस करि तां वसि आवी कंतु ॥१२७॥
हे बहिन ! ये तीन सद्गुण हैं, इनका वेष धारण करो, पति-प्रभु तेरे वश में आ जाएगा ॥१२७॥
If you dress yourself with these three robes of virtue then you will be able to captivate your Master-God. ||127||
ਮਤਿ ਹੋਦੀ ਹੋਇ ਇਆਣਾ ॥
मति होदी होइ इआणा ॥
जो बुद्धिमान होकर भी खुद को नासमझ समझता हो,
A person who behaves like an ignorant person in spite of being wise,
ਤਾਣ ਹੋਦੇ ਹੋਇ ਨਿਤਾਣਾ ॥
ताण होदे होइ निताणा ॥
बलवान होकर भी कमजोर बनकर रहे, (अर्थात् मासूम पर जुल्म न करे)
remains humble in spite of being powerful,
ਅਣਹੋਦੇ ਆਪੁ ਵੰਡਾਏ ॥
अणहोदे आपु वंडाए ॥
जो कुछ भी पास हो, मिल-बांट कर खाता हो, (गरीबों को बांटता हो)
and shares with others even when he has nothing to share i.e. gives his own share to others,
ਕੋ ਐਸਾ ਭਗਤੁ ਸਦਾਏ ॥੧੨੮॥
को ऐसा भगतु सदाए ॥१२८॥
दरअसल ऐसा मनुष्य ही परम भक्त कहलाता है।॥१२८ ॥
should be called a true devotee. ||128||
ਇਕੁ ਫਿਕਾ ਨ ਗਾਲਾਇ ਸਭਨਾ ਮੈ ਸਚਾ ਧਣੀ ॥
इकु फिका न गालाइ सभना मै सचा धणी ॥
सब जीवों में सच्चा मालिक ही मौजूद है, इसलिए किसी को कड़वा या बुरा वचन मत बोलो।
You should not utter even a single harsh word, because the eternal Master resides in all.
ਹਿਆਉ ਨ ਕੈਹੀ ਠਾਹਿ ਮਾਣਕ ਸਭ ਅਮੋਲਵੇ ॥੧੨੯॥
हिआउ न कैही ठाहि माणक सभ अमोलवे ॥१२९॥
किसी का दिल मत दुखाओ, मोती रूपी हर दिल अमूल्य है।॥१२६ ॥
Don’t break anyone’s heart because all human beings are like priceless jewels i.e. creatures of God. ||129||
ਸਭਨਾ ਮਨ ਮਾਣਿਕ ਠਾਹਣੁ ਮੂਲਿ ਮਚਾਂਗਵਾ ॥
सभना मन माणिक ठाहणु मूलि मचांगवा ॥
सबका मन मोती रूप है, इनको दुखी करना अच्छी बात नहीं।
Everyone’s heart is as precious as a jewel, so it is not at all good to hurt anyone’s feelings.
ਜੇ ਤਉ ਪਿਰੀਆ ਦੀ ਸਿਕ ਹਿਆਉ ਨ ਠਾਹੇ ਕਹੀ ਦਾ ॥੧੩੦॥
जे तउ पिरीआ दी सिक हिआउ न ठाहे कही दा ॥१३०॥
यदि तुझे ईश्वर को पाने की आकांक्षा है तो किसी के दिल को दर्द न पहुँचाओ॥१३० ॥
Therefore, if you crave to realize your beloved God, then don’t break anyone’s heart. ||130||