Hindi Page 1312

ਕਾਨੜਾ ਛੰਤ ਮਹਲਾ ੫
कानड़ा छंत महला ५
कानड़ा छंत महला ५

ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

ਸੇ ਉਧਰੇ ਜਿਨ ਰਾਮ ਧਿਆਏ ॥
से उधरे जिन राम धिआए ॥
वही लोग संसार से मुक्त हुए हैं, जिन्होंने परमात्मा का ध्यान किया है।

ਜਤਨ ਮਾਇਆ ਕੇ ਕਾਮਿ ਨ ਆਏ ॥
जतन माइआ के कामि न आए ॥
माया के यत्न किसी काम नहीं आते।

ਰਾਮ ਧਿਆਏ ਸਭਿ ਫਲ ਪਾਏ ਧਨਿ ਧੰਨਿ ਤੇ ਬਡਭਾਗੀਆ ॥
राम धिआए सभि फल पाए धनि धंनि ते बडभागीआ ॥
परमात्मा का चिंतन करने वाले सब फल प्राप्त करते हैं, ऐसे लोग धन्य एवं भाग्यशाली हैं।

ਸਤਸੰਗਿ ਜਾਗੇ ਨਾਮਿ ਲਾਗੇ ਏਕ ਸਿਉ ਲਿਵ ਲਾਗੀਆ ॥
सतसंगि जागे नामि लागे एक सिउ लिव लागीआ ॥
वे सत्संग में सावधान रहकर नाम-कीर्तन में लगे रहते हैं और उनकी एक ईश्वर में ही लगन लगी रहती है।

ਤਜਿ ਮਾਨ ਮੋਹ ਬਿਕਾਰ ਸਾਧੂ ਲਗਿ ਤਰਉ ਤਿਨ ਕੈ ਪਾਏ ॥
तजि मान मोह बिकार साधू लगि तरउ तिन कै पाए ॥
अभिमान, मोह एवं विकारों को छोड़कर साधु पुरुषों के चरणों में लग जाओ और मुक्ति पा लो।

ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਸਰਣਿ ਸੁਆਮੀ ਬਡਭਾਗਿ ਦਰਸਨੁ ਪਾਏ ॥੧॥
बिनवंति नानक सरणि सुआमी बडभागि दरसनु पाए ॥१॥
नानक विनती करते हैं कि हे स्वामी ! तेरी शरण में भाग्यशाली ही दर्शन पाते हैं।॥ १॥

ਮਿਲਿ ਸਾਧੂ ਨਿਤ ਭਜਹ ਨਾਰਾਇਣ ॥
मिलि साधू नित भजह नाराइण ॥
साधु-पुरुषों के संग मिलकर नित्य परमात्मा का भजन करो,

ਰਸਕਿ ਰਸਕਿ ਸੁਆਮੀ ਗੁਣ ਗਾਇਣ ॥
रसकि रसकि सुआमी गुण गाइण ॥
खूब मजे लेकर आनंदपूर्वक स्वामी का गुणगान करो,

ਗੁਣ ਗਾਇ ਜੀਵਹ ਹਰਿ ਅਮਿਉ ਪੀਵਹ ਜਨਮ ਮਰਣਾ ਭਾਗਏ ॥
गुण गाइ जीवह हरि अमिउ पीवह जनम मरणा भागए ॥
गुणानुवाद करके हरिनाम अमृत पान करके जीवन पाओ, इस तरह जन्म-मरण से मुक्त हो जाओ।

ਸਤਸੰਗਿ ਪਾਈਐ ਹਰਿ ਧਿਆਈਐ ਬਹੁੜਿ ਦੂਖੁ ਨ ਲਾਗਏ ॥
सतसंगि पाईऐ हरि धिआईऐ बहुड़ि दूखु न लागए ॥
सत्संग में रहकर परमात्मा का मनन करने से पुनः कोई दुख नहीं लगता।

ਕਰਿ ਦਇਆ ਦਾਤੇ ਪੁਰਖ ਬਿਧਾਤੇ ਸੰਤ ਸੇਵ ਕਮਾਇਣ ॥
करि दइआ दाते पुरख बिधाते संत सेव कमाइण ॥
हे दाता, परमपुरुष विधाता ! दया करो और संतों की सेवा में तल्लीन रखो।

ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਜਨ ਧੂਰਿ ਬਾਂਛਹਿ ਹਰਿ ਦਰਸਿ ਸਹਜਿ ਸਮਾਇਣ ॥੨॥
बिनवंति नानक जन धूरि बांछहि हरि दरसि सहजि समाइण ॥२॥
नानक विनती करते हैं कि हे प्रभु ! हम तो केवल भक्तजनों की चरण-धूल ही चाहते हैं और तेरे दर्शनों से सहजावस्था में लीन होते हैं॥ २॥

ਸਗਲੇ ਜੰਤ ਭਜਹੁ ਗੋਪਾਲੈ ॥
सगले जंत भजहु गोपालै ॥
सब जीव भगवान का भजन करते हैं,

ਜਪ ਤਪ ਸੰਜਮ ਪੂਰਨ ਘਾਲੈ ॥
जप तप संजम पूरन घालै ॥
इसी से जप, तपस्या, संयम इत्यादि सब कर्म पूरे हो जाते हैं।

ਨਿਤ ਭਜਹੁ ਸੁਆਮੀ ਅੰਤਰਜਾਮੀ ਸਫਲ ਜਨਮੁ ਸਬਾਇਆ ॥
नित भजहु सुआमी अंतरजामी सफल जनमु सबाइआ ॥
अतः नित्य अन्तर्यामी स्वामी का भजन करो, इसी से जन्म सफल होता है।

ਗੋਬਿਦੁ ਗਾਈਐ ਨਿਤ ਧਿਆਈਐ ਪਰਵਾਣੁ ਸੋਈ ਆਇਆ ॥
गोबिदु गाईऐ नित धिआईऐ परवाणु सोई आइआ ॥
जो ईश्वर का गुणानुवाद करते हैं, नित्य उसी के चिंतन में लीन रहते हैं, ऐसे लोगों का जन्म सफल हो जाता है।

ਜਪ ਤਾਪ ਸੰਜਮ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਿਰੰਜਨ ਗੋਬਿੰਦ ਧਨੁ ਸੰਗਿ ਚਾਲੈ ॥
जप ताप संजम हरि हरि निरंजन गोबिंद धनु संगि चालै ॥
मायातीत परमेश्वर ही जप, तप एवं संयम है और प्रभु-नाम धन ही साथ चलता है।

ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਕਰਿ ਦਇਆ ਦੀਜੈ ਹਰਿ ਰਤਨੁ ਬਾਧਉ ਪਾਲੈ ॥੩॥
बिनवंति नानक करि दइआ दीजै हरि रतनु बाधउ पालै ॥३॥
नानक विनती करते हैं कि हे प्रभु ! दया पूर्वक नाम रत्न साथ बांध दो॥ ३॥

ਮੰਗਲਚਾਰ ਚੋਜ ਆਨੰਦਾ ॥
मंगलचार चोज आनंदा ॥
खुशी के गीत गाए जा रहे हैं,

ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਮਿਲੇ ਪਰਮਾਨੰਦਾ ॥
करि किरपा मिले परमानंदा ॥
आनंद कौतुक हो गया है, कृपा करके परमानंद प्रभु मिल गया है।

ਪ੍ਰਭ ਮਿਲੇ ਸੁਆਮੀ ਸੁਖਹਗਾਮੀ ਇਛ ਮਨ ਕੀ ਪੁੰਨੀਆ ॥
प्रभ मिले सुआमी सुखहगामी इछ मन की पुंनीआ ॥
सुख देने वाला प्रभु मिल गया है, मन की कामना पूरी हो गई है।

ਬਜੀ ਬਧਾਈ ਸਹਜੇ ਸਮਾਈ ਬਹੁੜਿ ਦੂਖਿ ਨ ਰੁੰਨੀਆ ॥
बजी बधाई सहजे समाई बहुड़ि दूखि न रुंनीआ ॥
अब खुशियाँ ही खुशियाँ छा गई हैं, स्वाभाविक सुख मिला है और पुन: कोई दुख नहीं लगता।

ਲੇ ਕੰਠਿ ਲਾਏ ਸੁਖ ਦਿਖਾਏ ਬਿਕਾਰ ਬਿਨਸੇ ਮੰਦਾ ॥
ले कंठि लाए सुख दिखाए बिकार बिनसे मंदा ॥
जब गले लगाकर मिलता है तो सुख ही प्राप्त होता है और पाप विकार सब बुराइयों दूर हो जाती हैं।

ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਮਿਲੇ ਸੁਆਮੀ ਪੁਰਖ ਪਰਮਾਨੰਦਾ ॥੪॥੧॥
बिनवंति नानक मिले सुआमी पुरख परमानंदा ॥४॥१॥
नानक विनय करते हैं कि मुझे परमानंद स्वामी मिल गया है।॥ ४॥ १॥

ਕਾਨੜੇ ਕੀ ਵਾਰ ਮਹਲਾ ੪ ਮੂਸੇ ਕੀ ਵਾਰ ਕੀ ਧੁਨੀ
कानड़े की वार महला ४ मूसे की वार की धुनी
कानड़े की वार महला ४ मूसे की वार की धुनी

ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि

ਸਲੋਕ ਮਃ ੪ ॥
सलोक मः ४ ॥
श्लोक महला ४॥

ਰਾਮ ਨਾਮੁ ਨਿਧਾਨੁ ਹਰਿ ਗੁਰਮਤਿ ਰਖੁ ਉਰ ਧਾਰਿ ॥
राम नामु निधानु हरि गुरमति रखु उर धारि ॥
परमात्मा का नाम सुखों का घर है, गुरु के उपदेशानुसार इसे हृदय में बसाकर रखो।

ਦਾਸਨ ਦਾਸਾ ਹੋਇ ਰਹੁ ਹਉਮੈ ਬਿਖਿਆ ਮਾਰਿ ॥
दासन दासा होइ रहु हउमै बिखिआ मारि ॥
जो अहम् एवं विषय-विकारों को मारकर दासों का दास बनकर रहता है,

ਜਨਮੁ ਪਦਾਰਥੁ ਜੀਤਿਆ ਕਦੇ ਨ ਆਵੈ ਹਾਰਿ ॥
जनमु पदारथु जीतिआ कदे न आवै हारि ॥
वह जन्म जीत लेता है और कभी पराजित नहीं होता।

ਧਨੁ ਧਨੁ ਵਡਭਾਗੀ ਨਾਨਕਾ ਜਿਨ ਗੁਰਮਤਿ ਹਰਿ ਰਸੁ ਸਾਰਿ ॥੧॥
धनु धनु वडभागी नानका जिन गुरमति हरि रसु सारि ॥१॥
हे नानक ! जो गुरु की शिक्षानुसार परमात्मा का मनन करते हैं, वे भाग्यशाली हैं।॥ १॥

ਮਃ ੪ ॥
मः ४ ॥
महला ४॥

ਗੋਵਿੰਦੁ ਗੋਵਿਦੁ ਗੋਵਿਦੁ ਹਰਿ ਗੋਵਿਦੁ ਗੁਣੀ ਨਿਧਾਨੁ ॥
गोविंदु गोविदु गोविदु हरि गोविदु गुणी निधानु ॥
ईश्वर जगत का पालक है, गुणों का भण्डार है, उसी की महिमा गाओ।

ਗੋਵਿਦੁ ਗੋਵਿਦੁ ਗੁਰਮਤਿ ਧਿਆਈਐ ਤਾਂ ਦਰਗਹ ਪਾਈਐ ਮਾਨੁ ॥
गोविदु गोविदु गुरमति धिआईऐ तां दरगह पाईऐ मानु ॥
गुरु के उपदेश से ईश्वर का भजन करो, तो ही दरबार में सम्मान प्राप्त होता है।

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