ਮਹਲਾ ੨ ॥
महला २ ॥
महला २॥
ਜੇ ਸਉ ਚੰਦਾ ਉਗਵਹਿ ਸੂਰਜ ਚੜਹਿ ਹਜਾਰ ॥
जे सउ चंदा उगवहि सूरज चड़हि हजार ॥
यदि सौ चन्द्रमा उदित हो जाएँ और हजारों ही सूर्य का उजाला हो जाए तो भी
ਏਤੇ ਚਾਨਣ ਹੋਦਿਆਂ ਗੁਰ ਬਿਨੁ ਘੋਰ ਅੰਧਾਰ ॥੨॥
एते चानण होदिआं गुर बिनु घोर अंधार ॥२॥
संसार में इतना प्रकाश होते हुए भी गुरु के बिना घोर अंधकार ही होगा ॥ २॥
ਮਃ ੧ ॥
मः १ ॥
महला १॥
ਨਾਨਕ ਗੁਰੂ ਨ ਚੇਤਨੀ ਮਨਿ ਆਪਣੈ ਸੁਚੇਤ ॥
नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥
हे नानक ! जो मनुष्य अपने गुरु को याद नहीं करते और अपने मन में चतुर होने का दावा करते हैं,
ਛੁਟੇ ਤਿਲ ਬੂਆੜ ਜਿਉ ਸੁੰਞੇ ਅੰਦਰਿ ਖੇਤ ॥
छुटे तिल बूआड़ जिउ सुंञे अंदरि खेत ॥
वे निरर्थक तिलों की भाँति व्यर्थ समझकर सूने खेतों में, फेंक दिए जाते हैं।
ਖੇਤੈ ਅੰਦਰਿ ਛੁਟਿਆ ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਸਉ ਨਾਹ ॥
खेतै अंदरि छुटिआ कहु नानक सउ नाह ॥
गुरु नानक कहते हैं कि वे निरर्थक तिल खेत में छोड़ दिए जाते हैं और उनके सौ स्वामी बन जाते हैं।
ਫਲੀਅਹਿ ਫੁਲੀਅਹਿ ਬਪੁੜੇ ਭੀ ਤਨ ਵਿਚਿ ਸੁਆਹ ॥੩॥
फलीअहि फुलीअहि बपुड़े भी तन विचि सुआह ॥३॥
वे बेचारे फलते-फूलते हैं परन्तु फिर भी उनके तन में राख ही होती है।॥ ३॥
ਪਉੜੀ ॥
पउड़ी ॥
पउड़ी॥
ਆਪੀਨੑੈ ਆਪੁ ਸਾਜਿਓ ਆਪੀਨੑੈ ਰਚਿਓ ਨਾਉ ॥
आपीन्है आपु साजिओ आपीन्है रचिओ नाउ ॥
भगवान स्वयंभू है, उसने स्वयं ही अपने आपको बनाया तथा स्वयं ही उसने अपना नाम रचा है।
ਦੁਯੀ ਕੁਦਰਤਿ ਸਾਜੀਐ ਕਰਿ ਆਸਣੁ ਡਿਠੋ ਚਾਉ ॥
दुयी कुदरति साजीऐ करि आसणु डिठो चाउ ॥
दूसरा उसने कुदरत की रचना की और इसमें आसन करके वह चाव से अपना जगत प्रसार देखता है।
ਦਾਤਾ ਕਰਤਾ ਆਪਿ ਤੂੰ ਤੁਸਿ ਦੇਵਹਿ ਕਰਹਿ ਪਸਾਉ ॥
दाता करता आपि तूं तुसि देवहि करहि पसाउ ॥
हे भगवान ! तू स्वयं ही दाता एवं जग का रचयिता है, तू प्रसन्न होकर जीवों को देन देता है एवं अपनी कुदरत का प्रसार करता है।
ਤੂੰ ਜਾਣੋਈ ਸਭਸੈ ਦੇ ਲੈਸਹਿ ਜਿੰਦੁ ਕਵਾਉ ॥
तूं जाणोई सभसै दे लैसहि जिंदु कवाउ ॥
हे प्रभु ! तू सबको जानने वाला है, अपनी रज़ा में ही तू जीवों को प्राण देता एवं प्राण लेता है।
ਕਰਿ ਆਸਣੁ ਡਿਠੋ ਚਾਉ ॥੧॥
करि आसणु डिठो चाउ ॥१॥
अपनी कुदरत का कौतुक तू उसी में आसन करके चाव से देख रहा है॥ १॥
ਸਲੋਕੁ ਮਃ ੧ ॥
सलोकु मः १ ॥
श्लोक महला १॥
ਸਚੇ ਤੇਰੇ ਖੰਡ ਸਚੇ ਬ੍ਰਹਮੰਡ ॥
सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥
हे प्रभु ! तेरी रचना के समस्त खंड-ब्रह्माण्ड सत्य हैं।
ਸਚੇ ਤੇਰੇ ਲੋਅ ਸਚੇ ਆਕਾਰ ॥
सचे तेरे लोअ सचे आकार ॥
तेरी रचना के चौदह लोक सत्य हैं और तेरी कुदरत के आकार (सूर्य, चन्द्रमा, तारे) भी सत्य हैं।
ਸਚੇ ਤੇਰੇ ਕਰਣੇ ਸਰਬ ਬੀਚਾਰ ॥
सचे तेरे करणे सरब बीचार ॥
तेरे समस्त कार्य एवं सर्व विचार सत्य हैं।
ਸਚਾ ਤੇਰਾ ਅਮਰੁ ਸਚਾ ਦੀਬਾਣੁ ॥
सचा तेरा अमरु सचा दीबाणु ॥
तेरा हुक्म और तेरा दरबार सत्य है।
ਸਚਾ ਤੇਰਾ ਹੁਕਮੁ ਸਚਾ ਫੁਰਮਾਣੁ ॥
सचा तेरा हुकमु सचा फुरमाणु ॥
तेरा आदेश और तेरा फुरमान सत्य है।
ਸਚਾ ਤੇਰਾ ਕਰਮੁ ਸਚਾ ਨੀਸਾਣੁ ॥
सचा तेरा करमु सचा नीसाणु ॥
हे प्रभु ! तेरा करम सत्य है और नाम रूपी परवाना भी सत्य है।
ਸਚੇ ਤੁਧੁ ਆਖਹਿ ਲਖ ਕਰੋੜਿ ॥
सचे तुधु आखहि लख करोड़ि ॥
लाखों-करोड़ों ही तुझे सत्य कहते हैं।
ਸਚੈ ਸਭਿ ਤਾਣਿ ਸਚੈ ਸਭਿ ਜੋਰਿ ॥
सचै सभि ताणि सचै सभि जोरि ॥
सत्य (प्रभु) में ही समस्त बल एवं समस्त शक्ति है।
ਸਚੀ ਤੇਰੀ ਸਿਫਤਿ ਸਚੀ ਸਾਲਾਹ ॥
सची तेरी सिफति सची सालाह ॥
तेरी महिमा और तेरी शोभा सत्य है।
ਸਚੀ ਤੇਰੀ ਕੁਦਰਤਿ ਸਚੇ ਪਾਤਿਸਾਹ ॥
सची तेरी कुदरति सचे पातिसाह ॥
हे सच्चे पातशाह ! तेरी यह कुदरत सत्य है।
ਨਾਨਕ ਸਚੁ ਧਿਆਇਨਿ ਸਚੁ ॥
नानक सचु धिआइनि सचु ॥
हे नानक ! जो परम सत्य प्रभु का ध्यान करते हैं, वे भी सत्य हैं।
ਜੋ ਮਰਿ ਜੰਮੇ ਸੁ ਕਚੁ ਨਿਕਚੁ ॥੧॥
जो मरि जमे सु कचु निकचु ॥१॥
लेकिन जो जीव जन्मते और मरते रहते हैं वे बिल्कुल कच्चे हैं।॥ १॥
ਮਃ ੧ ॥
मः १ ॥
महला १॥
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾ ਵਡਾ ਨਾਉ ॥
वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥
उस परमात्मा की महिमा बहुत बड़ी है, जिसका नाम सारे विश्व में बहुत बड़ा है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾ ਸਚੁ ਨਿਆਉ ॥
वडी वडिआई जा सचु निआउ ॥
भगवान की उपमा बहुत बड़ी है, जिसका न्याय सत्य है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾ ਨਿਹਚਲ ਥਾਉ ॥
वडी वडिआई जा निहचल थाउ ॥
उस मालिक की बड़ाई इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि उसका आसन अटल है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾਣੈ ਆਲਾਉ ॥
वडी वडिआई जाणै आलाउ ॥
उसकी महानता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वह अपने भक्तों की बात को जानता है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਬੁਝੈ ਸਭਿ ਭਾਉ ॥
वडी वडिआई बुझै सभि भाउ ॥
प्रभु का बड़प्पन इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वह समस्त लोगों की प्रेम-भावना बूझ लेता है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾ ਪੁਛਿ ਨ ਦਾਤਿ ॥
वडी वडिआई जा पुछि न दाति ॥
प्रभु की प्रशंसा बहुत बड़ी है क्योंकि वह किसी से परामर्श किए बिना अपनी देन प्रदान करता है।
ਵਡੀ ਵਡਿਆਈ ਜਾ ਆਪੇ ਆਪਿ ॥
वडी वडिआई जा आपे आपि ॥
उसकी बड़ाई इसलिए भी बड़ी है क्योंकि सब कुछ वह आप ही है।
ਨਾਨਕ ਕਾਰ ਨ ਕਥਨੀ ਜਾਇ ॥
नानक कार न कथनी जाइ ॥
हे नानक ! उस प्रभु के कार्यों की व्याख्या नहीं की जा सकती।
ਕੀਤਾ ਕਰਣਾ ਸਰਬ ਰਜਾਇ ॥੨॥
कीता करणा सरब रजाइ ॥२॥
जो कुछ परमात्मा ने किया है, कर रहा है अथवा जो कुछ करेगा सब उसकी अपनी रज़ा है॥ २॥
ਮਹਲਾ ੨ ॥
महला २ ॥
महला २॥
ਇਹੁ ਜਗੁ ਸਚੈ ਕੀ ਹੈ ਕੋਠੜੀ ਸਚੇ ਕਾ ਵਿਚਿ ਵਾਸੁ ॥
इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु ॥
यह जगत सच्चे प्रभु का घर है और उस परम सत्य का ही इसमें निवास है।
ਇਕਨੑਾ ਹੁਕਮਿ ਸਮਾਇ ਲਏ ਇਕਨੑਾ ਹੁਕਮੇ ਕਰੇ ਵਿਣਾਸੁ ॥
इकन्हा हुकमि समाइ लए इकन्हा हुकमे करे विणासु ॥
कुछ जीवों को वह अपने हुक्म द्वारा स्वयं में लीन कर लेता है और कई जीवों का अपने हुक्म द्वारा नाश कर देता है।
ਇਕਨੑਾ ਭਾਣੈ ਕਢਿ ਲਏ ਇਕਨੑਾ ਮਾਇਆ ਵਿਚਿ ਨਿਵਾਸੁ ॥
इकन्हा भाणै कढि लए इकन्हा माइआ विचि निवासु ॥
अपनी रज़ा से कुछ जीवों को वह माया से बाहर निकाल लेता है और कुछ लोगों का माया के जंजाल में निवास कर देता है।
ਏਵ ਭਿ ਆਖਿ ਨ ਜਾਪਈ ਜਿ ਕਿਸੈ ਆਣੇ ਰਾਸਿ ॥
एव भि आखि न जापई जि किसै आणे रासि ॥
यह भी कहा नहीं जा सकता कि वह किसे संवार देगा।
ਨਾਨਕ ਗੁਰਮੁਖਿ ਜਾਣੀਐ ਜਾ ਕਉ ਆਪਿ ਕਰੇ ਪਰਗਾਸੁ ॥੩॥
नानक गुरमुखि जाणीऐ जा कउ आपि करे परगासु ॥३॥
हे नानक ! यह भेद गुरु द्वारा ही जाना जाता है, जिसे परमात्मा खुद ज्ञान का प्रकाश करता है॥ ३॥
ਪਉੜੀ ॥
पउड़ी ॥
पउड़ी ॥
ਨਾਨਕ ਜੀਅ ਉਪਾਇ ਕੈ ਲਿਖਿ ਨਾਵੈ ਧਰਮੁ ਬਹਾਲਿਆ ॥
नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥
हे नानक ! ईश्वर ने जीवों को उत्पन्न करके उनको कर्मो का लेखा-जोखा करने के लिए धर्मराज को नियुक्त किया है।
ਓਥੈ ਸਚੇ ਹੀ ਸਚਿ ਨਿਬੜੈ ਚੁਣਿ ਵਖਿ ਕਢੇ ਜਜਮਾਲਿਆ ॥
ओथै सचे ही सचि निबड़ै चुणि वखि कढे जजमालिआ ॥
वहाँ धर्मराज के समक्ष सत्यानुसार ही निर्णय होता है और दुष्ट पापियों को चुनकर अलग कर दिया जाता है।
ਥਾਉ ਨ ਪਾਇਨਿ ਕੂੜਿਆਰ ਮੁਹ ਕਾਲ੍ਹ੍ਹੈ ਦੋਜਕਿ ਚਾਲਿਆ ॥
थाउ न पाइनि कूड़िआर मुह काल्है दोजकि चालिआ ॥
झूठों को वहाँ स्थान नहीं मिलता और मुँह काला करके उन्हें नरक में धकेल दिया जाता है।
ਤੇਰੈ ਨਾਇ ਰਤੇ ਸੇ ਜਿਣਿ ਗਏ ਹਾਰਿ ਗਏ ਸਿ ਠਗਣ ਵਾਲਿਆ ॥
तेरै नाइ रते से जिणि गए हारि गए सि ठगण वालिआ ॥
हे प्रभु ! जो मनुष्य तेरे नाम में अनुरक्त हैं, वे जीत जाते हैं और जो ठग हैं वे हार जाते हैं।
ਲਿਖਿ ਨਾਵੈ ਧਰਮੁ ਬਹਾਲਿਆ ॥੨॥
लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥२॥
प्रभु ने धर्मराज को जीवों के कर्मों का लेखा लिखने हेतु नियुक्त किया है।॥ २॥
ਸਲੋਕ ਮਃ ੧ ॥
सलोक मः १ ॥
श्लोक महला १॥
ਵਿਸਮਾਦੁ ਨਾਦ ਵਿਸਮਾਦੁ ਵੇਦ ॥
विसमादु नाद विसमादु वेद ॥
हे प्रभु ! तेरे पैदा किए हुए नाद एवं तेरे रचे हुए वेद आश्चर्यजनक हैं।
ਵਿਸਮਾਦੁ ਜੀਅ ਵਿਸਮਾਦੁ ਭੇਦ ॥
विसमादु जीअ विसमादु भेद ॥
तेरे पैदा किए हुए जीव एवं जीवों में पैदा किए भेद भी विचित्र हैं।
ਵਿਸਮਾਦੁ ਰੂਪ ਵਿਸਮਾਦੁ ਰੰਗ ॥
विसमादु रूप विसमादु रंग ॥
विभिन्न प्रकार के रूप एवं रंग बड़े अदभुत हैं।
ਵਿਸਮਾਦੁ ਨਾਗੇ ਫਿਰਹਿ ਜੰਤ ॥
विसमादु नागे फिरहि जंत ॥
वे जीव जो नग्न घूमते हैं, सब विस्मयबोधी हैं।