Hindi Page 1036

ਵਰਨ ਭੇਖ ਨਹੀ ਬ੍ਰਹਮਣ ਖਤ੍ਰੀ ॥
वरन भेख नही ब्रहमण खत्री ॥
तब ब्राह्मण-क्षत्रिय इत्यादि वर्ण एवं सम्प्रदाय तक नहीं था,

ਦੇਉ ਨ ਦੇਹੁਰਾ ਗਊ ਗਾਇਤ੍ਰੀ ॥
देउ न देहुरा गऊ गाइत्री ॥
कोई देवता, मन्दिर, गाय एवं गायत्री (मंत्र) का भी अस्तित्व नहीं था,

ਹੋਮ ਜਗ ਨਹੀ ਤੀਰਥਿ ਨਾਵਣੁ ਨਾ ਕੋ ਪੂਜਾ ਲਾਇਦਾ ॥੧੦॥
होम जग नही तीरथि नावणु ना को पूजा लाइदा ॥१०॥
उस समय होम, यज्ञ एवं तीर्थ-स्नान भी नहीं था और न ही कोई पूजा-अर्चना में लीन होता था॥ १०॥

ਨਾ ਕੋ ਮੁਲਾ ਨਾ ਕੋ ਕਾਜੀ ॥
ना को मुला ना को काजी ॥
तब कोई मुल्ला-मौलवी, काजी,

ਨਾ ਕੋ ਸੇਖੁ ਮਸਾਇਕੁ ਹਾਜੀ ॥
ना को सेखु मसाइकु हाजी ॥
शेख अथवा हाजी भी नहीं था।

ਰਈਅਤਿ ਰਾਉ ਨ ਹਉਮੈ ਦੁਨੀਆ ਨਾ ਕੋ ਕਹਣੁ ਕਹਾਇਦਾ ॥੧੧॥
रईअति राउ न हउमै दुनीआ ना को कहणु कहाइदा ॥११॥
राजा-प्रजा, दुनिया का अहंकार, कोई कहने-कहलवाने वाला भी नहीं होता था।॥ ११॥

ਭਾਉ ਨ ਭਗਤੀ ਨਾ ਸਿਵ ਸਕਤੀ ॥
भाउ न भगती ना सिव सकती ॥
आस्था, प्रेम, भक्ति, शिव-शक्ति,

ਸਾਜਨੁ ਮੀਤੁ ਬਿੰਦੁ ਨਹੀ ਰਕਤੀ ॥
साजनु मीतु बिंदु नही रकती ॥
साजन, मित्र, वीर्य-रक्त कुछ भी नहीं था।

ਆਪੇ ਸਾਹੁ ਆਪੇ ਵਣਜਾਰਾ ਸਾਚੇ ਏਹੋ ਭਾਇਦਾ ॥੧੨॥
आपे साहु आपे वणजारा साचे एहो भाइदा ॥१२॥
तब परमात्मा स्वयं ही साहूकार एवं व्यापारी था और सत्यस्वरूप को यही स्वीकार था॥ १२॥

ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਨ ਸਿੰਮ੍ਰਿਤਿ ਸਾਸਤ ॥
बेद कतेब न सिम्रिति सासत ॥
वेद, कुरान, स्मृतियाँ एवं शास्त्र भी नहीं थे;

ਪਾਠ ਪੁਰਾਣ ਉਦੈ ਨਹੀ ਆਸਤ ॥
पाठ पुराण उदै नही आसत ॥
तब न कोई पुराणों का पाठ होता था और न ही सूर्योदय एवं अस्त होता था।

ਕਹਤਾ ਬਕਤਾ ਆਪਿ ਅਗੋਚਰੁ ਆਪੇ ਅਲਖੁ ਲਖਾਇਦਾ ॥੧੩॥
कहता बकता आपि अगोचरु आपे अलखु लखाइदा ॥१३॥
अपहुँच, इन्द्रियातीत निरंकार स्वयं ही कहता-वक्ता था; वह अलख है और स्वयं ही दिखाता है॥ १३॥

ਜਾ ਤਿਸੁ ਭਾਣਾ ਤਾ ਜਗਤੁ ਉਪਾਇਆ ॥
जा तिसु भाणा ता जगतु उपाइआ ॥
जब उसकी मर्जी हुई तो उसने जगत् को उत्पन्न कर दिया;

ਬਾਝੁ ਕਲਾ ਆਡਾਣੁ ਰਹਾਇਆ ॥
बाझु कला आडाणु रहाइआ ॥
उसने बिना शक्ति के सारी रचना को आधार प्रदान किया।

ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਿਸਨੁ ਮਹੇਸੁ ਉਪਾਏ ਮਾਇਆ ਮੋਹੁ ਵਧਾਇਦਾ ॥੧੪॥
ब्रहमा बिसनु महेसु उपाए माइआ मोहु वधाइदा ॥१४॥
उसने ब्रह्मा (उत्पन्न करने वाले), विष्णु (पोषक), महेश (संहारक) इन त्रिदेवों को उत्पन्न करके मोह-माया में वृद्धि कर दी।॥ १४॥

ਵਿਰਲੇ ਕਉ ਗੁਰਿ ਸਬਦੁ ਸੁਣਾਇਆ ॥
विरले कउ गुरि सबदु सुणाइआ ॥
गुरु ने किसी विरले को ही शब्द सुनाया है,

ਕਰਿ ਕਰਿ ਦੇਖੈ ਹੁਕਮੁ ਸਬਾਇਆ ॥
करि करि देखै हुकमु सबाइआ ॥
वह जीवों को पैदा कर करके सबकी देखभाल करता है और उसका हुक्म सब पर चलता है।

ਖੰਡ ਬ੍ਰਹਮੰਡ ਪਾਤਾਲ ਅਰੰਭੇ ਗੁਪਤਹੁ ਪਰਗਟੀ ਆਇਦਾ ॥੧੫॥
खंड ब्रहमंड पाताल अर्मभे गुपतहु परगटी आइदा ॥१५॥
उसने खण्ड, ब्राहाण्ड एवं पाताल को बनाना आरम्भ कर दिया और अपने गुप्त निराकार रूप से साकार रूप में प्रगट हो गया॥ १५॥

ਤਾ ਕਾ ਅੰਤੁ ਨ ਜਾਣੈ ਕੋਈ ॥
ता का अंतु न जाणै कोई ॥
उसका रहस्य कोई भी नहीं जानता और

ਪੂਰੇ ਗੁਰ ਤੇ ਸੋਝੀ ਹੋਈ ॥
पूरे गुर ते सोझी होई ॥
पूर्ण गुरु से ही उसकी सूझ प्राप्त होती है।

ਨਾਨਕ ਸਾਚਿ ਰਤੇ ਬਿਸਮਾਦੀ ਬਿਸਮ ਭਏ ਗੁਣ ਗਾਇਦਾ ॥੧੬॥੩॥੧੫॥
नानक साचि रते बिसमादी बिसम भए गुण गाइदा ॥१६॥३॥१५॥
हे नानक ! जो सत्य में लीन हो गए, वे आश्चर्यजनक लीला को सुनकर चकित हो गए और उन्होंने परमात्मा का ही गुणगान किया॥ १६॥ ३॥ १५॥

ਮਾਰੂ ਮਹਲਾ ੧ ॥
मारू महला १ ॥
मारू महला १॥

ਆਪੇ ਆਪੁ ਉਪਾਇ ਨਿਰਾਲਾ ॥
आपे आपु उपाइ निराला ॥
वह स्वयं ही जग को उत्पन्न करके निर्लिप्त हो गया,

ਸਾਚਾ ਥਾਨੁ ਕੀਓ ਦਇਆਲਾ ॥
साचा थानु कीओ दइआला ॥
उस दीनदयाल ने रहने के लिए जग रूपी सच्चा स्थान बनाया।

ਪਉਣ ਪਾਣੀ ਅਗਨੀ ਕਾ ਬੰਧਨੁ ਕਾਇਆ ਕੋਟੁ ਰਚਾਇਦਾ ॥੧॥
पउण पाणी अगनी का बंधनु काइआ कोटु रचाइदा ॥१॥
फिर पवन, पानी, अग्नि इत्यादि पंच तत्वों का संगठन करके शरीर रूपी किला बना दिया॥ १॥

ਨਉ ਘਰ ਥਾਪੇ ਥਾਪਣਹਾਰੈ ॥
नउ घर थापे थापणहारै ॥
सृजनहार ने शरीर रूपी किले में आंख, कान, मुँह इत्यादि नौ घरों की सृजना की और

ਦਸਵੈ ਵਾਸਾ ਅਲਖ ਅਪਾਰੈ ॥
दसवै वासा अलख अपारै ॥
उस अलख-अपार ने अपना निवास दसम द्वार में कर लिया।

ਸਾਇਰ ਸਪਤ ਭਰੇ ਜਲਿ ਨਿਰਮਲਿ ਗੁਰਮੁਖਿ ਮੈਲੁ ਨ ਲਾਇਦਾ ॥੨॥
साइर सपत भरे जलि निरमलि गुरमुखि मैलु न लाइदा ॥२॥
गुरुमुख के सात सरोवर (पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, मन एवं बुद्धि) नामामृत के पावन जल से भर दिए, जिसे कोई मैल नहीं लगती॥ २॥

ਰਵਿ ਸਸਿ ਦੀਪਕ ਜੋਤਿ ਸਬਾਈ ॥
रवि ससि दीपक जोति सबाई ॥
सूर्य एवं चाँद रूपी दीपक में परमात्मा की ज्योति ही समाई हुई है।

ਆਪੇ ਕਰਿ ਵੇਖੈ ਵਡਿਆਈ ॥
आपे करि वेखै वडिआई ॥
वह स्वयं ही बनाकर अपनी बड़ाई को देखता रहता है।

ਜੋਤਿ ਸਰੂਪ ਸਦਾ ਸੁਖਦਾਤਾ ਸਚੇ ਸੋਭਾ ਪਾਇਦਾ ॥੩॥
जोति सरूप सदा सुखदाता सचे सोभा पाइदा ॥३॥
ज्योति-स्वरूप परमेश्वर सदैव सुख देने वाला है और सत्यशील जीव सत्य में लीन होकर ही शोभा प्राप्त करता है।॥ ३॥

ਗੜ ਮਹਿ ਹਾਟ ਪਟਣ ਵਾਪਾਰਾ ॥
गड़ महि हाट पटण वापारा ॥
शरीर रूपी किले में नगर एवं बाजार हैं, जिसमें नाम का व्यापार होता है।

ਪੂਰੈ ਤੋਲਿ ਤੋਲੈ ਵਣਜਾਰਾ ॥
पूरै तोलि तोलै वणजारा ॥
ईश्वर रूपी व्यापारी पूर्ण तौल से नाम रूपी वस्तु को तौलता है।

ਆਪੇ ਰਤਨੁ ਵਿਸਾਹੇ ਲੇਵੈ ਆਪੇ ਕੀਮਤਿ ਪਾਇਦਾ ॥੪॥
आपे रतनु विसाहे लेवै आपे कीमति पाइदा ॥४॥
वह स्वयं ही नाम-रत्नों को खरीदता है और स्वयं ही उसकी सही कीमत आंकता है॥ ४॥

ਕੀਮਤਿ ਪਾਈ ਪਾਵਣਹਾਰੈ ॥
कीमति पाई पावणहारै ॥
मूल्यांकन करने वाले प्रभु ने स्वयं ही नाम-रत्न का मूल्यांकन किया है,

ਵੇਪਰਵਾਹ ਪੂਰੇ ਭੰਡਾਰੈ ॥
वेपरवाह पूरे भंडारै ॥
उस बेपरवाह प्रभु के भण्डार भरे हुए हैं।

ਸਰਬ ਕਲਾ ਲੇ ਆਪੇ ਰਹਿਆ ਗੁਰਮੁਖਿ ਕਿਸੈ ਬੁਝਾਇਦਾ ॥੫॥
सरब कला ले आपे रहिआ गुरमुखि किसै बुझाइदा ॥५॥
वह अपनी सर्व शक्तियों सहित स्वयं ही सब में समाया हुआ है परन्तु इस तथ्य की सूझ किसी गुरुमुख को ही होती है॥ ५॥

ਨਦਰਿ ਕਰੇ ਪੂਰਾ ਗੁਰੁ ਭੇਟੈ ॥
नदरि करे पूरा गुरु भेटै ॥
अगर उसकी कृपा-दृष्टि हो जाए तो पूर्ण गुरु से भेंट हो जाती है और

ਜਮ ਜੰਦਾਰੁ ਨ ਮਾਰੈ ਫੇਟੈ ॥
जम जंदारु न मारै फेटै ॥
निर्दयी यम भी पीड़ित नहीं करता।

ਜਿਉ ਜਲ ਅੰਤਰਿ ਕਮਲੁ ਬਿਗਾਸੀ ਆਪੇ ਬਿਗਸਿ ਧਿਆਇਦਾ ॥੬॥
जिउ जल अंतरि कमलु बिगासी आपे बिगसि धिआइदा ॥६॥
जैसे कमल का फूल जल में खिला हुआ है, वैसे ही वह स्वयं ही खिलकर ध्यान करता रहता है।॥ ६॥

ਆਪੇ ਵਰਖੈ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਧਾਰਾ ॥
आपे वरखै अम्रित धारा ॥
वह स्वयं ही अमृत धारा की वर्षा करता है और

ਰਤਨ ਜਵੇਹਰ ਲਾਲ ਅਪਾਰਾ ॥
रतन जवेहर लाल अपारा ॥
उसका अपार नाम ही रत्न, जवाहर एवं लाल समान है।

ਸਤਿਗੁਰੁ ਮਿਲੈ ਤ ਪੂਰਾ ਪਾਈਐ ਪ੍ਰੇਮ ਪਦਾਰਥੁ ਪਾਇਦਾ ॥੭॥
सतिगुरु मिलै त पूरा पाईऐ प्रेम पदारथु पाइदा ॥७॥
अगर सतिगुरु मिल जाए तो प्रेम के फलस्वरूप ही पूर्ण प्रभु प्राप्त होता है॥ ७॥

ਪ੍ਰੇਮ ਪਦਾਰਥੁ ਲਹੈ ਅਮੋਲੋ ॥
प्रेम पदारथु लहै अमोलो ॥
जो अमूल्य प्रेम पदार्थ को पा लेता है, वह कभी कम नहीं होता।

ਕਬ ਹੀ ਨ ਘਾਟਸਿ ਪੂਰਾ ਤੋਲੋ ॥
कब ही न घाटसि पूरा तोलो ॥
जब भी उसे तोलो, वह पूरा होता है।

ਸਚੇ ਕਾ ਵਾਪਾਰੀ ਹੋਵੈ ਸਚੋ ਸਉਦਾ ਪਾਇਦਾ ॥੮॥
सचे का वापारी होवै सचो सउदा पाइदा ॥८॥
वह सत्य का ही व्यापारी होता है और सच्चा सौदा ही लादता है॥ ८॥

ਸਚਾ ਸਉਦਾ ਵਿਰਲਾ ਕੋ ਪਾਏ ॥
सचा सउदा विरला को पाए ॥
यह सच्चा सौदा कोई विरला पुरुष ही प्राप्त करता है।

ਪੂਰਾ ਸਤਿਗੁਰੁ ਮਿਲੈ ਮਿਲਾਏ ॥
पूरा सतिगुरु मिलै मिलाए ॥
अगर पूर्ण सतगुरु मिल जाए तो वह मिला देता है।

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