Hindi Page 915

ਤੁਮਰੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੇ ਲਾਗੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ॥
तुमरी क्रिपा ते लागी प्रीति ॥
तेरी कृपा से ही तुझसे मेरी प्रीति लगी है।

ਦਇਆਲ ਭਏ ਤਾ ਆਏ ਚੀਤਿ ॥
दइआल भए ता आए चीति ॥
जब तू दयालु हुआ तो ही तू याद आया है।

ਦਇਆ ਧਾਰੀ ਤਿਨਿ ਧਾਰਣਹਾਰ ॥
दइआ धारी तिनि धारणहार ॥
दयालु प्रभु ने जब कृपा की तो

ਬੰਧਨ ਤੇ ਹੋਈ ਛੁਟਕਾਰ ॥੭॥
बंधन ते होई छुटकार ॥७॥
मेरा बन्धनों से छुटकारा हो गया ॥ ७ ॥

ਸਭਿ ਥਾਨ ਦੇਖੇ ਨੈਣ ਅਲੋਇ ॥
सभि थान देखे नैण अलोइ ॥
मैंने आंखें खोलकर सब स्थान देख लिए हैं,

ਤਿਸੁ ਬਿਨੁ ਦੂਜਾ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਇ ॥
तिसु बिनु दूजा अवरु न कोइ ॥
उस परमात्मा के अतिरिक्त अन्य कोई नजर नहीं आता।

ਭ੍ਰਮ ਭੈ ਛੂਟੇ ਗੁਰ ਪਰਸਾਦ ॥
भ्रम भै छूटे गुर परसाद ॥
गुरु की कृपा से सब भ्र्म एवं भय दूर हो गए हैं।

ਨਾਨਕ ਪੇਖਿਓ ਸਭੁ ਬਿਸਮਾਦ ॥੮॥੪॥
नानक पेखिओ सभु बिसमाद ॥८॥४॥
हे नानक ! उस प्रभु की अद्भुत लीला ही सब जगह दिखाई दे रही है॥ ८ ॥ ४॥

ਰਾਮਕਲੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
रामकली महला ५ ॥
रामकली महला ५ ॥

ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਪੇਖੀਅਹਿ ਪ੍ਰਭ ਸਗਲ ਤੁਮਾਰੀ ਧਾਰਨਾ ॥੧॥
जीअ जंत सभि पेखीअहि प्रभ सगल तुमारी धारना ॥१॥
हे प्रभु! ये सभी जीव-जन्तु जो दिखाई दे रहे हैं, सबको तूने ही धारण किया हुआ है॥ १॥

ਇਹੁ ਮਨੁ ਹਰਿ ਕੈ ਨਾਮਿ ਉਧਾਰਨਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
इहु मनु हरि कै नामि उधारना ॥१॥ रहाउ ॥
इस मन का उद्धार हरि के नाम से ही होता है॥ १॥ रहाउ॥

ਖਿਨ ਮਹਿ ਥਾਪਿ ਉਥਾਪੇ ਕੁਦਰਤਿ ਸਭਿ ਕਰਤੇ ਕੇ ਕਾਰਨਾ ॥੨॥
खिन महि थापि उथापे कुदरति सभि करते के कारना ॥२॥
समूची कुदरत ईश्वर की रचना है, वह क्षण में ही बनाने एवं मिटाने वाला है॥ २॥

ਕਾਮੁ ਕ੍ਰੋਧੁ ਲੋਭੁ ਝੂਠੁ ਨਿੰਦਾ ਸਾਧੂ ਸੰਗਿ ਬਿਦਾਰਨਾ ॥੩॥
कामु क्रोधु लोभु झूठु निंदा साधू संगि बिदारना ॥३॥
साधुओं की संगति द्वारा काम, क्रोध, लोभ, झूठ एवं निंदा को नष्ट किया जा सकता है॥ ३॥

ਨਾਮੁ ਜਪਤ ਮਨੁ ਨਿਰਮਲ ਹੋਵੈ ਸੂਖੇ ਸੂਖਿ ਗੁਦਾਰਨਾ ॥੪॥
नामु जपत मनु निरमल होवै सूखे सूखि गुदारना ॥४॥
प्रभु का नाम जपने से मन निर्मल हो जाता है और सारा जीवन सुख में ही गुजरता है॥ ४॥

ਭਗਤ ਸਰਣਿ ਜੋ ਆਵੈ ਪ੍ਰਾਣੀ ਤਿਸੁ ਈਹਾ ਊਹਾ ਨ ਹਾਰਨਾ ॥੫॥
भगत सरणि जो आवै प्राणी तिसु ईहा ऊहा न हारना ॥५॥
जो प्राणी भक्त की शरण में आ जाता है, वह लोक-परलोक में अपनी जीवन बाजी नहीं हारता॥ ५॥

ਸੂਖ ਦੂਖ ਇਸੁ ਮਨ ਕੀ ਬਿਰਥਾ ਤੁਮ ਹੀ ਆਗੈ ਸਾਰਨਾ ॥੬॥
सूख दूख इसु मन की बिरथा तुम ही आगै सारना ॥६॥
हे परमेश्वर ! इस मन की सुख-दुख की व्यथा तेरे समक्ष है, कल्याण करना ॥६॥

ਤੂ ਦਾਤਾ ਸਭਨਾ ਜੀਆ ਕਾ ਆਪਨ ਕੀਆ ਪਾਲਨਾ ॥੭॥
तू दाता सभना जीआ का आपन कीआ पालना ॥७॥
तू सब जीवों का दाता है और स्वयं ही पालन-पोषण करता है॥ ७ ॥

ਅਨਿਕ ਬਾਰ ਕੋਟਿ ਜਨ ਊਪਰਿ ਨਾਨਕੁ ਵੰਞੈ ਵਾਰਨਾ ॥੮॥੫॥
अनिक बार कोटि जन ऊपरि नानकु वंञै वारना ॥८॥५॥
नानक तेरे भक्तजनों पर करोड़ों बार न्यौछावर जाता है॥ ८ ॥ ५ ॥

ਰਾਮਕਲੀ ਮਹਲਾ ੫ ਅਸਟਪਦੀ
रामकली महला ५ असटपदी
रामकली महला ५ असटपदी

ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

ਦਰਸਨੁ ਭੇਟਤ ਪਾਪ ਸਭਿ ਨਾਸਹਿ ਹਰਿ ਸਿਉ ਦੇਇ ਮਿਲਾਈ ॥੧॥
दरसनु भेटत पाप सभि नासहि हरि सिउ देइ मिलाई ॥१॥
गुरु के दर्शन एवं साक्षात्कार से सभी पाप दूर हो जाते हैं और वह ईश्वर से मिला देता है॥ १ ॥

ਮੇਰਾ ਗੁਰੁ ਪਰਮੇਸਰੁ ਸੁਖਦਾਈ ॥
मेरा गुरु परमेसरु सुखदाई ॥
मेरा गुरु-परमेश्वर सुख देने वाला है,

ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਕਾ ਨਾਮੁ ਦ੍ਰਿੜਾਏ ਅੰਤੇ ਹੋਇ ਸਖਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
पारब्रहम का नामु द्रिड़ाए अंते होइ सखाई ॥१॥ रहाउ ॥
वह परब्रह्म का नाम स्मरण करवाता है और अंत में सहायक बनता है॥ १॥ रहाउ॥

ਸਗਲ ਦੂਖ ਕਾ ਡੇਰਾ ਭੰਨਾ ਸੰਤ ਧੂਰਿ ਮੁਖਿ ਲਾਈ ॥੨॥
सगल दूख का डेरा भंना संत धूरि मुखि लाई ॥२॥
जिसने संत-गुरु की चरण-धूलि अपने मुख पर लगाई है, उसके सब दुखों का पहाड़ नष्ट हो गया है॥ २।

ਪਤਿਤ ਪੁਨੀਤ ਕੀਏ ਖਿਨ ਭੀਤਰਿ ਅਗਿਆਨੁ ਅੰਧੇਰੁ ਵੰਞਾਈ ॥੩॥
पतित पुनीत कीए खिन भीतरि अगिआनु अंधेरु वंञाई ॥३॥
उसने क्षण में ही पतितों को पावन कर दिया है और उनका अज्ञान का अंधेरा मिटा दिया है।॥ ३॥

ਕਰਣ ਕਾਰਣ ਸਮਰਥੁ ਸੁਆਮੀ ਨਾਨਕ ਤਿਸੁ ਸਰਣਾਈ ॥੪॥
करण कारण समरथु सुआमी नानक तिसु सरणाई ॥४॥
हे नानक ! मेरा स्वामी करने-करवाने में समर्थ है, इसलिए उसकी शरण ली है॥ ४॥

ਬੰਧਨ ਤੋੜਿ ਚਰਨ ਕਮਲ ਦ੍ਰਿੜਾਏ ਏਕ ਸਬਦਿ ਲਿਵ ਲਾਈ ॥੫॥
बंधन तोड़ि चरन कमल द्रिड़ाए एक सबदि लिव लाई ॥५॥
उसने सब बन्धन तोड़कर प्रभु के चरण-कमल मन में बसा दिए हैं और एक शब्द में लगन लगा दी है॥ ५॥

ਅੰਧ ਕੂਪ ਬਿਖਿਆ ਤੇ ਕਾਢਿਓ ਸਾਚ ਸਬਦਿ ਬਣਿ ਆਈ ॥੬॥
अंध कूप बिखिआ ते काढिओ साच सबदि बणि आई ॥६॥
गुरु ने माया के विष रूपी अंधकूप से निकाल दिया है और अब सच्चे शब्द से प्रीति पैदा हो गई है। ६॥

ਜਨਮ ਮਰਣ ਕਾ ਸਹਸਾ ਚੂਕਾ ਬਾਹੁੜਿ ਕਤਹੁ ਨ ਧਾਈ ॥੭॥
जनम मरण का सहसा चूका बाहुड़ि कतहु न धाई ॥७॥
मेरा जन्म-मरण का संशय दूर हो गया है और अब इधर-उधर नहीं भटकता॥ ७॥

ਨਾਮ ਰਸਾਇਣਿ ਇਹੁ ਮਨੁ ਰਾਤਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤੁ ਪੀ ਤ੍ਰਿਪਤਾਈ ॥੮॥
नाम रसाइणि इहु मनु राता अम्रितु पी त्रिपताई ॥८॥
यह मन नाम-रस में ही लीन रहता है और नामामृत का पान करके तृप्त हो चुका है॥ ८॥

ਸੰਤਸੰਗਿ ਮਿਲਿ ਕੀਰਤਨੁ ਗਾਇਆ ਨਿਹਚਲ ਵਸਿਆ ਜਾਈ ॥੯॥
संतसंगि मिलि कीरतनु गाइआ निहचल वसिआ जाई ॥९॥
संतों के संग मिलकर परमात्मा का कीर्तिगान किया है और निश्चल स्थान में वास हो गया है॥ ६ ॥

ਪੂਰੈ ਗੁਰਿ ਪੂਰੀ ਮਤਿ ਦੀਨੀ ਹਰਿ ਬਿਨੁ ਆਨ ਨ ਭਾਈ ॥੧੦॥
पूरै गुरि पूरी मति दीनी हरि बिनु आन न भाई ॥१०॥
पूर्ण गुरु ने पूर्ण उपदेश दिया है कि भगवान के बिना अन्य कोई आधार नहीं ॥ १० ॥

ਨਾਮੁ ਨਿਧਾਨੁ ਪਾਇਆ ਵਡਭਾਗੀ ਨਾਨਕ ਨਰਕਿ ਨ ਜਾਈ ॥੧੧॥
नामु निधानु पाइआ वडभागी नानक नरकि न जाई ॥११॥
हे नानक ! जिस भाग्यशाली ने नाम रूपी भण्डार प्राप्त किया है, वह नरक में नहीं जाता॥ ११॥

ਘਾਲ ਸਿਆਣਪ ਉਕਤਿ ਨ ਮੇਰੀ ਪੂਰੈ ਗੁਰੂ ਕਮਾਈ ॥੧੨॥
घाल सिआणप उकति न मेरी पूरै गुरू कमाई ॥१२॥
मेरे पास कोई साधना, बुद्धिमानी एवं चतुराई नहीं है, केवल पूर्ण गुरु की दी हुई नाम की कमाई है॥ १२॥

ਜਪ ਤਪ ਸੰਜਮ ਸੁਚਿ ਹੈ ਸੋਈ ਆਪੇ ਕਰੇ ਕਰਾਈ ॥੧੩॥
जप तप संजम सुचि है सोई आपे करे कराई ॥१३॥
जो प्रभु करता एवं करवाता है, मेरे लिए वही जप, तप, संयम एवं शुभ कर्म है॥ १३॥

ਪੁਤ੍ਰ ਕਲਤ੍ਰ ਮਹਾ ਬਿਖਿਆ ਮਹਿ ਗੁਰਿ ਸਾਚੈ ਲਾਇ ਤਰਾਈ ॥੧੪॥
पुत्र कलत्र महा बिखिआ महि गुरि साचै लाइ तराई ॥१४॥
पुत्र, पत्नी इत्यादि महाविकारों में भी सच्चे गुरु ने संसार-सागर से पार करवा दिया है॥ १४॥

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