ਨਾਨਕ ਕੈ ਮਨਿ ਇਹੁ ਅਨਰਾਉ ॥੧॥
नानक कै मनि इहु अनराउ ॥१॥
नानक के मन में यही अभिलाषा है ॥ १॥
ਮਨਸਾ ਪੂਰਨ ਸਰਨਾ ਜੋਗ ॥
मनसा पूरन सरना जोग ॥
भगवान मनोकामना पूर्ण करने वाला एवं शरण देने योग्य है।
ਜੋ ਕਰਿ ਪਾਇਆ ਸੋਈ ਹੋਗੁ ॥
जो करि पाइआ सोई होगु ॥
जो कुछ ईश्वर ने अपने हाथ से लिख दिया है, वही होता है।
ਹਰਨ ਭਰਨ ਜਾ ਕਾ ਨੇਤ੍ਰ ਫੋਰੁ ॥ਤਿਸ ਕਾ ਮੰਤ੍ਰੁ ਨ ਜਾਨੈ ਹੋਰੁ ॥
हरन भरन जा का नेत्र फोरु ॥तिस का मंत्रु न जानै होरु ॥
वह पलक झपकते ही सृष्टि की रचना एवं विनाश कर देता है। दूसरा कोई उसके भेद को नहीं जानता।
ਅਨਦ ਰੂਪ ਮੰਗਲ ਸਦ ਜਾ ਕੈ ॥
अनद रूप मंगल सद जा कै ॥
वह प्रसन्नता का रूप है एवं उसके मन्दिर में सदैव मंगल-खुशियाँ हैं।
ਸਰਬ ਥੋਕ ਸੁਨੀਅਹਿ ਘਰਿ ਤਾ ਕੈ ॥
सरब थोक सुनीअहि घरि ता कै ॥
मैंने सुना है कि समस्त पदार्थ उसके घर में मौजूद हैं।
ਰਾਜ ਮਹਿ ਰਾਜੁ ਜੋਗ ਮਹਿ ਜੋਗੀ ॥
राज महि राजु जोग महि जोगी ॥
राजाओं में वह महान राजा एवं योगीयों में महायोगी है।
ਤਪ ਮਹਿ ਤਪੀਸਰੁ ਗ੍ਰਿਹਸਤ ਮਹਿ ਭੋਗੀ ॥
तप महि तपीसरु ग्रिहसत महि भोगी ॥
तपस्वियों में वह महान तपस्वी है और गृहस्थियों में भी स्वयं ही गृहस्थी है।
ਧਿਆਇ ਧਿਆਇ ਭਗਤਹ ਸੁਖੁ ਪਾਇਆ ॥
धिआइ धिआइ भगतह सुखु पाइआ ॥
उस एक ईश्वर का ध्यान करने से भक्तजनों ने सुख प्राप्त कर लिया है।
ਨਾਨਕ ਤਿਸੁ ਪੁਰਖ ਕਾ ਕਿਨੈ ਅੰਤੁ ਨ ਪਾਇਆ ॥੨॥
नानक तिसु पुरख का किनै अंतु न पाइआ ॥२॥
हे नानक ! उस परमात्मा का किसी ने भी अन्त नहीं पाया ॥ २ ॥
ਜਾ ਕੀ ਲੀਲਾ ਕੀ ਮਿਤਿ ਨਾਹਿ ॥
जा की लीला की मिति नाहि ॥
जिस भगवान की (सृष्टि-रूपी) लीला का कोई अंत नहीं,
ਸਗਲ ਦੇਵ ਹਾਰੇ ਅਵਗਾਹਿ ॥
सगल देव हारे अवगाहि ॥
उसे खोज-खोजकर देवता भी थक चुके हैं।
ਪਿਤਾ ਕਾ ਜਨਮੁ ਕਿ ਜਾਨੈ ਪੂਤੁ ॥
पिता का जनमु कि जानै पूतु ॥
चूंकि अपने पिता के जन्म बारे पुत्र क्या जानता है ?
ਸਗਲ ਪਰੋਈ ਅਪੁਨੈ ਸੂਤਿ ॥
सगल परोई अपुनै सूति ॥
सारी सृष्टि ईश्वर ने अपने (हुक्म रूपी) धागे में पिरोई हुई है।
ਸੁਮਤਿ ਗਿਆਨੁ ਧਿਆਨੁ ਜਿਨ ਦੇਇ ॥ਜਨ ਦਾਸ ਨਾਮੁ ਧਿਆਵਹਿ ਸੇਇ ॥
सुमति गिआनु धिआनु जिन देइ ॥जन दास नामु धिआवहि सेइ ॥
जिन्हें प्रभु सुमति, ज्ञान एवं ध्यान प्रदान करता है, उसके सेवक एवं दास उसका ही ध्यान करते रहते हैं।
ਤਿਹੁ ਗੁਣ ਮਹਿ ਜਾ ਕਉ ਭਰਮਾਏ ॥
तिहु गुण महि जा कउ भरमाए ॥
जिसको प्रभु माया के तीन गुणों में भटकाता है,
ਜਨਮਿ ਮਰੈ ਫਿਰਿ ਆਵੈ ਜਾਏ ॥
जनमि मरै फिरि आवै जाए ॥
वह जन्मता-मरता रहता है और आवागमन के चक्र में पड़ा रहता है।
ਊਚ ਨੀਚ ਤਿਸ ਕੇ ਅਸਥਾਨ ॥
ऊच नीच तिस के असथान ॥
ऊँच-नीच सब उसके ही स्थान हैं।
ਜੈਸਾ ਜਨਾਵੈ ਤੈਸਾ ਨਾਨਕ ਜਾਨ ॥੩॥
जैसा जनावै तैसा नानक जान ॥३॥
हे नानक ! जैसी सूझ वह देता है, वैसे ही सूझ वाला प्राणी बन जाता है ॥३॥
ਨਾਨਾ ਰੂਪ ਨਾਨਾ ਜਾ ਕੇ ਰੰਗ ॥
नाना रूप नाना जा के रंग ॥
ईश्वर के अनेक रूप हैं और अनेक उसके रंग हैं।
ਨਾਨਾ ਭੇਖ ਕਰਹਿ ਇਕ ਰੰਗ ॥
नाना भेख करहि इक रंग ॥
अनेक वेष धारण करते हुए वह फिर भी एक ही रहता है।
ਨਾਨਾ ਬਿਧਿ ਕੀਨੋ ਬਿਸਥਾਰੁ ॥
नाना बिधि कीनो बिसथारु ॥
उसने विभिन्न विधियों से अपनी सृष्टि का प्रसार किया हुआ है।
ਪ੍ਰਭੁ ਅਬਿਨਾਸੀ ਏਕੰਕਾਰੁ ॥
प्रभु अबिनासी एकंकारु ॥
अनश्वर प्रभु जो एक ही है,
ਨਾਨਾ ਚਲਿਤ ਕਰੇ ਖਿਨ ਮਾਹਿ ॥
नाना चलित करे खिन माहि ॥
एक क्षण में वह विभिन्न खेल रच देता है।
ਪੂਰਿ ਰਹਿਓ ਪੂਰਨੁ ਸਭ ਠਾਇ ॥
पूरि रहिओ पूरनु सभ ठाइ ॥
पूर्ण प्रभु समस्त स्थानों में समा रहा है।
ਨਾਨਾ ਬਿਧਿ ਕਰਿ ਬਨਤ ਬਨਾਈ ॥
नाना बिधि करि बनत बनाई ॥
अनेक विधियों से उसने सृष्टि-रचना की है।
ਅਪਨੀ ਕੀਮਤਿ ਆਪੇ ਪਾਈ ॥
अपनी कीमति आपे पाई ॥
अपना मूल्यांकन उसने स्वयं ही पाया है।
ਸਭ ਘਟ ਤਿਸ ਕੇ ਸਭ ਤਿਸ ਕੇ ਠਾਉ ॥
सभ घट तिस के सभ तिस के ठाउ ॥
समस्त हृदय उसके हैं और उसके ही समस्त स्थान हैं।
ਜਪਿ ਜਪਿ ਜੀਵੈ ਨਾਨਕ ਹਰਿ ਨਾਉ ॥੪॥
जपि जपि जीवै नानक हरि नाउ ॥४॥
हे नानक ! मैं हरि का नाम जप-जप कर ही जीता हूँ ॥४॥
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਸਗਲੇ ਜੰਤ ॥
नाम के धारे सगले जंत ॥
ईश्वर नाम ने ही समस्त जीव-जन्तुओं को सहारा दिया हुआ है।
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਖੰਡ ਬ੍ਰਹਮੰਡ ॥
नाम के धारे खंड ब्रहमंड ॥
धरती के खण्ड एवं ब्रह्माण्ड ईश्वर नाम ने ही टिकाए हुए हैं
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਸਿਮ੍ਰਿਤਿ ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ॥
नाम के धारे सिम्रिति बेद पुरान ॥
ईश्वर के नाम ने ही स्मृतियों, वेदों एवं पुराणों को सहारा दिया हुआ है।
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਸੁਨਨ ਗਿਆਨ ਧਿਆਨ ॥
नाम के धारे सुनन गिआन धिआन ॥
नाम के सहारे द्वारा प्राणी ज्ञान एवं मनन बारे सुनते हैं।
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਆਗਾਸ ਪਾਤਾਲ ॥
नाम के धारे आगास पाताल ॥
परमेश्वर का नाम ही आकाशों एवं पातालों का सहारा है।
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਸਗਲ ਆਕਾਰ ॥
नाम के धारे सगल आकार ॥
ईश्वर का नाम समस्त शरीरों का सहारा है।
ਨਾਮ ਕੇ ਧਾਰੇ ਪੁਰੀਆ ਸਭ ਭਵਨ ॥
नाम के धारे पुरीआ सभ भवन ॥
तीनों भवन एवं चौदह लोक ईश्वर के नाम ने टिकाए हुए हैं।
ਨਾਮ ਕੈ ਸੰਗਿ ਉਧਰੇ ਸੁਨਿ ਸ੍ਰਵਨ ॥
नाम कै संगि उधरे सुनि स्रवन ॥
नाम की संगति करने एवं कानों से इसको श्रवण करने से मनुष्य पार हो गए हैं।
ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਜਿਸੁ ਆਪਨੈ ਨਾਮਿ ਲਾਏ ॥
करि किरपा जिसु आपनै नामि लाए
जिस पर प्रभु कृपा धारण करके अपने नाम के साथ मिलाता है,
ਨਾਨਕ ਚਉਥੇ ਪਦ ਮਹਿ ਸੋ ਜਨੁ ਗਤਿ ਪਾਏ ॥੫॥
नानक चउथे पद महि सो जनु गति पाए ॥५॥
हे नानक ! वह मनुष्य चतुर्थ स्थान में पहुँचकर मोक्ष प्राप्त कर लेता है॥ ५॥
ਰੂਪੁ ਸਤਿ ਜਾ ਕਾ ਸਤਿ ਅਸਥਾਨੁ ॥
रूपु सति जा का सति असथानु ॥
जिस भगवान का रूप सत्य है, उसका निवास भी सत्य है।
ਪੁਰਖੁ ਸਤਿ ਕੇਵਲ ਪਰਧਾਨੁ ॥
पुरखु सति केवल परधानु ॥
केवल वह सद्पुरुष ही प्रधान है।
ਕਰਤੂਤਿ ਸਤਿ ਸਤਿ ਜਾ ਕੀ ਬਾਣੀ ॥ਸਤਿ ਪੁਰਖ ਸਭ ਮਾਹਿ ਸਮਾਣੀ ॥
करतूति सति सति जा की बाणी ॥सति पुरख सभ माहि समाणी ॥
उसके करतब सत्य हैं और उसकी वाणी सत्य है। सत्यस्वरूप प्रभु सब में समाया हुआ है।
ਸਤਿ ਕਰਮੁ ਜਾ ਕੀ ਰਚਨਾ ਸਤਿ ॥
सति करमु जा की रचना सति ॥
उसके कर्म सत्य हैं और उसकी सृष्टि भी सत्य है।
ਮੂਲੁ ਸਤਿ ਸਤਿ ਉਤਪਤਿ ॥
मूलु सति सति उतपति ॥
उसका मूल सत्य है एवं जो कुछ उससे उत्पन्न होता है, वह भी सत्य है।
ਸਤਿ ਕਰਣੀ ਨਿਰਮਲ ਨਿਰਮਲੀ ॥
सति करणी निरमल निरमली ॥
उसकी करनी सत्य है और पवित्र से भी पवित्र है।
ਜਿਸਹਿ ਬੁਝਾਏ ਤਿਸਹਿ ਸਭ ਭਲੀ ॥
जिसहि बुझाए तिसहि सभ भली ॥
भगवान जिसे समझाता है, उसे सब भला ही लगता है।
ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਪ੍ਰਭ ਕਾ ਸੁਖਦਾਈ ॥
सति नामु प्रभ का सुखदाई ॥
प्रभु का सत्यनाम सुख देने वाला है।
ਬਿਸ੍ਵਾਸੁ ਸਤਿ ਨਾਨਕ ਗੁਰ ਤੇ ਪਾਈ ॥੬॥
बिस्वासु सति नानक गुर ते पाई ॥६॥
हे नानक ! (प्राणी को) यह सच्चा विश्वासगुरु से मिलता है॥ ६ ॥
ਸਤਿ ਬਚਨ ਸਾਧੂ ਉਪਦੇਸ ॥
सति बचन साधू उपदेस ॥
साधु का उपदेश सत्य वचन हैं।
ਸਤਿ ਤੇ ਜਨ ਜਾ ਕੈ ਰਿਦੈ ਪ੍ਰਵੇਸ ॥
सति ते जन जा कै रिदै प्रवेस ॥
वे पुरुष सत्य हैं, जिनके हृदय में सत्य प्रवेश करता है।
ਸਤਿ ਨਿਰਤਿ ਬੂਝੈ ਜੇ ਕੋਇ ॥
सति निरति बूझै जे कोइ ॥
यदि कोई व्यक्ति सत्य को समझे और प्रेम करे,
ਨਾਮੁ ਜਪਤ ਤਾ ਕੀ ਗਤਿ ਹੋਇ ॥
नामु जपत ता की गति होइ ॥
तो नाम जपने से उसकी गति हो जाती है।
ਆਪਿ ਸਤਿ ਕੀਆ ਸਭੁ ਸਤਿ ॥
आपि सति कीआ सभु सति ॥
प्रभु स्वयं सत्यस्वरूप है और उसका किया सब सत्य है।
ਆਪੇ ਜਾਨੈ ਅਪਨੀ ਮਿਤਿ ਗਤਿ ॥
आपे जानै अपनी मिति गति ॥
वह स्वयं ही अपने अनुमान एवं अवस्था को जानता है।