ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੀ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਅੰਮ੍ਰਿਤੁ ਬਰਸੀ ॥
ब्रहम गिआनी की द्रिसटि अम्रितु बरसी ॥
ब्रह्मज्ञानी की दृष्टि से अमृत बरसता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਬੰਧਨ ਤੇ ਮੁਕਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी बंधन ते मुकता ॥
ब्रह्मज्ञानी बन्धनों से मुक्त रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੀ ਨਿਰਮਲ ਜੁਗਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी की निरमल जुगता ॥
ब्रह्मज्ञानी का जीवन-आचरण बड़ा पवित्र है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਭੋਜਨੁ ਗਿਆਨ ॥
ब्रहम गिआनी का भोजनु गिआन
ब्रह्मज्ञानी का भोजन ज्ञान होता है।
ਨਾਨਕ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਬ੍ਰਹਮ ਧਿਆਨੁ ॥੩॥
नानक ब्रहम गिआनी का ब्रहम धिआनु ॥३॥
हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी भगवान के ध्यान में ही मग्न रहता है॥ ३॥
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਏਕ ਊਪਰਿ ਆਸ ॥
ब्रहम गिआनी एक ऊपरि आस ॥
ब्रह्मज्ञानी की एक ईश्वर पर ही आशा होती है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਨਹੀ ਬਿਨਾਸ ॥
ब्रहम गिआनी का नही बिनास ॥
ब्रह्मज्ञानी का विनाश नहीं होता।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਗਰੀਬੀ ਸਮਾਹਾ ॥
ब्रहम गिआनी कै गरीबी समाहा ॥
ब्रह्मज्ञानी नम्रता में ही टिका रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਪਰਉਪਕਾਰ ਉਮਾਹਾ ॥
ब्रहम गिआनी परउपकार उमाहा ॥
ब्रह्मज्ञानी को परोपकार करने का उत्साह बना रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਨਾਹੀ ਧੰਧਾ ॥
ब्रहम गिआनी कै नाही धंधा ॥
ब्रह्मज्ञानी सांसारिक विवादों से परे होता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਲੇ ਧਾਵਤੁ ਬੰਧਾ ॥
ब्रहम गिआनी ले धावतु बंधा ॥
ब्रह्मज्ञानी अपने भागते मन को नियंत्रण में कर लेता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਹੋਇ ਸੁ ਭਲਾ ॥
ब्रहम गिआनी कै होइ सु भला ॥
ब्रह्मज्ञानी के कर्म श्रेष्ठ हैं, वह जो भी करता है, भला ही करता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸੁਫਲ ਫਲਾ ॥
ब्रहम गिआनी सुफल फला ॥
ब्रह्मज्ञानी भलीभाँति सफल होता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸੰਗਿ ਸਗਲ ਉਧਾਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी संगि सगल उधारु ॥
ब्रह्मज्ञानी की संगति में रहने से सबका उद्धार हो जाता है।
ਨਾਨਕ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਜਪੈ ਸਗਲ ਸੰਸਾਰੁ ॥੪॥
नानक ब्रहम गिआनी जपै सगल संसारु ॥४॥
हे नानक ! सारी दुनिया ब्रह्मज्ञानी की प्रशंसा करती है॥ ४॥
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਏਕੈ ਰੰਗ ॥
ब्रहम गिआनी कै एकै रंग ॥
ब्रह्मज्ञानी केवल एक ईश्वर से ही प्रेम करता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਬਸੈ ਪ੍ਰਭੁ ਸੰਗ ॥
ब्रहम गिआनी कै बसै प्रभु संग ॥
ईश्वर ब्रह्मज्ञानी के साथ-साथ रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਨਾਮੁ ਆਧਾਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी कै नामु आधारु ॥
ईश्वर का नाम ही ब्रह्मज्ञानी का आधार है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਨਾਮੁ ਪਰਵਾਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी कै नामु परवारु ॥
ईश्वर का नाम ही ब्रह्मज्ञानी का परिवार है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਦਾ ਸਦ ਜਾਗਤ ॥
ब्रहम गिआनी सदा सद जागत ॥
ब्रह्मज्ञानी हमेशा जाग्रत रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਅਹੰਬੁਧਿ ਤਿਆਗਤ ॥
ब्रहम गिआनी अह्मबुधि तिआगत ॥
ब्रह्मज्ञानी अपनी अहंबुद्धि को त्याग देता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਮਨਿ ਪਰਮਾਨੰਦ ॥
ब्रहम गिआनी कै मनि परमानंद ॥
ब्रह्मज्ञानी के हृदय में परमानन्द वास करता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਘਰਿ ਸਦਾ ਅਨੰਦ ॥
ब्रहम गिआनी कै घरि सदा अनंद ॥
ब्रह्मज्ञानी के हृदय-रूपी घर में सदा आनंद बना रहता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸੁਖ ਸਹਜ ਨਿਵਾਸ ॥
ब्रहम गिआनी सुख सहज निवास ॥
ब्रह्मज्ञानी हमेशा सहज सुख में निवास करता है।
ਨਾਨਕ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਨਹੀ ਬਿਨਾਸ ॥੫॥
नानक ब्रहम गिआनी का नही बिनास ॥५॥
हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी का विनाश नहीं होता।॥५॥
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਬ੍ਰਹਮ ਕਾ ਬੇਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी ब्रहम का बेता ॥
ब्रह्मज्ञानी ब्रह्म ज्ञाता होता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਏਕ ਸੰਗਿ ਹੇਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी एक संगि हेता ॥
ब्रह्मज्ञानी एक ईश्वर से ही प्रेम करता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਹੋਇ ਅਚਿੰਤ ॥
ब्रहम गिआनी कै होइ अचिंत ॥
ब्रह्मज्ञानी के हृदय में हमेशा बेफ्रिक्री रहती है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਨਿਰਮਲ ਮੰਤ ॥
ब्रहम गिआनी का निरमल मंत ॥
ब्रह्मज्ञानी का मंत्र पवित्र करने वाला होता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਜਿਸੁ ਕਰੈ ਪ੍ਰਭੁ ਆਪਿ ॥
ब्रहम गिआनी जिसु करै प्रभु आपि ॥
ब्रह्मज्ञानी वही होता है, जिसे ईश्वर स्वयं लोकप्रिय बनाता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਬਡ ਪਰਤਾਪ ॥
ब्रहम गिआनी का बड परताप ॥
ब्रह्मज्ञानी का बड़ा प्रताप है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਦਰਸੁ ਬਡਭਾਗੀ ਪਾਈਐ ॥
ब्रहम गिआनी का दरसु बडभागी पाईऐ ॥
ब्रह्मज्ञानी के दर्शन किसी भाग्यशाली को ही प्राप्त होते हैं।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਉ ਬਲਿ ਬਲਿ ਜਾਈਐ ॥
ब्रहम गिआनी कउ बलि बलि जाईऐ ॥
ब्रह्मज्ञानी पर हमेशा बलिहारी जाना चाहिए।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਉ ਖੋਜਹਿ ਮਹੇਸੁਰ ॥
ब्रहम गिआनी कउ खोजहि महेसुर ॥
ब्रह्मज्ञानी को शिवशंकर भी खोजते रहते हैं।
ਨਾਨਕ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਆਪਿ ਪਰਮੇਸੁਰ ॥੬॥
नानक ब्रहम गिआनी आपि परमेसुर ॥६॥
हे नानक ! परमेश्वर स्वयं ही ब्रह्मज्ञानी है॥ ६ ॥
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੀ ਕੀਮਤਿ ਨਾਹਿ ॥
ब्रहम गिआनी की कीमति नाहि ॥
ब्रह्मज्ञानी के गुणों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੈ ਸਗਲ ਮਨ ਮਾਹਿ ॥
ब्रहम गिआनी कै सगल मन माहि ॥
सब गुण ब्रह्मज्ञानी के हृदय में विद्यमान हैं।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਕਉਨ ਜਾਨੈ ਭੇਦੁ ॥
ब्रहम गिआनी का कउन जानै भेदु ॥
ब्रहाज्ञानी के भेद को कौन जान सकता है ?
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਉ ਸਦਾ ਅਦੇਸੁ ॥
ब्रहम गिआनी कउ सदा अदेसु ॥
ब्रह्मज्ञानी को सदैव प्रणाम करना चाहिए।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਕਥਿਆ ਨ ਜਾਇ ਅਧਾਖੵਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी का कथिआ न जाइ अधाख्यरु ॥
ब्रह्मज्ञानी की महिमा का एक आधा अक्षर भी वर्णन नहीं किया जा सकता।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਰਬ ਕਾ ਠਾਕੁਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी सरब का ठाकुरु ॥
ब्रह्मज्ञानी समस्त जीवों का पूज्य स्वामी है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੀ ਮਿਤਿ ਕਉਨੁ ਬਖਾਨੈ ॥
ब्रहम गिआनी की मिति कउनु बखानै ॥
ब्रह्मज्ञानी का अनुमान कौन लगा सकता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕੀ ਗਤਿ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਜਾਨੈ ॥
ब्रहम गिआनी की गति ब्रहम गिआनी जानै ॥
केवल ब्रह्मज्ञानी ही ब्रह्मज्ञानी की गति को जानता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਅੰਤੁ ਨ ਪਾਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी का अंतु न पारु ॥
ब्रह्मज्ञानी के गुणों का कोई आर-पार नहीं।
ਨਾਨਕ ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਉ ਸਦਾ ਨਮਸਕਾਰੁ ॥੭॥
नानक ब्रहम गिआनी कउ सदा नमसकारु ॥७॥
हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी को हमेशा ही प्रणाम करते रहो ॥ ७ ॥
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਭ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਕਾ ਕਰਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी सभ स्रिसटि का करता ॥
ब्रह्मज्ञानी सारी दुनिया का कर्तार है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਸਦ ਜੀਵੈ ਨਹੀ ਮਰਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी सद जीवै नही मरता ॥
ब्रह्मज्ञानी सदैव ही जीवित रहता है और मरता नहीं।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਮੁਕਤਿ ਜੁਗਤਿ ਜੀਅ ਕਾ ਦਾਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी मुकति जुगति जीअ का दाता ॥
ब्रह्मज्ञानी जीवों को मुक्ति, युक्ति एवं जीवन देने वाला दाता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਪੂਰਨ ਪੁਰਖੁ ਬਿਧਾਤਾ ॥
ब्रहम गिआनी पूरन पुरखु बिधाता ॥
ब्रह्मज्ञानी पूर्ण पुरुष विधाता है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਅਨਾਥ ਕਾ ਨਾਥੁ ॥
ब्रहम गिआनी अनाथ का नाथु ॥
ब्रह्मज्ञानी अनाथों का नाथ है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਸਭ ਊਪਰਿ ਹਾਥੁ ॥
ब्रहम गिआनी का सभ ऊपरि हाथु ॥
ब्रह्मज्ञानी का रक्षक हाथ समस्त मानव जाति पर है।
ਬ੍ਰਹਮ ਗਿਆਨੀ ਕਾ ਸਗਲ ਅਕਾਰੁ ॥
ब्रहम गिआनी का सगल अकारु ॥
यह सारा जगत्-प्रसार ब्रह्मज्ञानी का ही है।