ਹੋਇ ਦਇਆਲੁ ਕਿਰਪਾਲੁ ਪ੍ਰਭੁ ਠਾਕੁਰੁ ਆਪੇ ਸੁਣੈ ਬੇਨੰਤੀ ॥
होइ दइआलु किरपालु प्रभु ठाकुरु आपे सुणै बेनंती ॥
ठाकुर प्रभु दयालु एवं कृपालु होकर स्वयं ही विनती सुनता है।
ਪੂਰਾ ਸਤਗੁਰੁ ਮੇਲਿ ਮਿਲਾਵੈ ਸਭ ਚੂਕੈ ਮਨ ਕੀ ਚਿੰਤੀ ॥
पूरा सतगुरु मेलि मिलावै सभ चूकै मन की चिंती ॥
जब पूर्ण सतगुरु उसके संग मिला देता है, तब मन की सारी चिंता मिट जाती है।
ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਅਵਖਦੁ ਮੁਖਿ ਪਾਇਆ ਜਨ ਨਾਨਕ ਸੁਖਿ ਵਸੰਤੀ ॥੪॥੧੨॥੬੨॥
हरि हरि नामु अवखदु मुखि पाइआ जन नानक सुखि वसंती ॥४॥१२॥६२॥
हे नानक ! गुरु ने हरि-नाम की औषधि भेरे मुँह में डाल दी है और अब मैं सुखी रहता हूँ ॥४॥ १२॥ ६२॥
ਸੋਰਠਿ ਮਹਲਾ ੫ ॥
सोरठि महला ५ ॥
सोरठि महला ५ ॥
ਸਿਮਰਿ ਸਿਮਰਿ ਪ੍ਰਭ ਭਏ ਅਨੰਦਾ ਦੁਖ ਕਲੇਸ ਸਭਿ ਨਾਠੇ ॥
सिमरि सिमरि प्रभ भए अनंदा दुख कलेस सभि नाठे ॥
प्रभु का सिमरन करने से मुझे आनंद प्राप्त हो गया है और मेरे सभी दु:ख एवं क्लेश दूर हो गए हैं।
ਗੁਨ ਗਾਵਤ ਧਿਆਵਤ ਪ੍ਰਭੁ ਅਪਨਾ ਕਾਰਜ ਸਗਲੇ ਸਾਂਠੇ ॥੧॥
गुन गावत धिआवत प्रभु अपना कारज सगले सांठे ॥१॥
अपने प्रभु का गुणगान एवं ध्यान करते हुए हमारे सभी कार्य संवर गए हैं॥ १॥
ਜਗਜੀਵਨ ਨਾਮੁ ਤੁਮਾਰਾ ॥
जगजीवन नामु तुमारा ॥
हे ईश्वर! तुम्हारा नाम जगत का जीवन है।
ਗੁਰ ਪੂਰੇ ਦੀਓ ਉਪਦੇਸਾ ਜਪਿ ਭਉਜਲੁ ਪਾਰਿ ਉਤਾਰਾ ॥ ਰਹਾਉ ॥
गुर पूरे दीओ उपदेसा जपि भउजलु पारि उतारा ॥ रहाउ ॥
पूर्ण गुरु ने हमें उपदेश दिया है कि प्रभु का जाप करने से ही भवसागर से पार हुआ जा सकता है॥ रहाउ॥
ਤੂਹੈ ਮੰਤ੍ਰੀ ਸੁਨਹਿ ਪ੍ਰਭ ਤੂਹੈ ਸਭੁ ਕਿਛੁ ਕਰਣੈਹਾਰਾ ॥
तूहै मंत्री सुनहि प्रभ तूहै सभु किछु करणैहारा ॥
हे प्रभु ! तू स्वयं ही मंत्री है, तू स्वयं सबकी प्रार्थना सुनता है और तू ही सब कुछ करने वाला है।
ਤੂ ਆਪੇ ਦਾਤਾ ਆਪੇ ਭੁਗਤਾ ਕਿਆ ਇਹੁ ਜੰਤੁ ਵਿਚਾਰਾ ॥੨॥
तू आपे दाता आपे भुगता किआ इहु जंतु विचारा ॥२॥
तू स्वयं ही दाता है, स्वयं ही भोग भोगने वाला है, यह जीव बेचारा तो लाचार है?॥ २॥
ਕਿਆ ਗੁਣ ਤੇਰੇ ਆਖਿ ਵਖਾਣੀ ਕੀਮਤਿ ਕਹਣੁ ਨ ਜਾਈ ॥
किआ गुण तेरे आखि वखाणी कीमति कहणु न जाई ॥
मैं तेरे कौन-से गुणों का बखान करूँ ? चूंकि तेरे गुणों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
ਪੇਖਿ ਪੇਖਿ ਜੀਵੈ ਪ੍ਰਭੁ ਅਪਨਾ ਅਚਰਜੁ ਤੁਮਹਿ ਵਡਾਈ ॥੩॥
पेखि पेखि जीवै प्रभु अपना अचरजु तुमहि वडाई ॥३॥
तेरी महिमा बड़ी अद्भुत है चूंकि तेरे दर्शन-दीदार करके ही हम जीवित रहते हैं।॥ ३॥
ਧਾਰਿ ਅਨੁਗ੍ਰਹੁ ਆਪਿ ਪ੍ਰਭ ਸ੍ਵਾਮੀ ਪਤਿ ਮਤਿ ਕੀਨੀ ਪੂਰੀ ॥
धारि अनुग्रहु आपि प्रभ स्वामी पति मति कीनी पूरी ॥
स्वामी प्रभु ने स्वयं ही अपनी मेहर करके हमारी लाज एवं बुद्धि को सुशोभित कर दिया है।
ਸਦਾ ਸਦਾ ਨਾਨਕ ਬਲਿਹਾਰੀ ਬਾਛਉ ਸੰਤਾ ਧੂਰੀ ॥੪॥੧੩॥੬੩॥
सदा सदा नानक बलिहारी बाछउ संता धूरी ॥४॥१३॥६३॥
नानक तो हमेशा ही प्रभु पर बलिहारी जाता है और संतों की चरण-धूलि की कामना करता है॥ ४॥ १३॥ ६३॥
ਸੋਰਠਿ ਮਃ ੫ ॥
सोरठि मः ५ ॥
सोरठि मः ५ ॥
ਗੁਰੁ ਪੂਰਾ ਨਮਸਕਾਰੇ ॥
गुरु पूरा नमसकारे ॥
पूर्ण गुरु को हमारा शत्-शत् नमन है,
ਪ੍ਰਭਿ ਸਭੇ ਕਾਜ ਸਵਾਰੇ ॥
प्रभि सभे काज सवारे ॥
प्रभु ने हमारे सभी कार्य संवार दिए हैं।
ਹਰਿ ਅਪਣੀ ਕਿਰਪਾ ਧਾਰੀ ॥
हरि अपणी किरपा धारी ॥
भगवान ने मुझ पर अपनी कृपा की है और
ਪ੍ਰਭ ਪੂਰਨ ਪੈਜ ਸਵਾਰੀ ॥੧॥
प्रभ पूरन पैज सवारी ॥१॥
उसने हमारी पूर्ण लाज-प्रतिष्ठा सुशोभित की है॥ १॥
ਅਪਨੇ ਦਾਸ ਕੋ ਭਇਓ ਸਹਾਈ ॥
अपने दास को भइओ सहाई ॥
वह अपने दास का सहायक बन गया है।
ਸਗਲ ਮਨੋਰਥ ਕੀਨੇ ਕਰਤੈ ਊਣੀ ਬਾਤ ਨ ਕਾਈ ॥ ਰਹਾਉ ॥
सगल मनोरथ कीने करतै ऊणी बात न काई ॥ रहाउ ॥
कर्ता-प्रभु ने हमारे सभी मनोरथ पूरे कर दिए हैं और कोई बात की कमी नहीं रह गई॥ रहाउ॥
ਕਰਤੈ ਪੁਰਖਿ ਤਾਲੁ ਦਿਵਾਇਆ ॥
करतै पुरखि तालु दिवाइआ ॥
कर्ता-पुरुष ने अमृत सरोवर दिलवाया है।
ਪਿਛੈ ਲਗਿ ਚਲੀ ਮਾਇਆ ॥
पिछै लगि चली माइआ ॥
माया हमारे पीछे लगकर चली आई है और
ਤੋਟਿ ਨ ਕਤਹੂ ਆਵੈ ॥ ਮੇਰੇ ਪੂਰੇ ਸਤਗੁਰ ਭਾਵੈ ॥੨॥
तोटि न कतहू आवै ॥ मेरे पूरे सतगुर भावै ॥२॥
अब हमें किसी वस्तु की कोई कमी नहीं। मेरे पूर्ण सतगुरु को यूं ही भला लगता है ॥ २॥
ਸਿਮਰਿ ਸਿਮਰਿ ਦਇਆਲਾ ॥ ਸਭਿ ਜੀਅ ਭਏ ਕਿਰਪਾਲਾ ॥
सिमरि सिमरि दइआला ॥ सभि जीअ भए किरपाला ॥
दयालु परमात्मा का सिमरन करने से सभी लोग मुझ पर कृपालु हो गए हैं।
ਜੈ ਜੈ ਕਾਰੁ ਗੁਸਾਈ ॥
जै जै कारु गुसाई ॥
उस मालिक की जय-जयकार है,
ਜਿਨਿ ਪੂਰੀ ਬਣਤ ਬਣਾਈ ॥੩॥
जिनि पूरी बणत बणाई ॥३॥
जिसने पूर्ण दिया हुआ रचना का विधान किया है॥ ३॥
ਤੂ ਭਾਰੋ ਸੁਆਮੀ ਮੋਰਾ ॥
तू भारो सुआमी मोरा ॥
हे प्रभु ! तू मेरा महान् मालिक है।
ਇਹੁ ਪੁੰਨੁ ਪਦਾਰਥੁ ਤੇਰਾ ॥
इहु पुंनु पदारथु तेरा ॥
यह पुण्य पदार्थ सब कुछ तेरा ही दिया हुआ है।
ਜਨ ਨਾਨਕ ਏਕੁ ਧਿਆਇਆ ॥
जन नानक एकु धिआइआ ॥
नानक ने तो एक ईश्वर का ही ध्यान किया है और
ਸਰਬ ਫਲਾ ਪੁੰਨੁ ਪਾਇਆ ॥੪॥੧੪॥੬੪॥
सरब फला पुंनु पाइआ ॥४॥१४॥६४॥
उसे सर्व फलों के पुण्य की प्राप्ति हो गई है ॥४॥१४॥६४॥
ਸੋਰਠਿ ਮਹਲਾ ੫ ਘਰੁ ੩ ਦੁਪਦੇ
सोरठि महला ५ घरु ३ दुपदे
सोरठि महला ५ घरु ३ दुपदे
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।
ਰਾਮਦਾਸ ਸਰੋਵਰਿ ਨਾਤੇ ॥
रामदास सरोवरि नाते ॥
रामदास सरोवर का इतना महात्म्य है कि इसमें स्नान करने के फलस्वरूप
ਸਭਿ ਉਤਰੇ ਪਾਪ ਕਮਾਤੇ ॥
सभि उतरे पाप कमाते ॥
पिछले किए हुए सभी पाप नाश हो जाते हैं।
ਨਿਰਮਲ ਹੋਏ ਕਰਿ ਇਸਨਾਨਾ ॥
निरमल होए करि इसनाना ॥
इस सरोवर में स्नान करने से मनुष्य पवित्र हो जाता है और
ਗੁਰਿ ਪੂਰੈ ਕੀਨੇ ਦਾਨਾ ॥੧॥
गुरि पूरै कीने दाना ॥१॥
पूर्ण गुरु ने हमें यह प्रदान किया है॥ १॥
ਸਭਿ ਕੁਸਲ ਖੇਮ ਪ੍ਰਭਿ ਧਾਰੇ ॥
सभि कुसल खेम प्रभि धारे ॥
प्रभु ने सभी को सुख एवं खुशियों की देन प्रदान की है।
ਸਹੀ ਸਲਾਮਤਿ ਸਭਿ ਥੋਕ ਉਬਾਰੇ ਗੁਰ ਕਾ ਸਬਦੁ ਵੀਚਾਰੇ ॥ ਰਹਾਉ ॥
सही सलामति सभि थोक उबारे गुर का सबदु वीचारे ॥ रहाउ ॥
गुरु के शब्द का चिंतन करने से सभी वस्तुएँ सही सलामत बच गई हैं अर्थात् सभी लोग भवसागर से पार हो गए है॥ रहाउ॥
ਸਾਧਸੰਗਿ ਮਲੁ ਲਾਥੀ ॥
साधसंगि मलु लाथी ॥
सत्संगति में शामिल होने से मन की मैल निवृत्त हो गई है और
ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ਭਇਓ ਸਾਥੀ ॥
पारब्रहमु भइओ साथी ॥
परब्रह्म-परमेश्वर उसका साथी बन गया है।
ਨਾਨਕ ਨਾਮੁ ਧਿਆਇਆ ॥
नानक नामु धिआइआ ॥
नानक ने तो हरि-नाम का ही ध्यान किया है और
ਆਦਿ ਪੁਰਖ ਪ੍ਰਭੁ ਪਾਇਆ ॥੨॥੧॥੬੫॥
आदि पुरख प्रभु पाइआ ॥२॥१॥६५॥
आदिपुरुष प्रभु को पा लिया है॥ २॥ १॥ ६५॥
ਸੋਰਠਿ ਮਹਲਾ ੫ ॥
सोरठि महला ५ ॥
सोरठि महला ५ ॥
ਜਿਤੁ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ਚਿਤਿ ਆਇਆ ॥
जितु पारब्रहमु चिति आइआ ॥
जिसे परब्रह्म याद आया है,
ਸੋ ਘਰੁ ਦਯਿ ਵਸਾਇਆ ॥
सो घरु दयि वसाइआ ॥
उसका घर उसने सुख-समृद्ध कर दिया है।