ਜਨਮ ਜਨਮ ਕੇ ਕਿਲਬਿਖ ਜਾਹਿ ॥
जनम जनम के किलबिख जाहि ॥
तेरे जन्म-जन्मांतर के पाप दूर हो जाएँगे।
ਆਪਿ ਜਪਹੁ ਅਵਰਾ ਨਾਮੁ ਜਪਾਵਹੁ ॥
आपि जपहु अवरा नामु जपावहु ॥
स्वयं ईश्वर के नाम का जाप कर और दूसरों से भी नाम का जाप करवा।
ਸੁਨਤ ਕਹਤ ਰਹਤ ਗਤਿ ਪਾਵਹੁ ॥
सुनत कहत रहत गति पावहु ॥
सुनने, कहने एवं इस आचरण में रहने से मुक्ति मिल जाएगी।
ਸਾਰ ਭੂਤ ਸਤਿ ਹਰਿ ਕੋ ਨਾਉ ॥
सार भूत सति हरि को नाउ ॥
सारभूत हरि का सत्य नाम है।
ਸਹਜਿ ਸੁਭਾਇ ਨਾਨਕ ਗੁਨ ਗਾਉ ॥੬॥
सहजि सुभाइ नानक गुन गाउ ॥६॥
नानक ! सहज स्वभाव से प्रभु की गुणस्तुति कर ॥ ६॥
ਗੁਨ ਗਾਵਤ ਤੇਰੀ ਉਤਰਸਿ ਮੈਲੁ ॥
गुन गावत तेरी उतरसि मैलु ॥
(हे जीव !) ईश्वर के गुण गाते हुए तेरी पापों की मैल उतर जाएगी
ਬਿਨਸਿ ਜਾਇ ਹਉਮੈ ਬਿਖੁ ਫੈਲੁ ॥
बिनसि जाइ हउमै बिखु फैलु ॥
एवं अहंकार-रूपी विष का विस्तार भी मिट जाएगा।
ਹੋਹਿ ਅਚਿੰਤੁ ਬਸੈ ਸੁਖ ਨਾਲਿ ॥
होहि अचिंतु बसै सुख नालि ॥
वह बेफिक्र हो जाएगा और सुखपूर्वक बसेगा
ਸਾਸਿ ਗ੍ਰਾਸਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਸਮਾਲਿ ॥
सासि ग्रासि हरि नामु समालि ॥
जो अपने प्रत्येक श्वास एवं ग्रास से हरि के नाम की आराधना करेगा ।
ਛਾਡਿ ਸਿਆਨਪ ਸਗਲੀ ਮਨਾ ॥
छाडि सिआनप सगली मना ॥
हे मन ! अपनी तमाम चतुरता त्याग दे।
ਸਾਧਸੰਗਿ ਪਾਵਹਿ ਸਚੁ ਧਨਾ ॥
साधसंगि पावहि सचु धना ॥
साध संगत करने से सच्चा धन मिल जाएगा।
ਹਰਿ ਪੂੰਜੀ ਸੰਚਿ ਕਰਹੁ ਬਿਉਹਾਰੁ ॥
हरि पूंजी संचि करहु बिउहारु ॥
ईश्वर के नाम की पूँजी संचित कर और उसका ही व्यापार कर।
ਈਹਾ ਸੁਖੁ ਦਰਗਹ ਜੈਕਾਰੁ ॥
ईहा सुखु दरगह जैकारु ॥
इस तरह इस जीवन में सुख मिलेगा और प्रभु के दरबार में सत्कार होगा।
ਸਰਬ ਨਿਰੰਤਰਿ ਏਕੋ ਦੇਖੁ ॥
सरब निरंतरि एको देखु ॥
वह एक ईश्वर को सर्वत्र देखता है,”
ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਜਾ ਕੈ ਮਸਤਕਿ ਲੇਖੁ ॥੭॥
कहु नानक जा कै मसतकि लेखु ॥७॥
हे नानक ! जिसके माथे पर भाग्य विद्यमान है ॥ ७ ॥
ਏਕੋ ਜਪਿ ਏਕੋ ਸਾਲਾਹਿ ॥
एको जपि एको सालाहि ॥
एक ईश्वर के नाम का जाप कर और केवल उसकी ही सराहना कर।
ਏਕੁ ਸਿਮਰਿ ਏਕੋ ਮਨ ਆਹਿ ॥
एकु सिमरि एको मन आहि ॥
एक ईश्वर का चिन्तन कर और केवल उसे ही अपने हृदय में बसा।
ਏਕਸ ਕੇ ਗੁਨ ਗਾਉ ਅਨੰਤ ॥
एकस के गुन गाउ अनंत ॥
उस अनन्त एक ईश्वर के गुण गायन कर।
ਮਨਿ ਤਨਿ ਜਾਪਿ ਏਕ ਭਗਵੰਤ ॥
मनि तनि जापि एक भगवंत ॥
मन एवं तन से एक भगवान का जाप कर।
ਏਕੋ ਏਕੁ ਏਕੁ ਹਰਿ ਆਪਿ ॥
एको एकु एकु हरि आपि ॥
वह परमात्मा आप ही आप है।
ਪੂਰਨ ਪੂਰਿ ਰਹਿਓ ਪ੍ਰਭੁ ਬਿਆਪਿ ॥
पूरन पूरि रहिओ प्रभु बिआपि ॥
जीवों में व्यापक होकर प्रभु सब ओर बस रहा है।
ਅਨਿਕ ਬਿਸਥਾਰ ਏਕ ਤੇ ਭਏ ॥
अनिक बिसथार एक ते भए ॥
एक ईश्वर से अनेक प्रसार हुए हैं।
ਏਕੁ ਅਰਾਧਿ ਪਰਾਛਤ ਗਏ ॥
एकु अराधि पराछत गए ॥
भगवान की आराधना करने से पाप मिट जाते हैं।
ਮਨ ਤਨ ਅੰਤਰਿ ਏਕੁ ਪ੍ਰਭੁ ਰਾਤਾ ॥
मन तन अंतरि एकु प्रभु राता ॥
मेरा मन एवं शरीर एक प्रभु में मग्न हुए हैं।
ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਨਾਨਕ ਇਕੁ ਜਾਤਾ ॥੮॥੧੯॥
गुर प्रसादि नानक इकु जाता ॥८॥१९॥
हे नानक ! गुरु की कृपा से उसने एक ईश्वर को ही जाना है ॥८॥१९॥
ਸਲੋਕੁ ॥
सलोकु ॥
श्लोक॥
ਫਿਰਤ ਫਿਰਤ ਪ੍ਰਭ ਆਇਆ ਪਰਿਆ ਤਉ ਸਰਨਾਇ ॥
फिरत फिरत प्रभ आइआ परिआ तउ सरनाइ ॥
हे पूज्य प्रभु ! मैं भटक-भटक कर तेरी ही शरण में आया हूँ।
ਨਾਨਕ ਕੀ ਪ੍ਰਭ ਬੇਨਤੀ ਅਪਨੀ ਭਗਤੀ ਲਾਇ ॥੧॥
नानक की प्रभ बेनती अपनी भगती लाइ ॥१॥
हे प्रभु ! नानक एक यही विनती करता है कि मुझे अपनी भक्ति में लगा ले ॥१॥
ਅਸਟਪਦੀ ॥
असटपदी ॥
अष्टपदी ॥
ਜਾਚਕ ਜਨੁ ਜਾਚੈ ਪ੍ਰਭ ਦਾਨੁ ॥
जाचक जनु जाचै प्रभ दानु ॥
हे प्रभु ! मैं भिखारी तेरे नाम का दान माँगता हूँ।
ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਦੇਵਹੁ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ॥
करि किरपा देवहु हरि नामु ॥
हे हरि ! कृपा करके मुझे अपना नाम प्रदान कीजिए।
ਸਾਧ ਜਨਾ ਕੀ ਮਾਗਉ ਧੂਰਿ ॥
साध जना की मागउ धूरि ॥
मैं तो साधुओं के चरणों की धूली ही मांगता हूँ।
ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਮੇਰੀ ਸਰਧਾ ਪੂਰਿ ॥
पारब्रहम मेरी सरधा पूरि ॥
हे पारब्रह्म ! मेरी श्रद्धा पूर्ण कीजिए।
ਸਦਾ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭ ਕੇ ਗੁਨ ਗਾਵਉ ॥
सदा सदा प्रभ के गुन गावउ ॥
मैं हमेशा ही प्रभु का गुणानुवाद करता रहूँ।
ਸਾਸਿ ਸਾਸਿ ਪ੍ਰਭ ਤੁਮਹਿ ਧਿਆਵਉ ॥
सासि सासि प्रभ तुमहि धिआवउ ॥
हे प्रभु ! प्रत्येक श्वास से मैं तेरी ही आराधना करूँ।
ਚਰਨ ਕਮਲ ਸਿਉ ਲਾਗੈ ਪ੍ਰੀਤਿ ॥
चरन कमल सिउ लागै प्रीति ॥
प्रभु के चरणों से मेरा प्रेम पड़ा हुआ है।
ਭਗਤਿ ਕਰਉ ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਨਿਤ ਨੀਤਿ ॥
भगति करउ प्रभ की नित नीति ॥
मैं हमेशा ही प्रभु की भक्ति करता रहूँ।
ਏਕ ਓਟ ਏਕੋ ਆਧਾਰੁ ॥
एक ओट एको आधारु ॥
हे भगवान ! तुम ही मेरी एक ओट तथा एक सहारा हो।
ਨਾਨਕੁ ਮਾਗੈ ਨਾਮੁ ਪ੍ਰਭ ਸਾਰੁ ॥੧॥
नानकु मागै नामु प्रभ सारु ॥१॥
हे मेरे प्रभु ! नानक तेरे सर्वोत्तम नाम की याचना करता है॥ १॥
ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਮਹਾ ਸੁਖੁ ਹੋਇ ॥
प्रभ की द्रिसटि महा सुखु होइ ॥
प्रभु की करुणा-दृष्टि से परम सुख उपलब्ध होता है।
ਹਰਿ ਰਸੁ ਪਾਵੈ ਬਿਰਲਾ ਕੋਇ ॥
हरि रसु पावै बिरला कोइ ॥
कोई विरला पुरुष ही हरि-रस को पाता है।
ਜਿਨ ਚਾਖਿਆ ਸੇ ਜਨ ਤ੍ਰਿਪਤਾਨੇ ॥
जिन चाखिआ से जन त्रिपताने ॥
जो इसे चखते हैं, वे जीव तृप्त हो जाते हैं।
ਪੂਰਨ ਪੁਰਖ ਨਹੀ ਡੋਲਾਨੇ ॥
पूरन पुरख नही डोलाने ॥
वे पूर्ण पुरुष बन जाते हैं और कभी (माया में) डगमगाते नहीं।
ਸੁਭਰ ਭਰੇ ਪ੍ਰੇਮ ਰਸ ਰੰਗਿ ॥
सुभर भरे प्रेम रस रंगि ॥
वह प्रभु के प्रेम की मिठास एवं आनंद से पूर्णता भरे रहते हैं।
ਉਪਜੈ ਚਾਉ ਸਾਧ ਕੈ ਸੰਗਿ ॥
उपजै चाउ साध कै संगि ॥
साधुओं की संगति में उनके मन में आत्मिक चाव उत्पन्न हो जाता है।
ਪਰੇ ਸਰਨਿ ਆਨ ਸਭ ਤਿਆਗਿ ॥
परे सरनि आन सभ तिआगि ॥
अन्य सब कुछ त्याग कर वह प्रभु की शरण लेते हैं।
ਅੰਤਰਿ ਪ੍ਰਗਾਸ ਅਨਦਿਨੁ ਲਿਵ ਲਾਗਿ ॥
अंतरि प्रगास अनदिनु लिव लागि ॥
उनका हृदय उज्ज्वल हो जाता है और दिन-रात वह अपनी वृती ईश्वर में लगाते हैं।
ਬਡਭਾਗੀ ਜਪਿਆ ਪ੍ਰਭੁ ਸੋਇ ॥
बडभागी जपिआ प्रभु सोइ ॥
भाग्यशाली पुरुषों ने ही प्रभु का जाप किया है।
ਨਾਨਕ ਨਾਮਿ ਰਤੇ ਸੁਖੁ ਹੋਇ ॥੨॥
नानक नामि रते सुखु होइ ॥२॥
हे नानक ! जो पुरुष प्रभु के नाम में मग्न रहते हैं, वे सुख पाते हैं।॥ २ ॥
ਸੇਵਕ ਕੀ ਮਨਸਾ ਪੂਰੀ ਭਈ ॥
सेवक की मनसा पूरी भई ॥
सेवक की मनोकामना पूर्ण हो गई है,
ਸਤਿਗੁਰ ਤੇ ਨਿਰਮਲ ਮਤਿ ਲਈ ॥
सतिगुर ते निरमल मति लई ॥
जबसे सतिगुरु से निर्मल उपदेश लिया है ।
ਜਨ ਕਉ ਪ੍ਰਭੁ ਹੋਇਓ ਦਇਆਲੁ ॥
जन कउ प्रभु होइओ दइआलु ॥
अपने सेवक पर प्रभु कृपालु हो गया है।
ਸੇਵਕੁ ਕੀਨੋ ਸਦਾ ਨਿਹਾਲੁ ॥
सेवकु कीनो सदा निहालु ॥
अपने सेवक को हमेशा के लिए उसने कृतार्थ कर दिया है।
ਬੰਧਨ ਕਾਟਿ ਮੁਕਤਿ ਜਨੁ ਭਇਆ ॥
बंधन काटि मुकति जनु भइआ ॥
सेवक के (माया के) बन्धन कट गए हैं और उसने मोक्ष प्राप्त कर लिया है।
ਜਨਮ ਮਰਨ ਦੂਖੁ ਭ੍ਰਮੁ ਗਇਆ ॥
जनम मरन दूखु भ्रमु गइआ ॥
उसका जन्म-मरण, दुःख एवं दुविधा दूर हो गए हैं।
ਇਛ ਪੁਨੀ ਸਰਧਾ ਸਭ ਪੂਰੀ ॥
इछ पुनी सरधा सभ पूरी ॥
उसकी इच्छा पूर्ण हो गई है और श्रद्धा भी पूरी हो गई है।
ਰਵਿ ਰਹਿਆ ਸਦ ਸੰਗਿ ਹਜੂਰੀ ॥
रवि रहिआ सद संगि हजूरी ॥
भगवान हमेशा साथ बस रहा है।
ਜਿਸ ਕਾ ਸਾ ਤਿਨਿ ਲੀਆ ਮਿਲਾਇ ॥
जिस का सा तिनि लीआ मिलाइ ॥
जिसका था, उसने अपने साथ मिला लिया है।
ਨਾਨਕ ਭਗਤੀ ਨਾਮਿ ਸਮਾਇ ॥੩॥
नानक भगती नामि समाइ ॥३॥
हे नानक ! प्रभु की भक्ति से सेवक नाम में लीन हो गया है।॥ ३ ॥
ਸੋ ਕਿਉ ਬਿਸਰੈ ਜਿ ਘਾਲ ਨ ਭਾਨੈ ॥
सो किउ बिसरै जि घाल न भानै ॥
उस भगवान को क्यों भुलाएँ, जो इन्सान की सेवा-भक्ति की उपेक्षा नहीं करता।
ਸੋ ਕਿਉ ਬਿਸਰੈ ਜਿ ਕੀਆ ਜਾਨੈ ॥
सो किउ बिसरै जि कीआ जानै ॥
उस भगवान को क्यों भुलाएँ, जो किए को जानता है।